USB 3.2 और यूएसबी 2.0 का अंतर समझना आज हर फोन और लैपटॉप खरीदने वाले के लिए जरूरी है, क्योंकि दोनों एक जैसे टाइप-सी पोर्ट में मिलते हैं लेकिन इनकी डेटा स्पीड में कई गुना फर्क होता है। बाहर से देखने पर केबल और पोर्ट बिल्कुल एक जैसे लगते हैं, इसलिए ज्यादातर लोग धोखा खा जाते हैं। नतीजा यह होता है कि महंगे फोन से भी बड़ी वीडियो फाइल कंप्यूटर में भेजने में कई मिनट लग जाते हैं। लोग सोचते हैं कि टाइप-सी है तो तेज ही होगा, जबकि असली कहानी कुछ और है।
टाइप-सी कोई स्पीड नहीं, सिर्फ पोर्ट का आकार है
सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि टाइप-सी को एक स्पीड मान लिया जाता है। असल में टाइप-सी सिर्फ पोर्ट और प्लग का आकार है, जो दोनों तरफ से लग जाता है। उस पोर्ट के अंदर डेटा किस रफ्तार से चलेगा, यह यूएसबी का वर्जन तय करता है। यानी एक ही टाइप-सी पोर्ट 2.0 वाला भी हो सकता है और 3.2 वाला भी।
यूएसबी 2.0 क्या है?
यूएसबी 2.0 साल 2000 में आया था और इसकी अधिकतम डेटा स्पीड 480 मेगाबिट प्रति सेकंड है। यानी असल इस्तेमाल में यह लगभग 30 से 40 मेगाबाइट प्रति सेकंड तक ही फाइल भेज पाता है। आज भी कई बजट और मिड रेंज फोन टाइप-सी पोर्ट के साथ यही पुराना वर्जन देते हैं। चार्जिंग और छोटी फाइलों के लिए यह काफी है, लेकिन बड़े वीडियो भेजने में धीमा पड़ जाता है।
USB 3.2 क्या है और इसके तीन लेवल
यह नया और कहीं ज्यादा तेज वर्जन है, जिसके तीन स्तर होते हैं। जेन 1 की स्पीड 5 गीगाबिट, जेन 2 की 10 गीगाबिट और जेन 2×2 की 20 गीगाबिट प्रति सेकंड तक होती है। सबसे निचला स्तर भी यूएसबी 2.0 से लगभग दस गुना तेज है।
पहले इन्हीं को USB 3.2 और 3.1 के नाम से भी बेचा जाता था, इसलिए नामों में काफी उलझन रहती है। अब इस उलझन को कम करने के लिए कंपनियां बॉक्स पर सीधे “5 जीबीपीएस” या “10 जीबीपीएस” जैसी स्पीड लिखने लगी हैं। खरीदते समय यही संख्या देखना सबसे आसान तरीका है।
दोनों में असली फर्क कहां दिखता है?
मान लीजिए आपको 10 जीबी का वीडियो फोन से लैपटॉप में भेजना है। पुराने वर्जन पर इसमें पांच मिनट या उससे ज्यादा लग सकते हैं, जबकि तेज वर्जन पर यह काम एक मिनट से भी कम में हो जाता है। फोन को मॉनिटर या टीवी से जोड़कर स्क्रीन दिखाने के लिए भी आमतौर पर तेज वर्जन चाहिए होता है। तेज एक्सटर्नल एसएसडी की पूरी स्पीड भी इसी पर मिलती है।
चार्जिंग स्पीड पर क्या असर पड़ता है?
फास्ट चार्जिंग का डेटा स्पीड से सीधा रिश्ता नहीं है। चार्जिंग की ताकत पावर डिलीवरी तकनीक, चार्जर और केबल की क्षमता पर निर्भर करती है। इसीलिए 2.0 वाला टाइप-सी केबल भी 60 या 100 वॉट तक चार्जिंग दे सकता है। लेकिन वही केबल डेटा बहुत धीमी रफ्तार से ही भेजेगा।
कैसे पता करें आपके फोन में कौन सा वर्जन है?
फोन की आधिकारिक वेबसाइट पर स्पेसिफिकेशन में “यूएसबी” वाला हिस्सा देखें, वहां वर्जन लिखा होता है। केबल खरीदते समय पैकेट पर लिखी डेटा स्पीड और वॉट दोनों जरूर जांचें। ध्यान रखें कि फोन और केबल दोनों तेज वर्जन वाले होने चाहिए।

किसी एक के भी पुराना होने पर स्पीड धीमी वाले के हिसाब से ही मिलेगी। निष्कर्ष अगर आप बड़ी फाइलें भेजते हैं, वीडियो बनाते हैं या फोन को मॉनिटर से जोड़ना चाहते हैं, तो USB 3.2 वाला फोन और केबल ही चुनें। सिर्फ चार्जिंग और छोटे काम के लिए पुराना वर्जन भी ठीक है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या हर टाइप-सी पोर्ट तेज होता है?
नहीं, टाइप-सी सिर्फ पोर्ट का आकार है। कई फोन में टाइप-सी पोर्ट के अंदर पुराना और धीमा 2.0 वर्जन ही होता है।
2. क्या 2.0 केबल से फास्ट चार्जिंग होती है?
हां, अगर केबल सही वॉट क्षमता वाला है तो फास्ट चार्जिंग हो जाती है। फर्क सिर्फ डेटा भेजने की रफ्तार में पड़ता है।
3. क्या तेज केबल पुराने फोन में चल जाएगा?
हां, नए केबल पुराने डिवाइस के साथ भी काम करते हैं। लेकिन स्पीड उतनी ही मिलेगी, जितनी पुराना डिवाइस सपोर्ट करता है।
4. USB 3.2 जेन 1 और जेन 2 में क्या फर्क है?
USB 3.2 जेन 1 की अधिकतम स्पीड 5 गीगाबिट प्रति सेकंड है, जबकि जेन 2 इससे दोगुनी यानी 10 गीगाबिट प्रति सेकंड तक जाती है।
5. USB 3.2 के आधिकारिक मानक कहां देखें?
USB 3.2 के सभी वर्जन, लोगो और स्पीड के आधिकारिक नियम यूएसबी-आईएफ की वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं।
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उपरोक्त USB 3.2 की जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

