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महाराष्ट्र की राजनीति में फिर हलचल! PM मोदी के ‘सुप्रिया और हम देश संभाल लेंगे’ संदेश से बढ़ी चर्चा, NCP में अंदरूनी कलह के संकेत

महाराष्ट्र की राजनीति में नए सियासी समीकरणों की आहट

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार का परिवार और पार्टी एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले को लेकर दिया गया संदेश, NCP के वरिष्ठ नेताओं की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात और पार्टी के भीतर कथित असंतोष ने नए सियासी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या महाराष्ट्र में एक बार फिर पवार परिवार के बीच सियासी समीकरण बदलने वाले हैं?

PM मोदी का शरद पवार को खास संदेश क्यों बना चर्चा का विषय?NCP

हाल ही में शरद पवार की तबीयत खराब होने के बाद अस्पताल में भर्ती होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उन्हें स्वास्थ्य का ध्यान रखने और पूरी तरह आराम करने की सलाह दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने शरद पवार से कहा, ”सुप्रिया और हम देश संभाल लेंगे। आप अपनी सेहत का ध्यान रखिए और आराम कीजिए। आपका आशीर्वाद हमारे साथ बना रहे।”

प्रधानमंत्री का यह संदेश राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में आ गया। हालांकि इसे शरद पवार के प्रति सम्मान और व्यक्तिगत संवेदनशीलता के रूप में भी देखा जा रहा है, लेकिन महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।

NCP में अंदरूनी खींचतान की खबरें क्यों तेज हुईं?

साल 2023 में NCP दो गुटों में बंट गई थी। एक गुट शरद पवार के नेतृत्व में रहा, जबकि दूसरा गुट अजित पवार के साथ चला गया था। अजित पवार ने भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति सरकार का साथ दिया था।

हालांकि जनवरी 2026 में अजित पवार की विमान हादसे में मृत्यु के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव आया। उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान संभाली और महायुति सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हासिल की।

लेकिन अब पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं और नए नेतृत्व के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऐसी खबरें सामने आईं कि कुछ वरिष्ठ नेता पार्टी में निर्णय लेने की प्रक्रिया और सांसद पार्थ पवार की भूमिका से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।

इसी बीच NCP के वरिष्ठ नेताओं की अमित शाह से मुलाकात की खबरों ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी।

सुनेत्रा पवार की बैठक और रोहित पवार की चेतावनी

पार्टी के भीतर कथित असंतोष की खबरों के बीच सुनेत्रा पवार ने अपने आधिकारिक आवास देवगिरी में पार्टी की कोर कमेटी की बैठक बुलाई। एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी महत्वपूर्ण बैठक बताई गई।

इस बैठक में पार्टी के नेताओं और विधायकों ने संगठन की एकजुटता तथा आपसी तालमेल को लेकर चिंताएं जाहिर कीं।

दूसरी ओर, शरद पवार के परिवार से जुड़े विधायक रोहित पवार ने सुनेत्रा पवार और उनके बेटों पार्थ तथा जय पवार को राजनीतिक रणनीतियों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने भाजपा और उसके करीबी कुछ नेताओं की राजनीतिक रणनीति को समझने की बात कही।

उनके इस बयान ने अटकलों को और तेज कर दिया कि क्या पवार परिवार के भीतर फिर से राजनीतिक मतभेद गहराने लगे हैं?

क्या भाजपा शरद पवार को अपने करीब लाने की कोशिश में है?

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने भी राजनीतिक चर्चा को नया मोड़ दिया। उन्होंने दावा किया कि यदि सुप्रिया सुले NDA में शामिल होती हैं तो भविष्य में केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उन्हें जिम्मेदारी मिल सकती है।

हालांकि यह आठवले का राजनीतिक बयान है और इसे भाजपा की आधिकारिक पेशकश नहीं माना जा सकता।

भाजपा के लिए शरद पवार का राजनीतिक प्रभाव काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। पश्चिमी महाराष्ट्र में सहकारी चीनी मिलों, जिला बैंकों, स्थानीय निकायों और मजबूत राजनीतिक नेटवर्क पर पवार परिवार का लंबे समय से प्रभाव रहा है।

यदि शरद पवार और भाजपा के बीच कोई राजनीतिक समझ विकसित होती है, तो इसका असर महाराष्ट्र के पूरे राजनीतिक समीकरण पर पड़ सकता है।

क्या NCP के दोनों गुट फिर एक हो सकते हैं?

अजित पवार के जीवित रहते दोनों NCP गुटों के विलय की चर्चाएं भी सामने आई थीं। लेकिन उनके निधन के बाद यह प्रक्रिया ठहर गई।

अब सवाल यह है कि क्या भविष्य में दोनों गुट फिर एक साथ आ सकते हैं? क्या शरद पवार और सुनेत्रा पवार के बीच कोई नई राजनीतिक समझ बनेगी? और क्या सुप्रिया सुले की भूमिका महाराष्ट्र से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में और महत्वपूर्ण हो सकती है?

फिलहाल इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।

NCP ने किया अंदरूनी कलह की खबरों का खंडन

NCP के प्रवक्ता उमेश पाटिल ने पार्टी में अंदरूनी सत्ता संघर्ष की खबरों को गलत बताया है। उनका कहना है कि अमित शाह से वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात सुनेत्रा पवार की जानकारी और अनुरोध के बाद ही तय हुई थी। उन्होंने पार्थ और जय पवार की पार्टी में सक्रिय भूमिका का भी बचाव किया।

इसलिए पार्टी में किसी बड़े राजनीतिक विद्रोह या विलय की संभावना को फिलहाल पुख्ता खबर नहीं माना जा सकता।

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निष्कर्ष:

महाराष्ट्र में आगे क्या होगा?

महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार का प्रभाव हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का शरद पवार के प्रति सम्मान, NCP में कथित असंतोष और भाजपा के साथ संभावित राजनीतिक समीकरण आने वाले दिनों में नई चर्चाओं को जन्म दे सकते हैं।

हालांकि अभी किसी बड़े गठबंधन, विलय या राजनीतिक बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इतना तय है कि पवार परिवार के अगले राजनीतिक कदम पर महाराष्ट्र की राजनीति की नजर बनी रहेगी।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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