सऊदी अरब में हाल के हूती हमलों को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन्हें अस्वीकार्य बताया है। भारत ने विशेष रूप से नागरिक और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की निंदा की और कहा कि इस तरह के हमले पश्चिम एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करते हैं। भारत ने यह भी चेतावनी दी कि इन घटनाओं का असर महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता पर पड़ सकता है।
भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में पहले से ही तनाव काफी बढ़ा हुआ है। 8 सितंबर को यमन स्थित ईरान-समर्थित हूती बलों ने दक्षिणी सऊदी अरब के कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबर है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, हमलों में 73 लोग घायल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
भारत ने सऊदी अरब हमले पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि भारत ने सऊदी अरब की संप्रभुता पर हुए इन हमलों की निंदा की है। भारत ने खास तौर पर नागरिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने को गंभीर चिंता का विषय बताया।
भारत के मुताबिक ऐसे हमले केवल किसी एक देश की सुरक्षा के लिए चुनौती नहीं हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर असर डालते हैं। इसके अलावा बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर खतरा पैदा होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है।
सऊदी अरब में क्या हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार हूतियों ने 8 सितंबर को सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्सों में समन्वित मिसाइल और ड्रोन हमले किए। हमले अब्हा, नजरान, जिजान और खमिस मुशैत जैसे इलाकों तक पहुंचे। ऊर्जा प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
सऊदी अरब के अधिकारियों के मुताबिक हमलों से कुछ जगहों पर आग लगी और ऊर्जा प्रतिष्ठानों के संचालन में अस्थायी व्यवधान आया। हालांकि, सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में परिचालन जारी रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
बाब-अल-मंदेब क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत के बयान में बाब-अल-मंदेब का विशेष उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है।
एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच समुद्री व्यापार के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। यदि यहां सुरक्षा जोखिम बढ़ते हैं तो जहाजों को वैकल्पिक और लंबे मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इससे परिवहन लागत, बीमा खर्च और सामान की डिलीवरी पर असर पड़ सकता है।
भारत के लिए इसका महत्व और भी अधिक है क्योंकि देश का पश्चिम एशिया के साथ व्यापक व्यापारिक और ऊर्जा संबंध है। भारतीय जहाज और व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखलाएं लाल सागर तथा आसपास के समुद्री मार्गों की स्थिरता पर निर्भर करती हैं।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर
सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक और निर्यातक देशों में से एक है। ऐसे में उसकी ऊर्जा अवसंरचना पर हमले का प्रभाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता।
रिपोर्ट के अनुसार, हालिया क्षेत्रीय तनाव के बीच तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई, जबकि पश्चिम एशिया में समुद्री यातायात पर बढ़ते जोखिम ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।
यदि सऊदी अरब की तेल सुविधाओं या समुद्री निर्यात मार्गों पर लगातार हमले होते हैं, तो वैश्विक बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताएं और बढ़ सकती हैं। इसका असर ईंधन की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है।
हूती संगठन और क्षेत्रीय संघर्ष
यमन में हूती आंदोलन लंबे समय से देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है। संगठन का सऊदी अरब के साथ संघर्ष वर्षों पुराना है। 2022 के संघर्षविराम के बाद कुछ समय तक हिंसा में कमी आई थी, लेकिन बाद के वर्षों में क्षेत्रीय तनाव के बीच हूती गतिविधियां फिर तेज हुईं।
हाल के वर्षों में हूतियों ने लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों को भी निशाना बनाया है। इन हमलों ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने के लिए मजबूर किया और लाल सागर की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना दिया।अब सऊदी अरब के खिलाफ हमलों में तेजी आने से आशंका है कि यमन का संघर्ष फिर से व्यापक क्षेत्रीय सैन्य टकराव का रूप ले सकता है।
भारत की चिंता सिर्फ सऊदी अरब तक सीमित नहीं
भारत की प्रतिक्रिया को उसकी व्यापक पश्चिम एशिया नीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। नई दिल्ली के सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, इजरायल और खाड़ी के अन्य देशों के साथ महत्वपूर्ण संबंध हैं।
भारत के लिए इस क्षेत्र में स्थिरता कई कारणों से जरूरी है। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। इसके अलावा भारत की ऊर्जा जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा होता है।
समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी भारत के व्यापारिक हितों से सीधे जुड़ी है। इसलिए बाब-अल-मंदेब में किसी भी प्रकार का लंबे समय तक चलने वाला संकट भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार पर अप्रत्यक्ष असर डाल सकता है।
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क्षेत्रीय तनाव कम करने की चुनौती
भारत की ओर से हमलों की निंदा के साथ यह संदेश भी सामने आया है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से होना चाहिए।
मौजूदा स्थिति में चुनौती यह है कि पश्चिम एशिया में एक साथ कई मोर्चों पर तनाव बढ़ रहा है। ईरान, अमेरिका, इजरायल, यमन और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रम एक-दूसरे को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे माहौल में किसी एक मोर्चे पर बड़ा सैन्य टकराव पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष
सऊदी अरब पर हालिया हूती हमलों की भारत की कड़ी निंदा नई दिल्ली की क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता को दर्शाती है। भारत ने साफ कहा है कि नागरिक और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले ऐसे हमले अस्वीकार्य हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता को कमजोर करते हैं।
भारत ने खास तौर पर बाब-अल-मंदेब में नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में वहां बढ़ता सैन्य तनाव केवल पश्चिम एशिया की समस्या नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
अब नजर इस बात पर है कि सऊदी अरब इन हमलों का क्या जवाब देता है और क्या क्षेत्रीय शक्तियां तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाती हैं। भारत के लिए प्राथमिकता स्पष्ट है—पश्चिम एशिया में शांति, क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित होना।

