संयुक्त राष्ट्र में विश्व मानचित्रों को अधिक संतुलित और क्षेत्रफल की दृष्टि से सटीक बनाने से जुड़े प्रस्ताव पर भारत के रुख के एक दिन बाद जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बयानबाजी फिर तेज हो गई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को भारत के उस बयान को खारिज कर दिया, जिसमें नई दिल्ली ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न हिस्सा बताते हुए अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर स्पष्ट रुख दोहराया था।
पाकिस्तान ने भारत के दावे को “बेबुनियाद” बताते हुए जम्मू-कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में मौजूद एक कथित विवादित क्षेत्र के रूप में पेश किया। वहीं भारत ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र में जिस प्रस्ताव पर उसने मतदान किया था, उसका उद्देश्य दुनिया के नक्शों में महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल का अधिक संतुलित चित्रण सुनिश्चित करना था और उसका संबंध किसी राजनीतिक सीमा या विवादित क्षेत्र की स्थिति तय करने से नहीं है।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा में 4 सितंबर को पारित एक प्रस्ताव से हुई। प्रस्ताव का शीर्षक था “Correct the Map: Rebalancing Global Cartographic Representation and Promoting Equitable Representation of the World’s Regions, Particularly Africa”। इसका उद्देश्य ऐसे मानचित्र प्रक्षेपणों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, जिनमें दुनिया के विभिन्न महाद्वीपों और क्षेत्रों के क्षेत्रफल का अनुपात अपेक्षाकृत अधिक सही तरीके से दिखाई दे।
भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत के वोट की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि भारत ने प्रस्ताव के पीछे मौजूद “समान-क्षेत्रफल वाले कार्टोग्राफिक प्रतिनिधित्व” के सिद्धांत का समर्थन किया है।
भारत ने साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि प्रस्ताव किसी विशेष विश्व मानचित्र को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं करता और न ही यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नामों से जुड़े राजनीतिक सवालों पर कोई फैसला करता है।
भारत ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर स्थिति स्पष्ट, लगातार एक जैसी और गैर-परक्राम्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र का संबंधित प्रस्ताव मूल रूप से मानचित्रों में क्षेत्रफल के असमान चित्रण को ठीक करने से जुड़ा है।
भारत का तर्क है कि किसी मानचित्र प्रक्षेपण में बदलाव को राजनीतिक सीमाओं या किसी क्षेत्र की संप्रभुता से जोड़ना सही नहीं होगा। नई दिल्ली के अनुसार, कार्टोग्राफी से जुड़े इस प्रस्ताव का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों का आकार नक्शों पर अधिक वास्तविक रूप में दिखाई दे।
भारत की यह प्रतिक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान ने इस घटनाक्रम को जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति से जोड़ने की कोशिश की।
पाकिस्तान ने क्या कहा?
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने सोमवार को भारत के बयान को खारिज करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति के संबंध में भारत के कथित दावे “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त तथ्यों” के विपरीत हैं।
पाकिस्तान ने अपने बयान में भारत पर जम्मू-कश्मीर पर “एकतरफा कार्रवाई” और “अवैध कब्जे” का आरोप लगाया। उसने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में मौजूद पुराने विवादों में से एक है।
पाकिस्तानी बयान में संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का हवाला देते हुए कहा गया कि क्षेत्र का अंतिम निर्धारण कश्मीरी लोगों की इच्छा के अनुरूप होना चाहिए। पाकिस्तान ने कथित जनमत संग्रह की मांग को भी अपने बयान में दोहराया।
‘आधिकारिक नक्शे से स्थिति नहीं बदलती’- पाकिस्तान
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत के आधिकारिक नक्शों और संप्रभुता के दावों को भी निशाना बनाया। उसके बयान के मुताबिक, भारत द्वारा जारी आधिकारिक नक्शे या क्षेत्र पर संप्रभुता के एकतरफा दावे जम्मू-कश्मीर की कथित विवादित स्थिति को नहीं बदल सकते।
इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जम्मू-कश्मीर विवाद को लेकर कूटनीतिक बयानबाजी एक बार फिर सामने आ गई है।
UN प्रस्ताव का असल उद्देश्य क्या है?
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित प्रस्ताव का मूल उद्देश्य दुनिया के नक्शों में महाद्वीपों के आकार को अधिक सटीक तरीके से दिखाना है। कई पारंपरिक मानचित्र प्रक्षेपणों में ध्रुवों के करीब स्थित क्षेत्रों का आकार वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना में बड़ा दिखाई देता है।
नए प्रस्ताव में equal-area map projections के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने की बात कही गई है। भारत ने इसी तकनीकी और कार्टोग्राफिक सिद्धांत का समर्थन किया है।
प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला। कुछ देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। भारत के मुताबिक, प्रस्ताव ने किसी खास राजनीतिक नक्शे या सीमा को प्रमाणित नहीं किया।
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भारत-पाकिस्तान संबंधों में नया तनाव?
भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर लंबे समय से सबसे संवेदनशील राजनीतिक और कूटनीतिक मुद्दों में से एक रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र से जुड़े किसी भी घटनाक्रम में दोनों देशों के अलग-अलग रुख सामने आना असामान्य नहीं है।
इस ताजा विवाद में भी भारत ने कार्टोग्राफिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को राजनीतिक सीमाओं से अलग रखने की कोशिश की, जबकि पाकिस्तान ने इसे जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर अपनी पारंपरिक दलील दोहराने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया।भारत की ओर से फिलहाल मुख्य जोर इस बात पर है कि उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं है।
निष्कर्ष
संयुक्त राष्ट्र के विश्व मानचित्र से जुड़े प्रस्ताव पर भारत के मतदान के बाद जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया ने दोनों देशों के बीच पुरानी कूटनीतिक तनातनी को फिर सामने ला दिया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि उसने केवल समान-क्षेत्रफल वाले मानचित्रों के सिद्धांत का समर्थन किया है और संबंधित प्रस्ताव किसी राजनीतिक सीमा, विवादित क्षेत्र या संप्रभुता का निर्धारण नहीं करता।
इसके विपरीत पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में मौजूद विवाद बताते हुए जनमत संग्रह और पुराने UN प्रस्तावों का हवाला दिया। भारत इस दावे को स्वीकार नहीं करता और जम्मू-कश्मीर पर अपनी संप्रभुता को स्पष्ट एवं गैर-परक्राम्य बताता है।
फिलहाल यह विवाद मुख्यतः कूटनीतिक बयानबाजी तक सीमित है, लेकिन इससे यह स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भारत-पाकिस्तान संबंधों में अब भी अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की ओर से इस मुद्दे पर और बयान सामने आने की संभावना बनी हुई है।

