भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इथेनॉल खरीद नीति में बड़ा बदलाव किया है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों के लिए जारी नए टेंडर में गन्ने के रस, चीनी और चीनी की चाशनी तथा बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल को शामिल नहीं किया गया है। इसके साथ ही मक्का आधारित इथेनॉल की खरीद कीमत भी घटा दी गई है। सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और उसकी बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण करना है। हालांकि, इस बदलाव से इथेनॉल उत्पादकों, चीनी मिलों और किसानों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ सकता है।
1. मक्का आधारित इथेनॉल की कीमत में कितनी कटौती हुई?
BPCL द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को जारी टेंडर के अनुसार, मक्का आधारित इथेनॉल की खरीद कीमत 71.86 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इस प्रकार प्रति लीटर 3 रुपये की कटौती की गई है।
इसके अतिरिक्त, मक्का आधारित इथेनॉल पर मिलने वाला प्रोत्साहन भी 5.79 रुपये से घटाकर 2.79 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इससे मक्का से इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों के लाभ पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, गन्ने से बने इथेनॉल को टेंडर से बाहर किए जाने के कारण अनाज आधारित इथेनॉल की मांग और आपूर्ति का महत्व बढ़ सकता है।
2. गन्ने से बने इथेनॉल को क्यों किया गया बाहर?
सरकार ने इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 के लिए इथेनॉल उत्पादन में चीनी के इस्तेमाल को शून्य करने का निर्देश दिया है। इसका अर्थ है कि संबंधित खरीद टेंडर के अंतर्गत गन्ने के रस, चीनी, चीनी की चाशनी और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल के लिए बोलियां आमंत्रित नहीं की गई हैं।
इस निर्णय के पीछे घरेलू चीनी आपूर्ति को सुरक्षित रखने की चिंता प्रमुख है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश के कारण चीनी उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। यदि गन्ने और उससे बनने वाले चीनी उत्पादों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में होता है, तो घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता कम हो सकती है और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
3. अब किन स्रोतों से खरीदा जाएगा इथेनॉल?
नए टेंडर में तेल कंपनियों को मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास उपलब्ध अतिरिक्त चावल और सी-हेवी शीरे से उत्पादित इथेनॉल की आपूर्ति के लिए बोलियां स्वीकार करने की अनुमति है।
BPCL की ओर से जारी यह टेंडर नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक की आपूर्ति अवधि के लिए लगभग 11 अरब लीटर इथेनॉल की खरीद से संबंधित है। इसका उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 कार्यक्रम की जरूरतों को पूरा करना है।
गन्ने से बनने वाले इथेनॉल को बाहर करने के बाद तेल कंपनियों को वैकल्पिक कच्चे माल पर अधिक निर्भर रहना पड़ेगा। इससे मक्का और चावल आधारित इथेनॉल उत्पादन की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
4. किसानों और चीनी उद्योग पर क्या होगा असर?
इस फैसले का चीनी उद्योग पर मिला-जुला प्रभाव पड़ सकता है। एक ओर चीनी मिलों को गन्ने से अधिक चीनी उत्पादन करने का अवसर मिलेगा, जिससे घरेलू आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, जिन मिलों ने इथेनॉल उत्पादन के लिए विशेष संयंत्रों में निवेश किया है, उन्हें अपने उत्पादन और बिक्री की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।
मक्का उत्पादकों के लिए भी स्थिति पूरी तरह लाभकारी नहीं है। गन्ने से बने इथेनॉल की अनुपलब्धता से अनाज आधारित इथेनॉल की मांग बढ़ सकती है, लेकिन मक्का की खरीद कीमत और प्रोत्साहन में कटौती से उत्पादकों तथा डिस्टिलरी कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। वास्तविक प्रभाव बाजार की मांग, उत्पादन लागत और वैकल्पिक कच्चे माल की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
5. पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पर प्रभाव
भारत इथेनॉल मिश्रण के माध्यम से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को घटाने का प्रयास कर रहा है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य इसी रणनीति का हिस्सा है।
लेकिन गन्ने से बने इथेनॉल को टेंडर से बाहर करने के बाद लगभग 11 अरब लीटर की खरीद आवश्यकता पूरी करना तेल कंपनियों के लिए आपूर्ति प्रबंधन की चुनौती बन सकता है। इसके लिए पर्याप्त मात्रा में मक्का, चावल और अन्य अनुमत स्रोतों से इथेनॉल उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
आगे और समाचार पढ़े;
- मध्य प्रदेश: ग्वालियर में मंदिर के पास श्रद्धालुओं को ट्रक ने कुचला, 15 की मौत और 28 घायल
- जानलेवा हमले की कोशिश के बाद टाइगर श्रॉफ की पहली तस्वीर! हाथ पर बैंडेज और सीने पर ड्रेसिंग ने बढ़ाई फैंस की चिंता
निष्कर्ष
BPCL का नया टेंडर भारत की इथेनॉल नीति में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। सरकार एक ओर चीनी की घरेलू उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को जारी रखना चाहती है। मक्का आधारित इथेनॉल की कीमत में कटौती उत्पादकों के लिए चुनौती है, जबकि वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता बढ़ने की संभावना है। इस नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि देश चीनी की आपूर्ति सुरक्षित रखते हुए पर्याप्त इथेनॉल का उत्पादन और खरीद कितनी प्रभावी ढंग से कर पाता है।

