BS6 Phase 2 भारत में वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए लाया गया उत्सर्जन नियमों का दूसरा और ज्यादा सख्त चरण है, जो 1 अप्रैल 2023 से लागू हुआ। इसे आम बोलचाल में BS6.2 या RDE नियम भी कहा जाता है। नई गाड़ी खरीदते समय अक्सर यह शब्द सुनाई देता है, लेकिन ज्यादातर लोग नहीं जानते कि पुराने BS6 और नए BS6.2 इंजन में असल में क्या बदला है।
पहले चरण के BS6 नियम क्या थे?
भारत ने 1 अप्रैल 2020 से पूरे देश में BS6 उत्सर्जन मानक लागू किए थे। इसमें ईंधन में सल्फर की मात्रा घटाई गई और गाड़ियों के धुएं की सीमा काफी सख्त की गई। लेकिन उस समय गाड़ियों की जांच सिर्फ लैब में तय टेस्ट साइकिल पर होती थी। असली सड़क पर गाड़ी कितना धुआं छोड़ रही है, इसकी जांच का कोई पक्का सिस्टम नहीं था।
BS6 Phase 2 में सबसे बड़ा बदलाव क्या है?
BS6 Phase 2 में सबसे बड़ा बदलाव RDE यानी रियल ड्राइविंग एमिशन टेस्ट है। अब गाड़ियों की जांच सिर्फ लैब में नहीं, बल्कि असली सड़कों पर ट्रैफिक, हाईवे और चढ़ाई जैसी स्थितियों में भी होती है। इसके लिए गाड़ी पर PEMS नाम का पोर्टेबल उपकरण लगाया जाता है, जो चलते समय धुएं की असली मात्रा मापता है। इससे कंपनियां सिर्फ लैब टेस्ट पास करके बच नहीं सकतीं।
OBD-2 सिस्टम से क्या फायदा है?
दूसरा अहम बदलाव OBD-2 यानी ऑन बोर्ड डायग्नोस्टिक्स का नया वर्जन है। यह सिस्टम गाड़ी चलते समय लगातार इंजन और धुएं से जुड़े हिस्सों पर नजर रखता है। अगर कैटेलिटिक कन्वर्टर, ऑक्सीजन सेंसर या किसी दूसरे हिस्से की खराबी से प्रदूषण तय सीमा से ऊपर जाता है, तो डैशबोर्ड पर तुरंत चेतावनी लाइट जल जाती है।
BS6 Phase 2 के तहत इसके लिए थ्रॉटल पोजिशन, एयर फ्यूल रेशियो, इंजन तापमान, फ्यूल प्रेशर और इंजन स्पीड पर नजर रखने वाले ज्यादा सेंसर लगाए गए हैं। गाड़ियों में प्रोग्राम्ड फ्यूल इंजेक्शन भी अनिवार्य हुआ। दोपहिया वाहनों पर ये नियम चरणों में लागू हुए। अप्रैल 2025 से नए बाइक और स्कूटर OBD-2B मानक के साथ आ रहे हैं, जिसमें धुएं से जुड़े सिस्टम की निगरानी और सख्त हो गई है।
BS6 और BS6.2 इंजन में मुख्य अंतर
पुराने BS6 इंजन की जांच सिर्फ लैब में होती थी, जबकि BS6 Phase 2 वाले इंजन को असली सड़क पर भी उत्सर्जन सीमा के अंदर रहना होता है। पुराने इंजन में OBD सिस्टम सीमित था, जबकि नए इंजन में रियल टाइम निगरानी और ज्यादा सेंसर होते हैं।
कई कंपनियों ने इसी के साथ अपने इंजन E20 पेट्रोल के अनुकूल भी बनाए। इंजन की पावर और टॉर्क में आमतौर पर बहुत बड़ा अंतर नहीं आया। कई मॉडलों में कंपनियों ने बेहतर ट्यूनिंग से माइलेज भी लगभग पहले जैसा बनाए रखा।
कीमत और गाड़ियों पर क्या पड़ा असर?
नए सेंसर और महंगे एग्जॉस्ट सिस्टम की वजह से BS6 Phase 2 लागू होने के बाद ज्यादातर कारों और दोपहिया वाहनों की कीमतें बढ़ गईं। कई कंपनियों के लिए छोटी डीजल गाड़ियों को नए नियमों के हिसाब से बदलना महंगा पड़ा।
इसी वजह से Honda Jazz, Honda WR-V, Skoda Octavia, Nissan Kicks और Mahindra KUV100 जैसे मॉडल बंद कर दिए गए। Hyundai i20 और Honda Amaze जैसे मॉडलों से डीजल इंजन हटाया गया, जबकि Maruti Alto 800 और Renault Kwid का 800cc इंजन भी बंद हो गया।

पुराने BS6 वाहन मालिकों के लिए क्या है?
अगर आपके पास पहले चरण वाली BS6 गाड़ी है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। वह पूरी तरह वैध है और आगे भी चलाई जा सकती है। BS4 और BS6 के बीच के अंतर को विस्तार से समझने के लिए ये खबरें भी पढ़ें: BS4 और BS6 में क्या बड़ा अंतर है?, Hybrid और Plug-in Hybrid कार में क्या अंतर है? और Torque और Horsepower में क्या अंतर है?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. BS6 Phase 2 कब से लागू हुआ?
चार पहिया वाहनों के लिए ये नियम 1 अप्रैल 2023 से लागू हुए, जबकि दोपहिया वाहनों पर OBD-2 के नियम चरणबद्ध तरीके से लागू किए गए।
2. क्या BS6 Phase 2 गाड़ियों का माइलेज कम होता है?
आमतौर पर नहीं। ज्यादातर मॉडलों में माइलेज लगभग पहले जैसा है और कुछ में बेहतर फ्यूल इंजेक्शन से सुधार भी हुआ है।
3. क्या पुरानी BS6 गाड़ी को BS6 Phase 2 में बदलना होगा?
नहीं, ये नियम सिर्फ नई बनने और बिकने वाली गाड़ियों पर लागू होते हैं। पहले से रजिस्टर्ड BS6 वाहनों पर कोई असर नहीं है।
4. अपनी गाड़ी का उत्सर्जन मानक कहां देखें?
गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर से उत्सर्जन मानक की जानकारी सरकार के Parivahan पोर्टल पर देखी जा सकती है।
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