केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को मलयालम फिल्म अभिनेता सिद्दीकी (Siddique) को एक अभिनेत्री द्वारा उनके खिलाफ दर्ज बलात्कार के मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
Malayalam Actor Siddique: कास्टिंग काउच’ में अभिनेता जमानत याचिका खारिज
अभिनेता के खिलाफ आरोप इस साल 19 अगस्त को न्यायमूर्ति के हेमा की समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद लगाए गए थे। इस रिपोर्ट में मलयालम फिल्म उद्योग में बड़े पैमाने पर यौन शोषण, ‘कास्टिंग काउच’ प्रथाओं और लिंग भेदभाव का खुलासा किया गया था।

इस रिपोर्ट के बाद कई अभिनेताओं, निर्देशकों और अन्य फिल्मी हस्तियों के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों की लहर चली है। सिद्दीकी (Siddique) के खिलाफ मामला एक अभिनेत्री की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिसने आरोप लगाया था कि सिद्दीकी ने 2016 में तिरुवनंतपुरम के मैस्कॉट होटल में उसके साथ बलात्कार किया।
शुरू में पुलिस में शिकायत करने में झिझक रही अभिनेत्री ने बाद में राज्य पुलिस प्रमुख को ईमेल भेजकर आरोप लगाया कि तमिल फिल्म में भूमिका के बदले यौन संबंधों की मांग करने से इनकार करने पर सिद्दीकी ने उसके साथ बलात्कार किया।
सिद्दीकी (Siddique) ने अपने खिलाफ आरोप लगने के बाद मलयालम मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (एएमएमए) के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था।
इस मामले की जांच न्यायमूर्ति हेमा समिति की रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद यौन शोषण के मामलों की जांच के लिए गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही है।
अग्रिम जमानत की मांग करते हुए सिद्दीकी ने अपनी याचिका में कहा है कि महिला शिकायतकर्ता 2019 से ही सोशल मीडिया पर यह दावा कर रही है कि उन्होंने 2016 में एक थिएटर में उनके साथ यौन दुर्व्यवहार करने की कोशिश की थी। याचिका में कहा गया है कि अब उन्होंने बलात्कार का अधिक गंभीर आरोप लगाया है।

Malayalam Actor Siddique: मुझे जानबूझकर झूठे मामले में फंसाने की कोशिश
सिद्दीकी (Siddique) की याचिका में कहा गया है, “यह स्पष्ट है कि वास्तविक शिकायतकर्ता जानती है कि यौन उत्पीड़न का साधारण आरोप जमानती अपराध है, इसलिए याचिकाकर्ता को हिरासत में नहीं लिया जा सकता है।”
अभिनेता ने तर्क दिया कि बयान में यह बदलाव दर्शाता है कि शिकायतकर्ता जानबूझकर उसे झूठे मामले में फंसाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि आरोपों में कई विसंगतियां हैं और ये काफी देरी से लगाए गए हैं।
सिद्दीकी ने यह भी कहा कि इस मामले में सबूत इकट्ठा करने के लिए हिरासत में पूछताछ पूरी तरह से अनावश्यक है। उनका प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता बी रमन पिल्लई और अधिवक्ता फिलिप टी वर्गीस और सुजेश मेनन वीबी कर रहे हैं।
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