WAQF AMENDMENT BILL 2025: लोकसभा में बुधवार को 12 घंटे की लंबी चर्चा के बाद वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो गया। देर रात 2 बजे हुई मतदान प्रक्रिया में कुल 520 सांसदों ने भाग लिया, जिसमें 288 ने विधेयक के पक्ष में और 232 ने विरोध में मतदान किया। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विधेयक को ‘यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट’ यानी ‘उम्मीद’ नाम दिया है। इसे आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा। विधेयक पारित होने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनि मत से पारित कर दिया।

WAQF AMENDMENT BILL 2025: बिल पारित होने पर प्रतिक्रिया
विधेयक पर चर्चा के दौरान AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसका कड़ा विरोध जताते हुए इसकी प्रति फाड़ दी। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का मकसद मुस्लिम समुदाय को अपमानित करना है। उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह गांधी ने काले कानूनों का विरोध किया था, उसी तरह वह भी इस विधेयक के खिलाफ खड़े हैं। विधेयक पर लोकसभा में जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वक्फ संपत्तियों में किसी गैर-इस्लामिक तत्व को शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए अल्पसंख्यकों में भय फैला रहा है।

उत्तराखंड में मिल रहा है समर्थन
विधेयक पारित होने के बाद उत्तराखंड से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इसका समर्थन किया है। शम्स ने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे असली मुसलमान नहीं हैं, बल्कि वे केवल राजनीतिक मुसलमान हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गरीब मुस्लिम समुदाय की उम्मीद बताया और कहा कि इसीलिए इस विधेयक का नाम ‘उम्मीद’ रखा गया है। शम्स ने आरोप लगाया कि पूर्व सरकारों ने वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग किया और कुछ संगठनों ने राजनीतिक लाभ के लिए इन संपत्तियों को बेचा या खुर्दबुर्द किया।

लोकसभा में पेश होगा वक्फ संशोधन विधेयक 2025, सदन में हंगामे के आसार
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