हर साल ITR फाइल करते समय बहुत से टैक्सपेयर्स को यह समझ नहीं आता कि New Tax Regime उनके लिए सही है या नहीं। सैलरीड लोगों के लिए यह फैसला हर साल आसानी से बदला जा सकता है, लेकिन बिजनेस ओनर्स और प्रोफेशनल्स के लिए नियम काफी अलग हैं। कई लोग यह जानकारी न होने की वजह से गलत टैक्स रिजीम चुन लेते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त टैक्स देना पड़ जाता है। इ
सैलरीड कर्मचारियों के लिए New Tax Regime के नियम
सैलरीड कर्मचारी हर साल ITR फाइल करते समय New Tax Regime और ओल्ड रिजीम के बीच स्विच कर सकते हैं। इसका मतलब है कि अगर किसी साल पुराना रिजीम फायदेमंद लगे और अगले साल नया, तो दोनों बार अलग विकल्प चुना जा सकता है।
एम्प्लॉयर को सिर्फ सालाना जानकारी देनी होती है, ताकि टीडीएस सही तरीके से कटे, बाद में रिफंड में समायोजन भी संभव है। यही लचीलापन सैलरीड वर्ग के लिए इसे अपनाना अपेक्षाकृत आसान बना देता है।
बिजनेस ओनर्स और प्रोफेशनल्स के लिए नियम अलग क्यों हैं?
बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम रखने वालों के लिए यह विकल्प हर साल बदलना इतना आसान नहीं होता। इन्हें फॉर्म 10-IEA फाइल करके अपनी पसंद बतानी होती है, और यह फॉर्म रिटर्न भरने की आखिरी तारीख से पहले जमा करना जरूरी होता है।
एक बार ओल्ड रिजीम में वापस जाने के बाद, बिजनेस या प्रोफेशन वाले टैक्सपेयर्स को जीवन में सिर्फ एक बार दोबारा New Tax Regime चुनने का मौका मिलता है। इसलिए बिजनेस ओनर्स को यह फैसला सोच समझकर और दीर्घकालिक नजरिए से लेना चाहिए।
किसके लिए यह बेहतर रहता है?
जिन सैलरीड कर्मचारियों के पास 80C, HRA या होम लोन जैसे बड़े डिडक्शन नहीं हैं, उनके लिए New Tax Regime आमतौर पर फायदेमंद साबित होता है। वहीं जिन बिजनेस ओनर्स के पास बहुत सीमित डिडक्शन क्लेम करने के विकल्प होते हैं, उनके लिए भी नई स्लैब दरें अक्सर बेहतर पड़ती हैं।
लेकिन जो बिजनेस ओनर्स होम लोन, बीमा प्रीमियम या अन्य बड़े निवेश के जरिए डिडक्शन क्लेम करते आए हैं, उनके लिए पूरा हिसाब लगाना जरूरी है। चूंकि बिजनेस ओनर्स के लिए फैसला बदलना आसान नहीं है, इसलिए सिर्फ एक साल के आंकड़ों पर नहीं बल्कि आने वाले वर्षों के अनुमान पर भी ध्यान देना चाहिए।

ध्यान रखने वाली जरूरी बातें
फॉर्म 10-IEA की डेडलाइन चूक जाने पर बिजनेस ओनर्स को अपने आप न्यू रिजीम में डाल दिया जाता है। सैलरीड कर्मचारियों को भी हर साल सही विकल्प एम्प्लॉयर को समय पर बताना चाहिए, ताकि टीडीएस में गड़बड़ी न हो। किसी भी बड़े फैसले से पहले अपनी सैलरी या बिजनेस इनकम के हिसाब से दोनों रिजीम की पूरी तुलना जरूर करनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या सैलरीड लोग हर साल रिजीम बदल सकते हैं
हां, सैलरीड टैक्सपेयर्स हर साल ITR फाइल करते समय New Tax Regime और ओल्ड रिजीम के बीच स्विच कर सकते हैं।
2. बिजनेस ओनर्स कितनी बार रिजीम बदल सकते हैं
एक बार ओल्ड रिजीम चुनने के बाद, बिजनेस या प्रोफेशन वाले टैक्सपेयर्स को जीवन में सिर्फ एक बार दोबारा इसे चुनने का मौका मिलता है।
3. फॉर्म 10-IEA किसे भरना जरूरी है
जिन टैक्सपेयर्स की इनकम बिजनेस या प्रोफेशन से आती है और वे ओल्ड रिजीम चुनना चाहते हैं, उन्हें यह फॉर्म भरना जरूरी है।
4. क्या New Tax Regime में सभी डिडक्शन खत्म हो जाते हैं
ज्यादातर पुराने डिडक्शन नहीं मिलते, लेकिन स्टैंडर्ड डिडक्शन और कुछ सीमित छूट अब भी उपलब्ध हैं।
5. सही रिजीम चुनने के लिए विश्वसनीय जानकारी कहां से मिलेगी
इससे जुड़ी आधिकारिक जानकारी इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। यह कोई टैक्स सलाह नहीं है, फाइनल फैसला लेने से पहले किसी सीए या टैक्स एडवाइजर से सलाह जरूर लें।

