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Sovereign Gold Bond: सरकार के लिए यह स्कीम महंगी क्यों साबित हुई? समझिए असली वजह

पिछले कुछ समय से निवेशकों के बीच यह सवाल तेजी से पूछा जा रहा है कि Sovereign Gold Bond स्कीम का आखिर हुआ क्या। जिन लोगों ने पहले इसमें निवेश किया था, वे जानना चाहते हैं कि उनके पैसे का अब क्या होगा। वहीं जो लोग नया निवेश करना चाहते थे, वे उलझन में हैं कि अब सोने में पैसा लगाने का सही तरीका क्या रह गया है।

Sovereign Gold Bond स्कीम बंद क्यों हुई?

सरकार के लिए यह स्कीम लगातार महंगी साबित हो रही थी, क्योंकि सोने की कीमत बढ़ने पर सरकार को निवेशकों को उसी हिसाब से भुगतान करना पड़ता था। वित्त मंत्रालय ने साफ किया कि यह सामान्य सरकारी उधारी के मुकाबले काफी महंगा साधन बन चुका था। इसके अलावा फिजिकल गोल्ड के आयात में भी उतनी कमी नहीं आई, जितनी इस स्कीम को शुरू करते समय उम्मीद की गई थी।

इन्हीं वजहों से फरवरी 2024 की चौथी किस्त के बाद से कोई नई किस्त जारी नहीं की गई है। पुराने निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है जिन निवेशकों के पास पहले से Sovereign Gold Bond हैं, उनके लिए फिलहाल कुछ भी बदलने की जरूरत नहीं है। उनका निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और तय समय पर साल में दो बार 2.5 प्रतिशत ब्याज मिलता रहेगा।

आठ साल की पूरी अवधि तक बॉन्ड को रखने पर मैच्योरिटी पर तय राशि का भुगतान होगा। पांच साल पूरे होने के बाद बॉन्ड को समय से पहले भी भुनाया जा सकता है, और 2018 से 2021 के बीच जारी हुई कई किस्तें अब इसी दायरे में आ रही हैं। जो निवेशक अभी बेचना नहीं चाहते, वे NSE और BSE जैसे स्टॉक एक्सचेंज पर भी इसे ट्रेड कर सकते हैं।

टैक्स नियमों में हुआ बदलाव

पहले मैच्योरिटी तक बॉन्ड रखने पर होने वाला मुनाफा पूरी तरह टैक्स फ्री माना जाता था। लेकिन बजट 2026 के बाद यह छूट सिर्फ उन्हीं मूल निवेशकों को मिलेगी, जिन्होंने बॉन्ड को पूरे आठ साल तक रखा हो। समय से पहले भुनाने या सेकंडरी मार्केट से खरीदे गए बॉन्ड पर अब टैक्स लगने की संभावना बढ़ गई है। इसलिए बेचने या भुनाने का फैसला लेने से पहले टैक्स के नए नियमों को जरूर समझ लेना चाहिए।

नए निवेशकों के लिए विकल्प

चूंकि RBI के जरिए सीधे नया Sovereign Gold Bond खरीदना फिलहाल संभव नहीं है, इसलिए निवेशकों को दूसरे विकल्प देखने होंगे। गोल्ड ईटीएफ एक लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरा है, क्योंकि इसे शेयर की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है।

Sovereign Gold Bond
Sovereign Gold Bond

गोल्ड म्यूचुअल फंड भी एक विकल्प है, खासकर उन निवेशकों के लिए जो डीमैट अकाउंट के बिना निवेश करना चाहते हैं। डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म्स भी मौजूद हैं, लेकिन इनमें रेगुलेशन को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। पुराने Sovereign Gold Bond सेकंडरी मार्केट से खरीदना भी एक रास्ता है, बशर्ते नए टैक्स नियमों को समझकर फैसला लिया जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या अभी Sovereign Gold Bond खरीदा जा सकता है

नहीं, RBI के जरिए सीधे नई किस्त फिलहाल उपलब्ध नहीं है, हालांकि सेकंडरी मार्केट से पुराने बॉन्ड खरीदे जा सकते हैं।

2. पुराने निवेशकों को क्या घबराने की जरूरत है

नहीं, मौजूदा निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और तय समय पर ब्याज और मैच्योरिटी राशि मिलती रहेगी।

3. गोल्ड ईटीएफ और Sovereign Gold Bond में क्या फर्क है

गोल्ड ईटीएफ में तय ब्याज नहीं मिलता, जबकि बॉन्ड में सालाना 2.5 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज भी मिलता था।

4. क्या स्कीम दोबारा शुरू हो सकती है

अभी तक सरकार की तरफ से इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, इसलिए यह भविष्य की नीति पर निर्भर करता है।

5. Sovereign Gold Bond से जुड़ी आधिकारिक जानकारी कहां मिलती है

इससे जुड़ी सभी आधिकारिक सूचनाएं और सर्कुलर RBI की वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाते हैं।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। यह निवेश सलाह नहीं है, कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से संपर्क करें।

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