HomeTech & Gadgetsक्या है India Semiconductor Mission और इसके क्या हैं मायने?

क्या है India Semiconductor Mission और इसके क्या हैं मायने?

India Semiconductor Mission भारत सरकार का वह बड़ा कार्यक्रम है, जिसका मकसद देश में चिप डिजाइन, निर्माण और पैकेजिंग का पूरा इकोसिस्टम खड़ा करना है, ताकि मोबाइल, कार और कंप्यूटर में लगने वाली चिप के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता घटे।

2026 इस मिशन के लिए सबसे अहम साल साबित हो रहा है। कागजी योजनाओं से आगे बढ़कर अब देश में बनी चिप का कमर्शियल उत्पादन शुरू हो चुका है। जुलाई में सरकार ने इसका दूसरा चरण मंजूर किया और सितंबर में SEMICON India 2026 में कई बड़े ऐलान हुए।

India Semiconductor Mission क्या है?

सरकार ने दिसंबर 2021 में 76,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ India Semiconductor Mission की शुरुआत की थी। यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करता है। इसके तहत चिप बनाने वाली फैब यूनिट, चिप की टेस्टिंग और पैकेजिंग करने वाली यूनिट, डिस्प्ले फैब और चिप डिजाइन करने वाली कंपनियों को आर्थिक मदद दी जाती है।

India Semiconductor Mission के पहले चरण में बड़ी परियोजनाओं को प्रोजेक्ट लागत का करीब आधा हिस्सा केंद्र सरकार की ओर से सहायता के रूप में दिया गया। कई राज्य सरकारें भी अलग से सब्सिडी देती हैं।

पहले चरण में अब तक क्या हुआ?

सितंबर 2026 तक देश में 12 सेमीकंडक्टर फैब और पैकेजिंग यूनिट को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें कुल निवेश 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। गुजरात के साणंद में Micron की यूनिट ने 2026 की शुरुआत में कमर्शियल उत्पादन शुरू किया और अब DRAM और NAND मेमोरी प्रोडक्ट दुनिया भर के ग्राहकों को भेजे जा रहे हैं। Kaynes Semicon और CG Semi की पैकेजिंग यूनिट में भी कमर्शियल काम शुरू हो चुका है।

17 सितंबर 2026 को मोहाली में CDIL और गुजरात में Suchi Semicon की यूनिट में भी उत्पादन शुरू हुआ। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की धोलेरा फैब देश की पहली बड़ी कमर्शियल चिप फैक्ट्री मानी जा रही है। इससे पहली चिप दिसंबर 2026 तक आने का लक्ष्य रखा गया था। चिप डिजाइन के क्षेत्र में 24 डिजाइन प्रोजेक्ट को आर्थिक मदद मिली है। 100 से ज्यादा स्टार्टअप और MSME को चिप डिजाइन सॉफ्टवेयर की सुविधा दी गई है।

ISM 2.0 को मिली मंजूरी

जुलाई 2026 में केंद्रीय कैबिनेट ने मिशन के दूसरे चरण यानी ISM 2.0 को 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी। यह पहले चरण से काफी बड़ा बजट है। दूसरे चरण के छह मुख्य स्तंभ हैं: चिप डिजाइन, मशीनें और कच्चा माल, फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च और प्रतिभा विकास।

इस बार सिर्फ फैक्ट्रियों पर नहीं, बल्कि चिप बनाने में लगने वाले खास केमिकल, गैस, उपकरण और कंपाउंड सेमीकंडक्टर पर भी जोर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार दूसरे चरण के लिए करीब 12 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। इससे सीधे तौर पर लगभग एक लाख नौकरियां बनने का अनुमान है।

SEMICON India 2026 के बड़े ऐलान

17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में SEMICON India 2026 का उद्घाटन किया। यह इस आयोजन का पांचवां संस्करण था। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया को चिप निर्माण के लिए नए और भरोसेमंद ठिकानों की जरूरत है और भारत वैकल्पिक सप्लायर बनने की तैयारी कर रहा है।

उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में भारत में बनी और पैक की गई चिप का निर्यात शुरू करने पर फोकस रहेगा। फैबलेस कंपनियों, बौद्धिक संपदा और AI के लिए सिलिकॉन फोटोनिक्स पर भी जोर दिया गया। सरकार कम से कम 200 चिप डिजाइन स्टार्टअप और कंपनियों को आगे बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

India Semiconductor Mission
India Semiconductor Mission

टैलेंट और आम लोगों के लिए क्या मायने?

सरकार एक लाख इंजीनियरिंग छात्रों को सेमीकंडक्टर स्किल की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखती है। अब तक करीब 70,000 छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और 300 से ज्यादा विश्वविद्यालय इंडस्ट्री स्तर के डिजाइन टूल इस्तेमाल कर रहे हैं। देश में चिप बनने से मोबाइल, लैपटॉप, कार और इलेक्ट्रॉनिक सामान की सप्लाई चेन मजबूत होगी। लंबे समय में इससे आयात खर्च घटेगा और इंजीनियरों के लिए देश में ही हाई टेक नौकरियां बढ़ेंगी।

India Semiconductor Mission की चुनौतियां अब भी बाकी

चिप बनाने के लिए लगातार बिजली, बेहद शुद्ध पानी और बड़ी पूंजी की जरूरत होती है। ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे देशों से मुकाबला भी आसान नहीं है। फिलहाल भारत में बनने वाली ज्यादातर चिप पुरानी और मध्यम तकनीक वाली हैं।

सबसे एडवांस्ड चिप के लिए अभी लंबा सफर तय करना है। फिर भी पहली बार कमर्शियल उत्पादन शुरू होने और दूसरे चरण की मंजूरी के साथ India Semiconductor Mission ने साफ संकेत दे दिया है कि भारत अब इस दौड़ में गंभीर खिलाड़ी बन चुका है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. India Semiconductor Mission कब शुरू हुआ था?

यह मिशन दिसंबर 2021 में 76,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू किया गया था।

2. India Semiconductor Mission 2.0 का बजट कितना है?

केंद्रीय कैबिनेट ने जुलाई 2026 में ISM 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।

3. भारत में अब तक कितनी सेमीकंडक्टर यूनिट मंजूर हुई हैं?

सितंबर 2026 तक 12 फैब और पैकेजिंग यूनिट को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश है।

4. किन कंपनियों ने भारत में कमर्शियल उत्पादन शुरू किया है?

Micron, Kaynes Semicon, CG Semi, CDIL और Suchi Semicon की यूनिट में कमर्शियल उत्पादन शुरू हो चुका है।

5. India Semiconductor Mission की आधिकारिक जानकारी कहां मिलती है?

योजनाओं, मंजूर परियोजनाओं और आवेदन से जुड़ी पूरी जानकारी मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

आगे और समाचार पढ़े:

India Semiconductor Mission के अलावा टेक्नोलॉजी से जुड़ी ये खबरें भी आपके काम की हैं: India’s Semiconductor Ecosystem Expands, PM Modi Highlights New Investment Opportunities, नई डिस्प्ले तकनीक Mini LED क्या है और 3D Printing Technology कैसे बदल रही है Manufacturing।

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उपरोक्त India Semiconductor Mission की जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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