UTTARAKHAND WILDLIFE WEEK 2025: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून जू में आयोजित कार्यक्रम में वन्य जीव प्राणी सप्ताह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब राज्य में वन्यजीवों के हमलों से होने वाली जनहानि पर परिजनों को मिलने वाली सहायता राशि 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस प्रस्ताव पर शासन की सहमति मिल चुकी है और इसे आगामी कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

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ToggleUTTARAKHAND WILDLIFE WEEK 2025: वन्यजीव हमारी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वन्य जीव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग हैं। मां दुर्गा का वाहन शेर, गणेश जी का मूषक, मां सरस्वती का हंस, भगवान कार्तिकेय का मोर, लक्ष्मी जी का उल्लू और भगवान शिव के साथ नागराज और नंदी इस बात के प्रतीक हैं कि सनातन संस्कृति में मानव और जीव-जगत का गहरा सह-अस्तित्व है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि भारत की जीवन पद्धति में आदिकाल से ही वन्यजीवों का संरक्षण एक स्वाभाविक हिस्सा रहा है।

संरक्षित वन क्षेत्र में उत्तराखंड अग्रणी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की लगभग 14.77 प्रतिशत भूमि संरक्षित वन क्षेत्र में आती है, जिसमें 6 राष्ट्रीय उद्यान, 7 वन्यजीव विहार और 4 संरक्षण आरक्षित क्षेत्र शामिल हैं। यह अनुपात पूरे देश के औसत 5.27 प्रतिशत से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की हरियाली और स्वतंत्र रूप से विचरण करते वन्य जीव वर्षभर लाखों देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से राज्य सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने पर जोर दे रही है। इकोनॉमी, इकोलॉजी और टेक्नोलॉजी को साथ लेकर आगे बढ़ते हुए राज्य को नए अवसरों से जोड़ा जा रहा है।

इको-टूरिज्म और युवाओं के लिए नए अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नया इको-टूरिज्म मॉडल तैयार किया जा रहा है ताकि लोग जंगलों से जुड़ सकें और प्रकृति को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने बताया कि बाघ, गुलदार, हाथी और हिम तेंदुए जैसे दुर्लभ वन्य प्राणियों की संख्या में उत्साहजनक वृद्धि हुई है, लेकिन इसके साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियां भी सामने आई हैं। इस संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग को ड्रोन और जीपीएस तकनीक उपलब्ध कराई जा रही है।

कार्यक्रम में वन मंत्री सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक समीर सिन्हा, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) रंजन कुमार मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने इस अवसर पर कहा कि वन और वन्यजीवों की रक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है और इकोनॉमी, इकोलॉजी तथा टेक्नोलॉजी के संतुलन से ही राज्य को नई दिशा मिलेगी।

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