UTTARAKHAND MONSOON 2025: 26 सितंबर 2025 को उत्तराखंड से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक विदाई हो गई। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, इस वर्ष जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में राज्य में सामान्य से 22 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। कुल 1,299.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य 1,060.7 मिलीमीटर से काफी ऊपर है। अधिक वर्षा फसलों के लिए लाभकारी रही, लेकिन भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं को भी बढ़ावा दिया।

UTTARAKHAND MONSOON 2025 में असमान वर्षा पैटर्न
इस मानसून सीजन में उत्तराखंड के कई जिलों में असमान वर्षा देखी गई। बागेश्वर जिले में सबसे अधिक 439 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 251 प्रतिशत अधिक थी। देहरादून में 450.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 121 प्रतिशत अधिक रही। सितंबर महीने में कुल 44 प्रतिशत अधिक बारिश होने से निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। हालांकि, जून में 49 प्रतिशत कम वर्षा के बाद जुलाई और अगस्त में वर्षा सामान्य हुई।

मानव और आर्थिक प्रभाव
अधिक वर्षा के कारण राज्य में 263 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, मुख्य रूप से नैनीताल, टिहरी गढ़वाल और पिथौरागढ़ में भूस्खलन और बाढ़ से। आईएमडी की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में कुल 29 प्रतिशत अधिशेष वर्षा हुई, जिसमें उत्तराखंड का योगदान महत्वपूर्ण रहा। अब किसान रबी फसल की तैयारी में जुटेंगे, लेकिन जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अनियमितताओं पर चिंता बरकरार है।

मौसम में बदलाव
मानसून की विदाई के साथ ही राज्य के मैदानी इलाकों में गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। देहरादून और उधम सिंह नगर जैसे जिलों में तापमान सामान्य से चार-पांच डिग्री ऊपर पहुंचकर 35 डिग्री सेल्सियस तक हो गया। पर्वतीय जिलों जैसे चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में 27 सितंबर को हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना बनी रही। आईएमडी ने अगले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान जताया है।

उत्तराखंड में 14 से 20 सितंबर तक भारी बारिश की संभावना, कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी
देश दुनिया से जुड़ी हर खबर और जानकारी के लिए क्लिक करें-देवभूमि न्यूज

