HomeLatest NewsLong-Term SIP Strategy: छोटी बचत से बड़ा कॉर्पस बनाने की पूरी गाइड

Long-Term SIP Strategy: छोटी बचत से बड़ा कॉर्पस बनाने की पूरी गाइड

Long-Term SIP Strategy अपनाने के लिए बड़ी रकम से शुरुआत करना जरूरी नहीं है, बल्कि छोटी शुरुआत और सही अनुशासन ही असली कॉर्पस बनाते हैं। बहुत से लोग सोचते हैं कि जब तक ज्यादा पैसा नहीं बचेगा, तब तक निवेश शुरू करने का कोई फायदा नहीं, लेकिन यही सोच सबसे बड़ा नुकसान करा देती है। आइए समझते हैं समय के साथ कंपाउंडिंग किस तरह छोटी रकम को बड़े कॉर्पस में कैसे बदल देती है।

Long-Term SIP Strategy क्या है?

Long-Term SIP Strategy एक ऐसा तरीका है जिसमें निवेशक हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में डालता है, और समय के साथ इस रकम को धीरे-धीरे बढ़ाता रहता है। शुरुआत में यह रकम छोटी हो सकती है, लेकिन लगातार निवेश और कंपाउंडिंग मिलकर लंबे समय में बड़ा कॉर्पस तैयार करते हैं।

छोटी SIP से शुरुआत कैसे करें?

शुरुआत में महीने की बचत देखकर एक ऐसी रकम तय करनी चाहिए, जिसे बिना किसी दिक्कत के हर महीने निवेश किया जा सके। तीन हजार या पांच हजार रुपये जैसी छोटी रकम से शुरुआत करना पूरी तरह ठीक है, क्योंकि असली फायदा रकम के आकार से ज्यादा निवेश जारी रखने की आदत से मिलता है।

Long-Term SIP Strategy के अंतर्गत शुरुआती सालों में इक्विटी फंड चुनना बेहतर रहता है क्योंकि लंबी अवधि में इनका औसत रिटर्न डेट फंड से ज्यादा रहता है। एक ही फंड में सारा पैसा लगाने की बजाय दो या तीन अच्छे फंड में बांटना जोखिम कम करता है।

स्टेप-अप SIP से कॉर्पस कैसे तेजी से बढ़ाएं?

हर साल सैलरी बढ़ने पर SIP की रकम भी थोड़ी बढ़ा दी जाए, तो कॉर्पस पर असर बहुत बड़ा पड़ता है। मान लीजिए किसी ने तीन हजार रुपये मासिक SIP शुरू की, और हर साल इसमें आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी की, बीस साल तक बारह प्रतिशत के औसत रिटर्न पर यह निवेश करीब सैंतालीस लाख रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि कुल निवेशित रकम सिर्फ साढ़े सोलह लाख रुपये होगी।

Long-Term SIP Strategy
Long-Term SIP Strategy

अगर वही तीन हजार रुपये बिना किसी बढ़ोतरी के बीस साल तक निवेश किए जाएं, तो कॉर्पस करीब सत्ताईस लाख रुपये ही बन पाता है। यानी सिर्फ छोटी सालाना बढ़ोतरी से बीस लाख रुपये तक का फर्क आ सकता है।

सही फंड और अनुशासन बनाए रखना

फंड चुनते समय उसके लंबी अवधि के रिटर्न, फंड मैनेजर का अनुभव और खर्च अनुपात जरूर देखना चाहिए। बाजार गिरने पर घबराकर SIP रोकने की बजाय निवेश जारी रखना ज्यादा फायदेमंद साबित होता है, क्योंकि गिरावट में ज्यादा यूनिट्स खरीदी जाती हैं। साल में एक बार पोर्टफोलियो का रिव्यू जरूर करना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि लक्ष्य के हिसाब से निवेश सही दिशा में है या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. Long-Term SIP Strategy के लिए कितनी उम्र में शुरुआत करनी चाहिए?
उत्तर: जितनी जल्दी शुरुआत हो उतना अच्छा है, क्योंकि कंपाउंडिंग को असर दिखाने के लिए ज्यादा समय मिलता है। नौकरी शुरू होते ही निवेश शुरू करना सबसे फायदेमंद माना जाता है।

2. क्या छोटी SIP से बड़ा कॉर्पस बनाना वाकई संभव है?
उत्तर: हां, अगर निवेश लगातार जारी रखा जाए और हर साल थोड़ी रकम बढ़ाई जाए, तो छोटी शुरुआत से भी बड़ा कॉर्पस बनाया जा सकता है, इसकी पूरी गणना एक हालिया रिपोर्ट में भी देखी जा सकती है।

3. अगर बीच में कुछ महीने SIP रोकनी पड़े तो क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: कुछ महीनों का ब्रेक कॉर्पस पर बहुत बड़ा असर नहीं डालता, बशर्ते निवेश दोबारा जल्द शुरू कर दिया जाए और लगातार जारी रखा जाए।

4. इक्विटी और डेट फंड में से कौन सा बेहतर रहता है?
उत्तर: लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए इक्विटी फंड बेहतर रिटर्न देते हैं, जबकि पांच साल से कम अवधि के लक्ष्यों के लिए डेट फंड ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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