MSME Foreign Trade Policy का जिक्र आजकल उन छोटे कारोबारियों के बीच खूब हो रहा है जो पहली बार एक्सपोर्ट शुरू करने की सोच रहे हैं। ज्यादातर लोगों को लगता है कि एक्सपोर्ट सिर्फ बड़ी कंपनियों का काम है, जबकि सच यह है कि सरकार की मौजूदा फॉरेन ट्रेड पॉलिसी खासतौर पर छोटे और मझोले उद्योगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
MSME Foreign Trade Policy
देश के करीब 55-60% एक्सपोर्टर्स MSME कैटेगरी में आते हैं, इसलिए मौजूदा नीति में इन्हीं की जरूरतों को प्राथमिकता दी गई है। बड़ी कंपनियों की तुलना में MSME के पास सीमित पूंजी और स्टाफ होता है, इसीलिए फीस, प्रोसेसिंग और कागजी कार्रवाई को हल्का रखने पर खास फोकस किया गया है।
MSME Foreign Trade Policy के तहत फीस में मिलने वाली राहत
Advance Authorization और EPCG स्कीम के तहत बड़ी कंपनियों से जहां ज्यादा एप्लिकेशन फीस ली जाती है, वहीं MSME के लिए यह फीस काफी कम, कई मामलों में सिर्फ 100 रुपये से 5,000 रुपये के बीच रखी गई है। इससे छोटे व्यापारियों पर शुरुआती कंप्लायंस का बोझ काफी हद तक कम हो जाता है।
कस्टम्स क्लियरेंस में मिलने वाली प्राथमिकता Authorized Economic Operator यानी AEO प्रोग्राम के तहत योग्य MSME एक्सपोर्टर्स को कम जांच और तेज कस्टम्स क्लियरेंस जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इससे शिपमेंट में लगने वाला समय घटता है और माल जल्दी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच पाता है।
Export Facilitation Centres से मिलने वाली मदद
देशभर में बनाए गए Export Facilitation Centres छोटे एक्सपोर्टर्स को कागजी कार्रवाई, दस्तावेज और प्रक्रिया समझने में मेंटरिंग और हैंडहोल्डिंग सपोर्ट देते हैं। जिन व्यापारियों को एक्सपोर्ट प्रोसेस की पूरी जानकारी नहीं होती, उनके लिए यह सेंटर पहला कदम उठाने में काफी मददगार साबित होते हैं।
गांव-कस्बों के कारोबारियों को फायदा डाकघरों और विदेशी पोस्ट ऑफिस के बीच साझेदारी से बने डाक घर निर्यात केंद्र कारीगरों, बुनकरों और छोटे मैनुफैक्चरर्स को सीधे इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचने का रास्ता देते हैं। इससे उन इलाकों के व्यापारियों को भी फायदा मिलता है जो बड़े बंदरगाहों या शहरों से दूर हैं।

Towns of Export Excellence से मिलने वाली पहचान
जिन इलाकों को Towns of Export Excellence का दर्जा मिलता है, वहां के औद्योगिक क्लस्टर को खास पहचान और मार्केटिंग सपोर्ट दिया जाता है। इससे उस क्षेत्र की छोटी इकाइयों को ट्रेड फेयर और प्रदर्शनी में हिस्सा लेने के लिए वित्तीय सहायता भी मिल सकती है।
अधिक जानकारी के लिए
एक्सपोर्ट से जुड़ी फाइनेंशियल स्कीम्स के लिए Export Business के लिए Government Schemes की गाइड जरूर पढ़ें। एक्सपोर्ट शुरू करने से पहले जरूरी IEC Code से जुड़ी पूरी जानकारी भी देखी जा सकती है, और मैनुफैक्चरिंग सेटअप के लिए SEZ Business Setup Guide भी उपयोगी रहेगी। MSME Foreign Trade Policy से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए DGFT की वेबसाइट पर विजिट किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या MSME Foreign Trade Policy में विशेष छूट मिलती है?
हां, Advance Authorization और EPCG जैसी स्कीम्स में MSME के लिए फीस काफी कम रखी गई है।
2. Export Facilitation Centres किस तरह मदद करते हैं?
ये सेंटर छोटे एक्सपोर्टर्स को दस्तावेज, प्रक्रिया और कंप्लायंस समझने में मेंटरिंग सपोर्ट देते हैं।
3. क्या गांव-कस्बों के कारीगर भी एक्सपोर्ट कर सकते हैं?
हां, Dak Ghar Niryat Kendra जैसी सुविधाओं से कारीगर और छोटे मैनुफैक्चरर्स भी सीधे इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंच सकते हैं।
4. AEO प्रोग्राम का क्या फायदा है?
इसके तहत योग्य MSME एक्सपोर्टर्स को तेज कस्टम्स क्लियरेंस और कम जांच जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
5. small business export scheme India के तहत सबसे पहले क्या करना चाहिए?
सबसे पहले IEC Code लेना और DGFT पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन पूरा करना जरूरी है।
आगे और समाचार पढ़ें
MSME Foreign Trade Policy से जुड़ी जानकारी के अलावा, ये अन्य ताजा खबरें भी पढ़ें: Post Office RD vs Bank RD में कौन सी स्कीम बेहतर है, Coworking Space Design Tips से प्रोडक्टिविटी कैसे बढ़ाएं और B2B मार्केटप्लेस पर फ्रॉड से कैसे बचें।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

