छात्र आंदोलनों और युवाओं से जुड़े मुद्दों के जरिए चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में अब खुला आंतरिक विभाजन सामने आ गया है। पार्टी से अलग हुए कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार को नई राजनीतिक पहल ‘कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ (CJP-Democratic) लॉन्च करने की घोषणा की। ब्रह्मभट्ट ने CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके पर संगठन को उसके शुरुआती जमीनी और स्वयंसेवी चरित्र से दूर ले जाने तथा आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके नेता अरविंद केजरीवाल के करीब जाने का आरोप लगाया है। दिपके खेमे ने इन आरोपों को खारिज किया है।
ब्रह्मभट्ट का दावा है कि CJP की शुरुआत युवाओं, छात्रों, प्रदर्शनकारियों और सोशल मीडिया स्वयंसेवकों की भागीदारी से हुई थी, लेकिन समय के साथ निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित होती गई। उनका आरोप है कि जमीनी कार्यकर्ताओं और आंदोलन में सक्रिय रहे लोगों से पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं किया गया। इसी असंतोष को उन्होंने अलग मंच बनाने की मुख्य वजह बताया है।
क्यों हुआ CJP में विभाजन?
CJP पिछले कुछ महीनों में छात्र आंदोलनों, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में रही है। संगठन का दावा रहा है कि उसका उद्देश्य पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग युवाओं को राजनीतिक प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देना है।
लेकिन ब्रह्मभट्ट के मुताबिक, संगठन के विस्तार के साथ उसकी आंतरिक कार्यप्रणाली में बदलाव आया। उनका कहना है कि जिस आंदोलन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों ने भूमिका निभाई थी, उसके महत्वपूर्ण फैसलों में बाद में उन्हीं लोगों की भागीदारी कम होती गई।
ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि CJP का नेतृत्व धीरे-धीरे एक केंद्रीकृत व्यवस्था की ओर बढ़ा, जिसमें अंतिम फैसले सीमित लोगों के हाथ में रहने लगे। उन्होंने इसी व्यवस्था को चुनौती देने के लिए CJP-Democratic के गठन की घोषणा की है।
‘टीम केजरीवाल’ बनने का आरोप
ब्रह्मभट्ट के सबसे गंभीर आरोपों में से एक CJP के नेतृत्व पर AAP और अरविंद केजरीवाल के साथ राजनीतिक नजदीकी का है। उन्होंने मूल संगठन को कथित तौर पर ‘टीम केजरीवाल’ जैसा बनने का आरोप लगाया और कहा कि इससे CJP की शुरुआती स्वतंत्र पहचान प्रभावित हुई।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि AAP के साथ किसी औपचारिक राजनीतिक गठजोड़ या नियंत्रण का आरोप अभी ब्रह्मभट्ट के दावे के रूप में ही सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दिपके खेमे ने ब्रह्मभट्ट के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
ब्रह्मभट्ट का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत अभियान चलाना नहीं, बल्कि संगठन के भीतर लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका को मजबूत करना है।
CJP-Democratic के नाम से नई शुरुआत
नई राजनीतिक पहल का नाम Cockroach Janta Party-Democratic रखा गया है। ब्रह्मभट्ट ने इसके जरिए पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही है।
नई इकाई की घोषणा को CJP के भीतर चल रहे मतभेदों के औपचारिक रूप से सामने आने के तौर पर देखा जा रहा है। दिपके के नेतृत्व वाली मूल CJP और ब्रह्मभट्ट की नई इकाई के बीच आने वाले समय में संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।
झारखंड छात्र आंदोलन भी बना मतभेद की वजह
CJP के भीतर मतभेदों की पृष्ठभूमि में झारखंड छात्र आंदोलन का मुद्दा भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। झारखंड में JSSC और JPSC परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों ने लंबे समय तक आंदोलन किया। आंदोलन में पुलिस कार्रवाई और छात्रों की मांगों को लेकर देशभर में चर्चा हुई।
ब्रह्मभट्ट के समर्थक खेमे का आरोप है कि CJP नेतृत्व ने झारखंड के आंदोलन को पर्याप्त समर्थन नहीं दिया। इसी को लेकर संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा हुआ। हालांकि, मूल CJP का पक्ष इस आरोप को अलग नजरिए से देखता है और संगठन ने हाल में छात्र प्रदर्शनकारियों के मुद्दों को लेकर सक्रियता दिखाई है।
ब्रह्मभट्ट कौन हैं?
मनीष ब्रह्मभट्ट इससे पहले CJP से जुड़े कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, वह पहले भी चुनावी राजनीति में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। उन्होंने 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में पालनपुर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और 964 वोट हासिल किए थे।
अब CJP-Democratic के गठन के साथ उन्होंने एक बार फिर राजनीतिक मंच तैयार किया है। हालांकि, नई इकाई की वास्तविक संगठनात्मक ताकत और जनसमर्थन का आकलन आगे होने वाली गतिविधियों से ही हो सकेगा।
दिपके के सामने नई चुनौती
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के लिए ब्रह्मभट्ट का अलग होना संगठन के सामने पहली बड़ी आंतरिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। CJP की पहचान अब तक एक वैकल्पिक युवा राजनीतिक मंच के रूप में बनाने की कोशिश की गई है।
नई इकाई के गठन से यह सवाल भी उठ रहा है कि CJP अपने शुरुआती स्वयंसेवी आधार को कितनी मजबूती से बनाए रख पाएगी। यदि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता ब्रह्मभट्ट के साथ जाते हैं, तो इसका असर मूल संगठन की गतिविधियों पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि दिपके के नेतृत्व में CJP अपना संगठनात्मक विस्तार जारी रखती है, तो दोनों धड़ों की अलग-अलग राजनीतिक पहचान विकसित हो सकती है।
लोकतंत्र और संगठनात्मक पारदर्शिता पर जोर
CJP-Democratic की घोषणा के दौरान ब्रह्मभट्ट ने जिस मुद्दे पर सबसे ज्यादा जोर दिया, वह है आंतरिक लोकतंत्र। उनका कहना है कि किसी भी युवा या आंदोलन आधारित राजनीतिक संगठन की विश्वसनीयता केवल उसके नारों से नहीं, बल्कि उसके भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया से भी तय होती है।
उनका दावा है कि नए मंच में कार्यकर्ताओं की भागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रमुख स्थान दिया जाएगा। हालांकि, इन सिद्धांतों को जमीन पर लागू करना नई इकाई के लिए बड़ी चुनौती होगी।
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आगे की राह
CJP में हुए इस विभाजन का असर केवल संगठन के भीतर तक सीमित रहेगा या यह व्यापक युवा राजनीति को प्रभावित करेगा, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
ब्रह्मभट्ट जहां मूल CJP को कथित राजनीतिक प्रभाव और केंद्रीकरण से जोड़ रहे हैं, वहीं दिपके खेमे ने उनके आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में अब असली परीक्षा दोनों पक्षों की संगठनात्मक क्षमता और युवाओं के बीच उनके समर्थन की होगी।
निष्कर्ष
मनीष ब्रह्मभट्ट द्वारा CJP-Democratic की शुरुआत ने कॉकरोच जनता पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। ब्रह्मभट्ट ने अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली CJP पर जमीनी कार्यकर्ताओं को किनारे करने और AAP से नजदीकी बढ़ाने का आरोप लगाया है।
दूसरी ओर, दिपके खेमे ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट है कि CJP के सामने अब एक समानांतर संगठनात्मक चुनौती खड़ी हो गई है।
नई CJP-Democratic पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक भागीदारी को अपना आधार बनाने का दावा कर रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नई इकाई कितनी तेजी से संगठन खड़ा करती है, कितने कार्यकर्ता उसके साथ आते हैं और युवाओं के बीच उसे कितना समर्थन मिलता है। यही तय करेगा कि यह विभाजन केवल एक आंतरिक राजनीतिक विवाद बनकर रह जाता है या CJP की राजनीति में एक स्थायी नई धारा का रूप लेता है।

