/ Jan 12, 2026
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UTTARAKHAND UCC: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में यूसीसी लागू होने के बाद से विवाह पंजीकरण कराने वालों की प्रतिदिन की औसत संख्या में 24 गुना की बढ़ोतरी हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। इस कानून के प्रभाव में आने के बाद से प्रशासनिक आंकड़ों में यह बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है।

राज्य में 27 जनवरी 2025 से समान नागरिक संहिता कानून लागू किया गया था। आंकड़ों के मुताबिक, इस तारीख के बाद से जुलाई 2025 तक, यानी महज छह महीने की अवधि में विवाह पंजीकरण की कुल संख्या तीन लाख से अधिक हो गई है। इसकी तुलना अगर पुराने अधिनियम से की जाए, तो अंतर काफी स्पष्ट दिखाई देता है। वर्ष 2010 में लागू हुए पुराने अधिनियम के तहत 26 जनवरी 2025 तक कुल 3 लाख 30 हजार 064 विवाह पंजीकरण हुए थे। पुराने अधिनियम के तहत प्रतिदिन औसतन केवल 67 विवाह पंजीकरण होते थे। वहीं, यूसीसी लागू होने के बाद यह दैनिक औसत बढ़कर 1634 तक पहुंच गया है।

समान नागरिक संहिता को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान संकल्प व्यक्त किया था। सत्ता में आने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही राज्य में यूसीसी लागू करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद कानून का मसौदा तैयार करने के लिए विभिन्न औपचारिकताएं पूरी की गईं और जनमत संग्रह कराया गया। सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद 27 जनवरी 2025 को इसे राज्य में विधिवत रूप से लागू कर दिया गया।

यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप बनाया गया है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों को शामिल किया गया है। कानून के तहत महिला और पुरुषों के लिए विवाह की आयु निर्धारित की गई है। इसके अलावा, सभी धर्मों में तलाक और अन्य प्रक्रियाओं के लिए समान प्रावधान किए गए हैं। इस कानून के माध्यम से बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगाई गई है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों, विशेषकर महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करना है।

विवाह पंजीकरण के आंकड़ों में आई वृद्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करना राज्य सरकार का एक महत्वपूर्ण निर्णय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी का उद्देश्य किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजीकरण में हुई वृद्धि यह दर्शाती है कि जनता ने इस कानून को स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि उत्तराखंड के इस कदम से अन्य राज्य भी प्रेरणा ले सकते हैं और भविष्य में वहां भी इस मॉडल को अपनाया जा सकता है।

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