2027 विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान, हनुमानगढ़ी में भी करेंगे
उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या की सियासत एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी पत्नी एवं मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव के साथ 12 दिसंबर को अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन करने पहुंचेंगे। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व विधायक पवन पांडेय ने शनिवार को इस प्रस्तावित दौरे की जानकारी दी।
अयोध्या दौरे की इस घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। खास बात यह है कि जनवरी 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अखिलेश यादव की यह राम मंदिर में पहली प्रस्तावित यात्रा होगी। ऐसे में इस दौरे को धार्मिक आस्था के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक रणनीति के नजरिये से भी देखा जा रहा है।
पवन पांडेय ने दी दौरे की जानकारी
परिवार के साथ अयोध्या पहुंचेंगे सपा प्रमुख

पवन पांडेय के मुताबिक, अखिलेश यादव पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन करेंगे और इसके बाद राम मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन करेंगे। इस दौरान वह अपने परिवार के साथ अयोध्या आएंगे। उनकी योजना संतों से मुलाकात करने और उनका आशीर्वाद लेने की भी है।
पवन पांडेय को हाल ही में समाजवादी पार्टी ने अयोध्या विधानसभा सीट से दोबारा अपना प्रत्याशी घोषित किया है। इसलिए उनके इस बयान को पार्टी की आगामी चुनावी तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली यात्रा
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर रहेंगी सबकी निगाहें
अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में देशभर के राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुई थीं। हालांकि, अखिलेश यादव उस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए थे।
इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कई बार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को राम मंदिर के मुद्दे पर घेरा। भाजपा नेताओं का आरोप रहा है कि सपा की राजनीति में राम मंदिर और हिंदू आस्था को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
वहीं, अखिलेश यादव पहले भी कह चुके हैं कि वह इटावा के सैफई में बन रहे केदारेश्वर धाम का निर्माण पूरा होने के बाद अयोध्या में रामलला के दर्शन करेंगे। अब 12 दिसंबर की तारीख सामने आने के बाद उनके इस फैसले को राजनीतिक और धार्मिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2027 के चुनाव से पहले क्यों अहम है यह दौरा?
भाजपा और सपा के बीच राम मंदिर को लेकर राजनीतिक मुकाबला
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए अयोध्या एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का प्रमुख केंद्र बन सकती है। राम मंदिर भाजपा के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल रहा है। पार्टी लगातार मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा को अपनी उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत करती रही है।
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी भी अपनी राजनीतिक रणनीति को व्यापक बनाने में जुटी है। लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन के बाद पार्टी की नजर अब विधानसभा चुनाव पर है।
अखिलेश यादव की प्रस्तावित अयोध्या यात्रा को भाजपा के राम मंदिर संबंधी राजनीतिक विमर्श का जवाब देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस यात्रा को लेकर किसी विस्तृत चुनावी रणनीति की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
PDA के साथ धार्मिक और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
सपा की नजर व्यापक मतदाता वर्ग पर
समाजवादी पार्टी की राजनीति में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग की एकजुटता प्रमुख मुद्दा रहा है। अखिलेश यादव लगातार इस सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की बात करते रहे हैं।
हाल के समय में धार्मिक स्थलों से जुड़ी उनकी गतिविधियों और संतों से मुलाकातों को पार्टी की व्यापक राजनीतिक पहुंच बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
अयोध्या में रामलला के दर्शन का फैसला भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके जरिए अखिलेश यादव यह संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं कि उनकी पार्टी सभी धर्मों और समुदायों की आस्था का सम्मान करती है।
हालांकि, इस दौरे का वास्तविक राजनीतिक प्रभाव आगामी चुनावों में ही स्पष्ट होगा।
मुलायम सिंह यादव के दौर की राजनीति भी रहेगी चर्चा में
भाजपा पहले भी सपा को घेरती रही है
अयोध्या का मुद्दा समाजवादी पार्टी के लिए ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। वर्ष 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान कारसेवकों पर हुई पुलिस कार्रवाई को भाजपा लगातार चुनावी मुद्दा बनाती रही है।
भाजपा इस घटना का उल्लेख करके समाजवादी पार्टी की तत्कालीन सरकार की नीतियों पर सवाल उठाती है। वहीं, सपा अपने राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टिकोण को सामने रखती रही है।
ऐसे में अखिलेश यादव का राम मंदिर पहुंचना इस पुराने राजनीतिक विमर्श को फिर से चर्चा में ला सकता है।
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अयोध्या दौरे पर टिकी राजनीतिक नजरें
12 दिसंबर को होने वाली प्रस्तावित यात्रा उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकती है। एक ओर भाजपा राम मंदिर को अपनी प्रमुख उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी अपनी राजनीतिक पहचान और सामाजिक आधार को मजबूत करने में जुटी है।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि अखिलेश और डिंपल यादव की अयोध्या यात्रा के दौरान कौन-कौन से संतों से मुलाकात होती है और अखिलेश यादव राम मंदिर से क्या राजनीतिक या सामाजिक संदेश देते हैं।
फिलहाल इतना तय है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या में होने वाला यह दौरा उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा को जन्म देने वाला है।

