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DTC ड्राइवरों का विरोध छठे दिन भी जारी, तोड़फोड़ के आरोप में 12 गिरफ्तार

दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवरों और कंडक्टरों का वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन छठे दिन भी जारी है। इस बीच दिल्ली पुलिस ने बसों में कथित तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारियां उत्तर-पश्चिम दिल्ली के कंझावला और बेगमपुर इलाकों में हुई घटनाओं के संबंध में की गई हैं। इस विवाद के कारण राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है और यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

बसों की खिड़कियां तोड़ने का आरोपDTC

पुलिस के मुताबिक, हड़ताल के दौरान अलग-अलग स्थानों पर DTC बसों के शीशे क्षतिग्रस्त किए जाने की शिकायतें मिली थीं। कंझावला थाने में दर्ज मामले की जांच के दौरान कुछ संदिग्धों की पहचान की गई। पुलिस ने बताया कि शुरुआती कार्रवाई के बाद तीन अन्य लोगों को कथित तौर पर हमलों की योजना बनाने और दूसरों को उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस डिजिटल संचार और एक कथित व्हाट्सऐप समूह की भी जांच कर रही है। पुलिस का दावा है कि इस समूह के माध्यम से बसों को निशाना बनाने से संबंधित चर्चा की गई थी। हालांकि, प्रदर्शन से जुड़े कुछ ड्राइवरों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तोड़फोड़ की घटनाओं के आधार पर पूरे आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारियां सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों से संबंधित हैं।

वेतन बढ़ोतरी समेत कई मांगें

DTC के कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में लगभग 862 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है। उनका तर्क है कि दिल्ली जैसे व्यस्त महानगर में भारी यातायात के बीच बस चलाने की जिम्मेदारी के मुकाबले यह राशि बेहद कम है। यूनियन ने दैनिक वेतन को बढ़ाकर कम से कम 2,000 रुपये करने की मांग की है।

ड्राइवरों की अन्य प्रमुख मांगों में बेसिक वेतन और महंगाई भत्ते पर आधारित वेतन संरचना, मेडिकल बीमा, दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सहायता, वार्षिक और त्योहार बोनस, सरकारी छुट्टियों का भुगतान तथा सवेतन अवकाश शामिल हैं। कर्मचारियों ने बसों के रखरखाव और दुर्घटनाओं के बाद वेतन से की जाने वाली कटौती को लेकर भी चिंता जताई है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई ड्राइवरों को सुबह तड़के ड्यूटी के लिए घर से निकलना पड़ता है और लंबे समय तक काम करने के बावजूद उनकी आय सीमित रहती है। कुछ कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें कई बार लंबी शिफ्ट में काम करना पड़ता है और बीमारी या अन्य व्यक्तिगत परिस्थितियों में पर्याप्त छुट्टी की सुविधा नहीं मिलती। ये आरोप कॉन्ट्रैक्ट आधारित रोजगार व्यवस्था और निजी एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हैं।

सरकार और परिवहन विभाग की प्रतिक्रिया

दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने ड्राइवरों से काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि अधिकांश मांगों पर चर्चा की जा चुकी है और वेतन बढ़ोतरी के मुद्दे पर निजी ऑपरेटरों तथा संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। परिवहन विभाग ने बसों के संचालन को सामान्य बनाने के लिए पूर्व DTC ड्राइवरों और अन्य उपलब्ध कर्मचारियों की मदद लेने का प्रयास किया है।

रविवार को कुछ बस सेवाएं फिर से शुरू की गईं। इसके अलावा, यात्रियों की बढ़ी हुई संख्या को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने अतिरिक्त ट्रेन यात्राएं संचालित कीं। हालांकि, बसों की सीमित उपलब्धता के कारण कई इलाकों में यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। ऑटो, कैब और अन्य परिवहन साधनों की मांग बढ़ने से यात्रियों के खर्च में भी वृद्धि होने की खबरें सामने आईं।

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यात्रियों पर असर और आगे की स्थिति

DTC बसें दिल्ली के लाखों यात्रियों के लिए रोजमर्रा के आवागमन का महत्वपूर्ण साधन हैं। हड़ताल के कारण कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों को मेट्रो, ऑटो और निजी कैब का सहारा लेना पड़ रहा है।

इस बीच, तोड़फोड़ के आरोपों में हुई गिरफ्तारियों ने आंदोलन को एक नया मोड़ दे दिया है। एक ओर पुलिस सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर ड्राइवर वेतन और सेवा शर्तों से जुड़ी अपनी मांगों पर समाधान चाहते हैं।

अब विवाद का समाधान इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार, निजी एजेंसियां और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत कितनी प्रभावी होती है। कर्मचारियों की मांगों पर ठोस निर्णय और बस सेवाओं की सुरक्षित बहाली, दोनों ही दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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