पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आज आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार और पार्टी संगठन के लिए उस समय मुश्किलें बढ़ गईं, जब पार्टी के तीन बागी विधायक भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। इन नेताओं के पार्टी छोड़ने से पंजाब की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। राजनीतिक जानकार इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे हैं।
भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं में हरमीत सिंह पठानमाजरा, चेतन सिंह जौड़ामाजरा और कुंवर विजय प्रताप सिंह शामिल हैं। इन नेताओं के पार्टी छोड़ने का घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब आम आदमी पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
किन नेताओं ने छोड़ी आम आदमी पार्टी?
हरमीत सिंह पठानमाजरा
हरमीत सिंह पठानमाजरा पंजाब के सनौर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। उन्होंने भगवंत मान सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया। उन्होंने राज्य में नशे की समस्या, बढ़ते कर्ज और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सरकार की आलोचना की थी।
चेतन सिंह जौड़ामाजरा
चेतन सिंह जौड़ामाजरा समाना विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं। वह भगवंत मान सरकार में जनवरी 2023 से सितंबर 2024 तक मंत्री भी रहे थे। हालांकि, मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद से उनकी पार्टी नेतृत्व के साथ नाराजगी की खबरें सामने आती रही थीं। उन्होंने भी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।
कुंवर विजय प्रताप सिंह
कुंवर विजय प्रताप सिंह पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं और अमृतसर नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे हैं। उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पहले ही निलंबित किया गया था। उन्होंने भी आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने का फैसला किया।
उम्मीदवारों की पहली सूची के बाद बढ़ी नाराजगी
आम आदमी पार्टी ने हाल ही में 2027 विधानसभा चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति सामने आने लगी। पठानमाजरा और जौड़ामाजरा की नाराजगी की एक प्रमुख वजह उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए नेताओं को जिम्मेदारी दिया जाना भी माना जा रहा है।
दोनों विधायकों ने उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद पार्टी से दूरी बनाई और अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर दी। इसके बाद उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
सोमवार को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय के बाहर दोनों नेताओं को भाजपा के समर्थन में नारे लगाते हुए देखा गया। इसके बाद तीनों नेताओं ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।
भगवंत मान सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने पंजाब सरकार की कार्यशैली पर कई सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, राज्य में नशे की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। इसके अलावा पंजाब पर बढ़ता कर्ज और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी सरकार के लिए चिंता का विषय हैं।
चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने राज्य में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं से जुड़े मामलों और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। वहीं पठानमाजरा ने राज्य के बढ़ते कर्ज और सरकार में दिल्ली के नेताओं के कथित प्रभाव को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
इन आरोपों ने आम आदमी पार्टी के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ी जुबानी जंग
तीन नेताओं के भाजपा में शामिल होने के बाद पंजाब में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के पंजाब अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा दूसरे दलों से निकाले गए और असंतुष्ट नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है।
आप के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने भी भाजपा की आलोचना करते हुए उसे दूसरे दलों के असंतुष्ट नेताओं को इकट्ठा करने वाली पार्टी बताया।
दूसरी ओर भाजपा के लिए इन नेताओं का शामिल होना पंजाब में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का अवसर माना जा रहा है।
2027 के चुनाव में क्या पड़ेगा असर?
पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 92 सीटें जीतकर ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी। उस समय पार्टी ने कांग्रेस और अकाली दल सहित अन्य राजनीतिक दलों को पीछे छोड़ दिया था।
हालांकि, लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान पंजाब में पार्टी का प्रदर्शन पहले की तुलना में कमजोर दिखाई दिया। ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव आम आदमी पार्टी के लिए अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की बड़ी परीक्षा होगा।
तीन विधायकों का पार्टी छोड़ना केवल विधानसभा में संख्या का मामला नहीं है, बल्कि इससे पार्टी के अंदरूनी असंतोष और संगठनात्मक एकजुटता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
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निष्कर्ष:
आप के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती
पंजाब में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले तीन विधायकों का भाजपा में शामिल होना आम आदमी पार्टी के लिए निश्चित रूप से एक बड़ा झटका है। इससे भाजपा को राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का अवसर मिला है।
हालांकि, केवल विधायकों के दल बदलने से चुनावी नतीजे तय नहीं होते। अंतिम फैसला जनता के मुद्दों, सरकार के कामकाज, उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की रणनीति पर निर्भर करेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भगवंत मान सरकार पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को नियंत्रित कर पाएगी और 2027 के चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर सकेगी? आने वाले महीनों में पंजाब की राजनीति में इस सवाल का जवाब काफी हद तक स्पष्ट हो सकता है।

