दिल्ली में 1 नवंबर 2026 से बाहर से आने वाले पुराने मालवाहक वाहनों की नो एंट्री लागू होते ही BS6 Engine एक बार फिर चर्चा में है। अब दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड वही कमर्शियल गुड्स वाहन शहर में घुस पाएंगे जो BS6 मानक वाले हैं या CNG, LNG और बिजली से चलते हैं।
दिल्ली में किन वाहनों पर लगी रोक?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देश पर दिल्ली परिवहन विभाग ने यह नियम लागू किया है। BS4 डीजल मालवाहक वाहनों को 31 अक्टूबर 2026 तक जो छूट मिली थी, वह अब खत्म हो चुकी है। दिल्ली में रजिस्टर्ड कमर्शियल वाहनों, BS6 डीजल वाहनों और CNG, LNG या इलेक्ट्रिक वाहनों को इस रोक से छूट है।
GRAP के अलग अलग चरणों की पाबंदियां भी साथ में लागू रहेंगी। इसके अलावा सर्दियों के प्रदूषण प्लान के तहत बिना वैध PUC सर्टिफिकेट वाली गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर ईंधन न देने की सख्ती भी की जा रही है।
BS मानक क्या होते हैं?
BS का पूरा नाम भारत स्टेज है। ये केंद्र सरकार के तय किए गए उत्सर्जन मानक हैं, जो बताते हैं कि किसी गाड़ी का धुआं अधिकतम कितना प्रदूषण फैला सकता है। भारत ने प्रदूषण पर तेजी से काबू पाने के लिए BS5 को छोड़ दिया और 1 अप्रैल 2020 से पूरे देश में सीधे BS6 लागू कर दिया। इसके बाद से देश में सिर्फ BS6 वाहन ही बिक रहे हैं।
BS6 Engine क्या है और यह कैसे काम करता है?
BS6 Engine ऐसा इंजन है जिसे भारत स्टेज 6 के सख्त उत्सर्जन नियमों के हिसाब से बनाया गया है। इसमें नई तकनीक के साथ धुएं को साफ करने वाले उपकरण लगे होते हैं। डीजल गाड़ियों में DPF यानी डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर कालिख को रोकता है।
जबकि SCR तकनीक AdBlue नाम के घोल की मदद से नाइट्रोजन ऑक्साइड को कम करती है। दोपहिया वाहनों में कार्बोरेटर की जगह फ्यूल इंजेक्शन आया है, जो ईंधन को ज्यादा सटीक मात्रा में इंजन तक पहुंचाता है। साथ ही OBD सिस्टम इंजन की खराबी पर तुरंत चेतावनी देता है।
BS4 और BS6 में क्या है बड़ा अंतर?
BS4 ईंधन में सल्फर की मात्रा 50 PPM तक होती थी, जबकि BS6 ईंधन में यह घटकर सिर्फ 10 PPM रह गई है। BS6 नियमों में डीजल कारों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड की सीमा करीब 68 प्रतिशत और पार्टिकुलेट मैटर की सीमा करीब 80 प्रतिशत से ज्यादा घटा दी गई है। आसान भाषा में कहें तो BS6 Engine वाली गाड़ी BS4 के मुकाबले कहीं कम जहरीला धुआं छोड़ती है।
माइलेज और परफॉर्मेंस पर कितना असर?
कई लोगों को लगता है कि BS6 Engine आने से माइलेज बहुत गिर गया है, लेकिन ऐसा नहीं है। ज्यादातर मॉडलों में माइलेज लगभग बराबर रहा है, कुछ में हल्की कमी और कुछ में फ्यूल इंजेक्शन की वजह से सुधार भी देखा गया। पावर और टॉर्क में भी बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
कुछ गाड़ियों में थोड़ी गिरावट आई, जबकि कंपनियों ने कई मॉडलों में इंजन ट्यूनिंग से इसकी भरपाई कर दी। हां, नई तकनीक की वजह से BS6 वाहनों की कीमत बढ़ी है और डीजल गाड़ियों में AdBlue भरवाने जैसा छोटा अतिरिक्त खर्च भी जुड़ गया है।

पुरानी गाड़ी वालों को क्या करना चाहिए?
BS4 गाड़ी में BS6 ईंधन डालने से कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि धुआं थोड़ा साफ ही निकलता है। लेकिन सिर्फ ईंधन बदलने से आपकी गाड़ी BS6 Engine वाली नहीं बन जाती। अपनी गाड़ी का BS मानक जानने के लिए RC या वाहन पोर्टल पर उत्सर्जन मानक देखें। PUC हमेशा अपडेट रखें और सर्दियों में दिल्ली जाने से पहले नियम जरूर जांच लें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. भारत में BS6 Engine वाले वाहन कब से अनिवार्य हुए?
1 अप्रैल 2020 से पूरे देश में सिर्फ BS6 मानक वाले नए वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन की अनुमति है।
2. क्या BS6 Engine से माइलेज कम हो जाता है?
ज्यादातर मामलों में माइलेज लगभग पहले जैसा ही रहता है। फर्क मॉडल और ड्राइविंग के तरीके पर ज्यादा निर्भर करता है।
3. क्या BS4 गाड़ी को BS6 Engine में बदला जा सकता है?
आमतौर पर नहीं। इसके लिए इंजन और एग्जॉस्ट सिस्टम में बड़े बदलाव चाहिए, जो व्यावहारिक और सस्ते नहीं हैं। CNG या इलेक्ट्रिक रेट्रोफिट जैसे मंजूर विकल्पों के बारे में RTO से जानकारी लें।
4. अपनी गाड़ी का BS मानक कहां चेक करें?
गाड़ी के नंबर से उत्सर्जन मानक की जानकारी सरकार के Parivahan पोर्टल पर देखी जा सकती है।
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