WAQF AMENDMENT ACT 2025 को लेकर देश में उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में लगातार दूसरे दिन भी सुनवाई हुई। गुरुवार को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए सात दिन का समय दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई अब 5 मई को दोपहर 2 बजे होगी। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पैरवी करते हुए कोर्ट से एक सप्ताह का समय मांगा, ताकि कानून से संबंधित प्रारंभिक दस्तावेज पेश किए जा सकें।

WAQF AMENDMENT ACT 2025: नई नियुक्ति पर रोक
तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इस मामले में जवाबदेह है और लाखों लोगों के प्रतिनिधित्व को देखते हुए यह मामला बहुत बड़ा और संवेदनशील है। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि इस बीच न तो कोई नई नियुक्ति केंद्रीय वक्फ काउंसिल या किसी वक्फ बोर्ड में की जाएगी और न ही किसी वक्फ संपत्ति को डीनोटिफाई किया जाएगा। कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस आश्वासन को रिकॉर्ड में लिया और कहा कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक किसी भी घोषित या उपयोगकर्ता के माध्यम से वक्फ की गई संपत्ति की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

सिर्फ 5 प्रमुख याचिकाओं पर ही सुनवाई
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में दायर 70 से अधिक याचिकाओं की जगह अब सिर्फ 5 प्रमुख याचिकाओं पर ही सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि 110 से 120 फाइलें पढ़ना संभव नहीं है, इसलिए सभी याचिकाकर्ता आपस में मिलकर 5 प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनाएं और उन्हीं पर सुनवाई की जाए। इसके लिए नोडल काउंसिल के जरिए इन मुद्दों को तय करने को कहा गया है। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, राजीव धवन, अभिषेक मनु सिंघवी और सीयू सिंह ने अपनी दलीलें दीं।

उन्होंने अदालत से अंतरिम आदेश देने की मांग की और कानून को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 25, 26, 29 और 300A का उल्लंघन बताया। उनका तर्क था कि इस कानून में गैर-मुसलमानों को वक्फ बोर्ड में शामिल करना और कलेक्टर को वक्फ संपत्ति से संबंधित निर्णय लेने का अधिकार देना सीधे तौर पर सरकारी हस्तक्षेप को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव करता है क्योंकि अन्य धार्मिक ट्रस्टों पर ऐसे प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं।

कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि किसी भी वक्फ संपत्ति को लेकर तब तक कोई प्रशासनिक फैसला नहीं लिया जाएगा, जब तक अंतिम निर्णय नहीं आ जाता। अदालत ने यह भी कहा कि नियुक्तियों और प्रशासनिक बदलावों से मौजूदा स्थिति में कोई फेरबदल नहीं किया जाना चाहिए। इससे पहले बुधवार को भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में भी याचिकाकर्ताओं की तरफ से अंतरिम आदेश की मांग की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वह इस पूरे मामले में संतुलन बनाए रखने के लिए एक अंतरिम आदेश पर विचार कर रहा है, ताकि किसी भी पक्ष को अनावश्यक नुकसान न हो और कानून की वैधता पर अंतिम फैसला आने तक वर्तमान स्थिति बनी रहे।

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