भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को सुरक्षित पनाह देने का आरोप लगाते हुए कड़ा रुख अपनाया है। अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई बैठक के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने कहा कि 9/11 हमलों के साजिशकर्ता किसी दूरदराज की गुफाओं या निर्जन इलाकों में नहीं छिपे थे, बल्कि आबादी वाले क्षेत्रों में रहकर सुरक्षा एजेंसियों से बचते रहे।
भारत का यह बयान पाकिस्तान की ओर स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है। नई दिल्ली ने आरोप लगाया कि जिस माहौल ने अल-कायदा से जुड़े आतंकवादियों को लंबे समय तक संरक्षण दिया, उसी तरह का वातावरण आज भी लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे संगठनों को काम करने की जगह उपलब्ध कराता है।
9/11 हमलों के साजिशकर्ताओं का जिक्र किया भारत ने 
अपने संबोधन में भारतीय प्रतिनिधि ने 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकवादी हमलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अल-कायदा के कई वरिष्ठ नेता बाद में पाकिस्तान के अलग-अलग आबादी वाले इलाकों में पाए गए या पकड़े गए।
भारत ने विशेष रूप से ओसामा बिन लादेन का उदाहरण दिया, जो 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी अभियान के दौरान मारा गया था। भारतीय पक्ष ने तर्क दिया कि आतंकवादियों को केवल दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में छिपे लोगों के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। कई मामलों में उन्हें ऐसे स्थानों पर संरक्षण और सहायता मिलती है, जहां सामान्य नागरिक भी रहते हैं।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि आतंकवादियों के साथ-साथ उन्हें वित्तीय सहायता, समर्थन, आश्रय या सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए। नई दिल्ली के अनुसार, आतंकवाद के नेटवर्क को समाप्त करने के लिए उसके पूरे समर्थन तंत्र पर ध्यान देना जरूरी है।
लश्कर और जैश पर भारत की चिंता
भारत ने अपने बयान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठनों का भी उल्लेख किया। भारतीय प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि ऐसे संगठन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए अलग-अलग नामों और सहयोगी संगठनों के माध्यम से अपनी गतिविधियां जारी रखने की कोशिश करते हैं।
भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने और आतंकी समूहों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाता रहा है। हालांकि, पाकिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है और कश्मीर सहित विभिन्न मुद्दों पर भारत के रुख की आलोचना करता है।
UNSC में दिया गया यह बयान दोनों देशों के बीच जारी राजनयिक तनाव की पृष्ठभूमि में आया है। भारत ने आतंकवादी संगठनों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एक समान और प्रभावी नीति की मांग की है।
अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी उठाई आवाज
भारत ने संयुक्त राष्ट्र की बैठक में केवल आतंकवाद का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि अफगान नागरिकों की मानवीय स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। भारतीय प्रतिनिधि ने बड़ी संख्या में अफगान नागरिकों की जबरन वापसी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसी भी वापसी की प्रक्रिया को स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाया जाना चाहिए।
भारत के अनुसार, अफगानिस्तान में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए आतंकवाद से निपटने के साथ-साथ मानवीय जरूरतों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। विस्थापित लोगों, शरणार्थियों और कमजोर समुदायों की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए जाने की आवश्यकता है।
इस तरह भारत ने अपने वक्तव्य में आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और मानवीय चिंताओं को एक साथ सामने रखा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ठोस कार्रवाई की मांग
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से आतंकवादी नेटवर्क, उनके वित्तीय स्रोतों और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए और सभी प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए।
भारत का यह भी मानना है कि केवल आतंकवादियों को निशाना बनाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें प्रशिक्षण, धन, हथियार, प्रचार और संरक्षण देने वाले नेटवर्क को भी खत्म करना होगा। इसके लिए खुफिया जानकारी साझा करने, वित्तीय निगरानी मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है।
भारत-पाकिस्तान संबंधों पर असर
UNSC में भारत के बयान से भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद तनावपूर्ण संबंधों पर चर्चा फिर तेज हो सकती है। दोनों देशों के बीच आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लंबे समय से मतभेद हैं।
भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान से आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सत्यापन योग्य कार्रवाई करने की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान भारत के आरोपों को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र में इस तरह के बयानों का उद्देश्य केवल द्विपक्षीय विवाद उठाना नहीं, बल्कि आतंकवाद और उसके समर्थन तंत्र को वैश्विक सुरक्षा के मुद्दे के रूप में प्रस्तुत करना भी होता है।
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आगे की राह
भारत के ताजा बयान ने एक बार फिर आतंकवादी संगठनों के सुरक्षित ठिकानों और उनके समर्थकों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित किया है। 9/11 हमलों के संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की कि आतंकवाद से मुकाबले में किसी भी देश को सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश आतंकवादी नेटवर्क, उनके वित्तपोषण और सीमा पार गतिविधियों पर किस प्रकार सामूहिक प्रतिक्रिया देते हैं। क्षेत्रीय शांति और वैश्विक सुरक्षा के लिए आतंकवाद के खिलाफ निरंतर सहयोग और जवाबदेही को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

