Nepal Interim Government: नेपाल में जनरेशन जेड (Gen Z) के नेतृत्व में हुए भ्रष्टाचार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बाद आखिरकार नई अंतरिम सरकार का गठन हो गया है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने 12 सितंबर को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। वह नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं। संविधान के अनुच्छेद 61 के तहत की गई इस नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य देश में शांति बहाल करना और अगले छह महीनों के भीतर नए चुनाव कराना है। भारत ने इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए नेपाल के साथ सहयोग जारी रखने का आश्वासन दिया है।

Nepal Interim Government: GEN Z का आंदोलन
प्रदर्शन 8 सितंबर को शुरू हुए थे, जब सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स व्हाट्सएप और वीचैट पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह कदम फेक न्यूज, घृणा फैलाने वाली भाषा और ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए उठाया गया था, लेकिन युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मानते हुए सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया। जल्द ही काठमांडू सहित देशभर में हिंसक विरोध तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, आर्थिक असमानता और खराब शासन के खिलाफ जमकर आवाज उठाई।

9 सितंबर को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया, जब प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और सरकारी कार्यालयों पर धावा बोल दिया और आगजनी की घटनाएं हुईं। हिंसा में अब तक कम से कम 51 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें प्रदर्शनकारी, पुलिसकर्मी और जेल से भागे कैदी शामिल हैं। 1,300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। स्थिति और बिगड़ गई जब देशभर की जेलों से करीब 13,500 कैदी भाग निकले, जिनमें से अब तक केवल 67 को ही पकड़ा जा सका है।

नेपाल आर्मी ने 9 सितंबर की रात से काठमांडू में कर्फ्यू लगा दिया और सड़कों पर सैनिक तैनात कर दिए। प्रदर्शनकारियों ने सुशिला कार्की को अंतरिम नेता चुना। कार्की भ्रष्टाचार विरोधी छवि और साहसिक फैसलों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने भारतीय न्यूज चैनल न्यूज18 से बातचीत में कहा कि युवाओं के अनुरोध पर उन्होंने यह जिम्मेदारी स्वीकार की है और उनकी पहली प्राथमिकता मृतकों के परिवारों की मदद करना और चुनाव कराना है।

73 वर्षीय सुशिला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं। 2017 में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके रुख के चलते उन पर कुछ सांसदों ने महाभियोग चलाने की कोशिश की थी, लेकिन यह प्रयास असफल रहा। राष्ट्रपति कार्यालय ने पुष्टि की है कि संसद को भंग करने पर सहमति बन चुकी है, जो प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी। कार्की ने शपथ ग्रहण के बाद कहा कि उनकी अंतरिम सरकार का फोकस शांति, स्थिरता और संस्थागत सुधारों पर रहेगा।

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