भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। मिश्रा ने मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के तौर पर अहम भूमिका निभाई थी। अब सैन्य कमान से अलग वह अयोध्या में राम मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। ट्रस्ट की ओर से यह नियुक्ति ऐसे समय की गई है, जब मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और प्रशासनिक तथा वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक संस्थागत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
मिश्रा की नियुक्ति को ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रस्ट ने CEO पद के लिए देशभर से आवेदन आमंत्रित किए थे। चयन प्रक्रिया में कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। तकनीक की मदद से स्क्रीनिंग, सत्यापन और ऑनलाइन आकलन के बाद उम्मीदवारों की संख्या घटाकर 16 की गई। इन उम्मीदवारों के साक्षात्कार के बाद तीन नामों का पैनल तैयार हुआ और अंततः जितेंद्र मिश्रा का चयन किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर में निभाई थी अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा की नई जिम्मेदारी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनका सैन्य करियर बेहद महत्वपूर्ण रहा है। जनवरी 2025 में उन्होंने भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला था। यह कमान भारत की पश्चिमी सीमाओं से जुड़े महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी संभालती है।
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। उस समय मिश्रा पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। ऑपरेशन के दौरान वायु अभियानों की योजना, समन्वय और संचालन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। उनके कार्य के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया। यह युद्ध, संघर्ष या शत्रुता की परिस्थितियों में उत्कृष्ट सेवा के लिए दिया जाने वाला भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों में से एक है।
चार दशक का सैन्य अनुभव अब मंदिर प्रशासन में आएगा काम
एयर मार्शल मिश्रा दिसंबर 1986 में भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हुए थे। अपने लंबे करियर में उन्होंने 3,000 से अधिक घंटे उड़ान भरी और 18 से अधिक प्रकार के विमानों पर उड़ान का अनुभव हासिल किया। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी रहे।
उन्होंने फाइटर स्क्वाड्रन की कमान संभाली और कई महत्वपूर्ण एयर बेस तथा परीक्षण संस्थानों में जिम्मेदारियां निभाईं। वह एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट (ASTE) के कमांडेंट और चीफ टेस्ट पायलट भी रहे। एयर मुख्यालय में उन्होंने ऑपरेशनल प्लानिंग और आकलन समेत कई रणनीतिक जिम्मेदारियां संभालीं।
उनका अनुभव केवल युद्ध संचालन तक सीमित नहीं रहा। रणनीतिक योजना, लॉजिस्टिक्स, मानव संसाधन, बड़े संगठनों का संचालन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जैसे क्षेत्रों में भी उन्होंने काम किया है। माना जा रहा है कि यही अनुभव राम मंदिर ट्रस्ट के बढ़ते प्रशासनिक कामकाज में उपयोगी साबित होगा।
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
राम मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके साथ ही मंदिर परिसर के विस्तार, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के समन्वय और बड़े धार्मिक आयोजनों का प्रबंधन भी लगातार बढ़ रहा है।
CEO के तौर पर मिश्रा से मंदिर की दैनिक प्रशासनिक व्यवस्था, श्रद्धालु सुविधाओं, वित्तीय प्रबंधन, कर्मचारियों के बीच समन्वय और बड़े धार्मिक आयोजनों की निगरानी की उम्मीद है। हालांकि, ट्रस्ट अभी CEO की शक्तियों और जिम्मेदारियों का विस्तृत मानक संचालन ढांचा यानी SOP अंतिम रूप से तैयार कर रहा है। ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरि के मुताबिक, CEO की शक्तियों, रिपोर्टिंग व्यवस्था और सेवा शर्तों को औपचारिक रूप से तय किया जाना बाकी है।
दिलचस्प बात यह है कि मिश्रा ने एक बातचीत में कहा कि उन्हें अपनी नियुक्ति की जानकारी समाचार रिपोर्टों के माध्यम से मिली और उस समय तक उन्हें ट्रस्ट की ओर से औपचारिक संचार प्राप्त नहीं हुआ था।
नियुक्ति के पीछे पारदर्शी चयन प्रक्रिया
CEO के चयन के लिए गठित समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक सुरेश हावरे शामिल थे। समिति ने उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी की।
प्राप्त 5,585 आवेदनों में से पहले 16 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया। 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में उनके साक्षात्कार हुए। इसके बाद 1 सितंबर को तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंपा गया और 2 सितंबर को मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई गई।
यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रस्ट ने पहली बार CEO जैसा पूर्णकालिक प्रशासनिक पद बनाया है। इससे मंदिर प्रबंधन को अधिक पेशेवर और स्पष्ट जिम्मेदारियों वाले ढांचे में लाने की कोशिश के संकेत मिलते हैं।
मंदिर ट्रस्ट में व्यापक प्रशासनिक बदलाव
मिश्रा की नियुक्ति अकेला बड़ा बदलाव नहीं है। ट्रस्ट ने हालिया बैठक में तीन नए ट्रस्टियों को भी शामिल किया है। इनमें दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका, अयोध्या के अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और सेवानिवृत्त हिंदी प्रोफेसर निर्मला यादव शामिल हैं। निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य बताई गई हैं।
इसके अलावा स्वामी गोविंद देव गिरि को नया महासचिव बनाया गया है और महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। ये बदलाव मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को पुनर्गठित करने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माने जा रहे हैं।
दान और वित्तीय प्रबंधन पर भी नजर
राम मंदिर में श्रद्धालुओं और भक्तों की ओर से बड़ी मात्रा में दान आता है। हाल में मंदिर के चढ़ावे और दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं तथा चोरी के विवाद ने ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए थे। ऐसे समय में सैन्य पृष्ठभूमि वाले अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति को प्रशासन और वित्तीय जवाबदेही मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
मिश्रा की नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि बड़े संस्थागत ढांचे में काम करने का उनका अनुभव मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय निगरानी, प्रक्रियाओं और प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
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उत्तर प्रदेश से भी है खास संबंध
जितेंद्र मिश्रा का संबंध उत्तर प्रदेश से है। वह देवरिया जिले के भोपा पट्टी गांव से आते हैं। उनका परिवार मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से रहा है और उनके पिता व्याख्याता थे। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से प्रशिक्षण लिया और अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज तथा ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में भी उच्च स्तरीय प्रशिक्षण हासिल किया।
अब सेना से सेवानिवृत्ति के कुछ महीनों बाद उनका करियर एक बिल्कुल अलग क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है। सैन्य अभियानों की कमान संभालने के बाद वह अब देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक के प्रशासन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की पश्चिमी कमान का नेतृत्व कर चुके सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के रूप में चयन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। 5,585 आवेदनों से शुरू हुई चयन प्रक्रिया के बाद तीन उम्मीदवारों के पैनल में से मिश्रा को चुना गया।
उनके सामने अब सैन्य अभियान जैसी चुनौती नहीं, बल्कि विशाल धार्मिक परिसर के प्रशासन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, वित्तीय व्यवस्था, कर्मचारियों के समन्वय और बड़े आयोजनों को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी होगी।
हालांकि CEO की विस्तृत शक्तियां और कामकाज की प्रक्रिया अभी अंतिम रूप से तय की जानी बाकी है, लेकिन चार दशक के सैन्य अनुभव, रणनीतिक योजना और बड़े संगठनों के संचालन की उनकी पृष्ठभूमि राम मंदिर ट्रस्ट के लिए एक नया प्रशासनिक मॉडल तैयार करने में अहम साबित हो सकती है।

