INDIA BIS SEISMIC MAP 2025: भारत में भूकंप जोखिम को लेकर सबसे बड़ा वैज्ञानिक बदलाव करते हुए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने नया अर्थक्वेक डिजाइन कोड और अपडेटेड भूकंपीय जोनेशन मानचित्र जारी कर दिया है। इस नए मानचित्र में पहली बार पूरे हिमालयी क्षेत्र को सबसे अधिक खतरे वाले जोन-VI में रखा गया है, जिसके तहत अब उत्तराखंड का पूरा क्षेत्र उच्चतम भूकंप जोखिम श्रेणी में शामिल हो गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पिछले कई दशकों में भूकंपीय जोखिम आकलन का सबसे बड़ा पुनर्मूल्यांकन है।

INDIA BIS SEISMIC MAP 2025: पहले क्या था और अब क्या बदल गया
पहले उत्तराखंड के बड़े हिस्सों को अलग-अलग जोनों में बांटा गया था, जिसमें देहरादून, ऋषिकेश और कोटद्वार Zone-IV में और धारचूला, मुनस्यारी, नैनीताल और उत्तरकाशी Zone-V में आते थे। लेकिन नए मैप के लागू होते ही राज्य के सभी हिस्सों को सीधे Zone-VI में डाल दिया गया है। नए मानचित्र के अनुसार अब देश का 61 प्रतिशत हिस्सा मध्यम से उच्च खतरे की श्रेणी में आ चुका है, जबकि पहले यह आंकड़ा 59 प्रतिशत था। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के अनुसार अनुसार सिस्मिक जोनिंग मैपिंग का काम BIS करता है और इस बार किया गया बदलाव हिमालय क्षेत्र की वास्तविकता को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

पहले वैज्ञानिक समझ यह थी कि धारचूला और मुनस्यारी जैसे ऊपरी हिस्सों में खतरा ज्यादा है जबकि देहरादून जैसे शहर अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते थे। लेकिन नए वैज्ञानिक डेटा और केलकुलेशन के आधार पर कमेटी ने पूरे हिमालय क्षेत्र को एक समान उच्च खतरे में रखा है। यह बदलाव पूरी तरह से सुरक्षा से जुड़े मानकों पर आधारित है। अब उत्तराखंड में चाहे देहरादून में कोई इमारत बने या धारचूला में कोई बड़े स्तर का हाइड्रो प्रोजेक्ट, दोनों के निर्माण मानकों में कोई अंतर नहीं रहेगा। हर जगह समान सेफ्टी और स्ट्रक्चरल स्ट्रैन्थ लागू होगी, जिससे एकसमान भूकंप सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

हिमालय में एक जैसा खतरा क्यों माना गया
नए वैज्ञानिक आकलन के अनुसार हिमालय के नीचे लगातार बढ़ा भू-स्ट्रेस और सक्रिय फॉल्ट लाइनों की गहराई से जांच यह संकेत देती है कि पूरे क्षेत्र में भूकंप की तीव्रता और असर समान रूप से गंभीर हो सकता है। BIS का नया मानचित्र अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित प्रायिक भूकंपीय जोखिम मूल्यांकन (PSHA) से तैयार किया गया है। इसमें सक्रिय फॉल्ट्स, जमीन की प्रतिक्रिया, कंप्यूटर मॉडलिंग और संभावित अधिकतम भूकंप की स्थिति का विश्लेषण शामिल है। पुराने मैप में केवल उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाता था, जहां पहले बड़े भूकंप आए थे। लेकिन नया आकलन भविष्य में खतरे की वैज्ञानिक संभावना पर आधारित है।

भारत में भूकंप मैप का इतिहास
भारत का पहला भूकंप मानचित्र 1935 में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने तैयार किया था, जिसमें देश को तीन श्रेणियों में बांटा गया था — गंभीर, हल्का और मामूली खतरे वाले इलाके। इसके बाद BIS ने समय-समय पर इसे अपडेट किया। 1962 में छह जोन, 1966 में सात जोन और 1970 में पांच जोन बनाए गए। तब यह वर्गीकरण पुराने भूकंप रिकॉर्ड पर आधारित था, जबकि INDIA BIS SEISMIC MAP 2025 पूरी तरह आधुनिक वैज्ञानिक डेटा, सिस्मिक सक्रियता और कंप्यूटर मॉडलिंग पर आधारित है।

INDIA BIS SEISMIC MAP 2025: नए जोन के अनुसार खतरे का स्तर
INDIA BIS SEISMIC MAP 2025 में अब पाँच जोन शामिल किए गए हैं- Zone-II, Zone-III, Zone-IV, Zone-V और सबसे जोखिम वाला Zone-VI। Zone-VI में पूरा हिमालय क्षेत्र शामिल है, जिसे सबसे अधिक खतरे वाला क्षेत्र माना गया है। यह बदलाव उत्तराखंड सहित पूरे हिमालयी राज्यों के निर्माण, शहरी योजना और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। शहरी योजनाकारों, इंजीनियरों और प्रशासनिक संस्थाओं को अब नए वैज्ञानिक मानकों के अनुसार सुरक्षा उपायों को लागू करना होगा। इससे भविष्य में आपदा जोखिम कम करने में मदद मिलेगी और इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक भूकंप-रोधी बनाया जा सकेगा।

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