अयोध्या में निर्माणाधीन और संचालित हो रहे श्रीराम मंदिर के प्रशासन को अधिक व्यवस्थित स्वरूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के लिए चल रही लंबी चयन प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। चयन समिति ने तीन उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप से शॉर्टलिस्ट किया है और खास बात यह है कि तीनों उम्मीदवार उत्तर प्रदेश से हैं। ट्रस्ट की बुधवार को होने वाली अहम बैठक में इन तीन नामों में से एक पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है
इस नियुक्ति को राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रस्तावित CEO मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, बड़े धार्मिक आयोजनों के प्रबंधन और सरकारी विभागों समेत विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे।
तीन उम्मीदवारों में से एक का होगा चयन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने CEO के चयन के लिए एक विस्तृत और तकनीक आधारित भर्ती प्रक्रिया अपनाई। इस पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। कई चरणों की स्क्रीनिंग और बातचीत के बाद 16 उम्मीदवार अंतिम चरण में पहुंचे। इन उम्मीदवारों के साथ 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत और मूल्यांकन किया गया था।
इसके बाद चयन समिति ने तीन प्रमुख उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया। अब ट्रस्ट को इसी पैनल में से एक उम्मीदवार का चयन करना है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने की है और उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में जिम्मेदारियां संभाली हैं। वे सरकारी संस्थाओं तथा बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे हैं।
शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में से एक के बारे में बताया गया है कि वह सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हैं। हालांकि, ट्रस्ट ने अभी तीनों उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
राम मंदिर का CEO नौकरशाह या पुलिस अधिकारी नहीं होगा 
राम मंदिर के पहले CEO की नियुक्ति को लेकर पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। माना जा रहा था कि ट्रस्ट किसी सेवानिवृत्त नौकरशाह या पूर्व पुलिस अधिकारी को यह जिम्मेदारी दे सकता है। लेकिन अब सामने आई जानकारी के अनुसार अंतिम तीन उम्मीदवारों में न तो कोई पूर्व नौकरशाह है और न ही कोई पुलिस अधिकारी
इससे साफ है कि ट्रस्ट CEO के लिए केवल प्रशासनिक सेवा की पृष्ठभूमि के बजाय व्यापक संस्थागत नेतृत्व, प्रबंधन क्षमता, अनुभव और समन्वय कौशल को प्राथमिकता दे रहा है।
चयन समिति के सचिव समीेर पांडा के अनुसार, शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में उस स्तर की संस्थागत नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन विशेषज्ञता, ईमानदारी और दूरदर्शिता है, जिसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व वाली संस्था के संचालन के लिए आवश्यकता होगी।
तीन सदस्यीय समिति ने की पूरी प्रक्रिया
CEO के चयन की जिम्मेदारी जिस समिति को दी गई थी, उसमें सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और सेवानिवृत्त परमाणु वैज्ञानिक सुरेश हावरे शामिल थे। सुरेश हावरे पहले शिरडी स्थित श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं।
समिति ने आवेदन से लेकर अंतिम व्यक्तिगत बातचीत तक उम्मीदवारों का विस्तृत मूल्यांकन किया। जस्टिस प्रमोद कोहली ने कहा कि तीन उम्मीदवारों का चयन विस्तृत आकलन के बाद किया गया है और अंतिम निर्णय अब ट्रस्ट को करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी होगी।
राम मंदिर के CEO की जिम्मेदारियां क्या होंगी?
राम मंदिर के विस्तार और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए ट्रस्ट के लिए एक पेशेवर प्रशासनिक ढांचे की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। प्रस्तावित CEO इसी प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमुख चेहरा होगा।
CEO की जिम्मेदारियों में श्रद्धालु सुविधाओं का प्रबंधन, मंदिर परिसर से जुड़े प्रशासनिक काम, बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और सरकारी विभागों के साथ समन्वय शामिल होगा। इसके अलावा मंदिर से संबंधित सेवाओं और ट्रस्ट के प्रशासनिक संचालन की निगरानी भी CEO के जिम्मे होगी।
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और इसके आसपास विकसित हो रहे बड़े धार्मिक-पर्यटन ढांचे को देखते हुए यह पद भविष्य में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
आज हो सकता है अंतिम फैसला
ट्रस्ट अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के आवास पर बुधवार को होने वाली बैठक में CEO पद के लिए अंतिम निर्णय होने की संभावना है। बैठक में चयन समिति द्वारा सुझाए गए तीन नामों पर विचार किया जाएगा। ट्रस्ट एक उम्मीदवार को चुनने के बाद उसके वेतन और अन्य सेवा शर्तों पर बातचीत करेगा। इसके बाद नियुक्ति की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
ट्रस्ट की एक अन्य अहम बैठक में CEO पद की जिम्मेदारियों और अधिकारों का ढांचा भी तय किया जा रहा है। इससे नए CEO की भूमिका और निर्णय लेने की शक्तियों को स्पष्ट रूप दिया जा सकेगा।
राम मंदिर प्रशासन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है नियुक्ति?
राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के साथ मंदिर प्रशासन के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी भीड़ का प्रबंधन, यात्री सुविधाएं, सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं की निगरानी जैसे काम लगातार बढ़ रहे हैं।
ऐसे में CEO की नियुक्ति का उद्देश्य ट्रस्ट के प्रशासन को एक केंद्रीकृत और पेशेवर नेतृत्व देना माना जा रहा है। इससे रोजमर्रा के प्रशासनिक फैसलों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में तेजी आने की उम्मीद है।
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5,585 आवेदनों से तीन नामों तक का सफर
CEO चयन प्रक्रिया का सबसे उल्लेखनीय पहलू इसका व्यापक दायरा रहा। हजारों आवेदनों में से पहले उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग हुई, फिर ऑनलाइन बातचीत और अन्य मूल्यांकन चरणों के जरिए सूची छोटी की गई। अंततः 16 उम्मीदवारों को अयोध्या बुलाया गया और उनके साथ व्यक्तिगत बातचीत की गई। इसके बाद तीन उम्मीदवारों का अंतिम पैनल तैयार हुआ।
अब इस पूरी प्रक्रिया का अंतिम चरण ट्रस्ट के हाथ में है। तीनों उम्मीदवारों में से किसे राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO बनाया जाता है, इस पर आज फैसला होने की संभावना है।
निष्कर्ष
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO की नियुक्ति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। 5,585 आवेदनों से शुरू हुई प्रक्रिया तीन उम्मीदवारों तक सिमट गई है और तीनों उत्तर प्रदेश से हैं। चयन समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है।
खास बात यह है कि अंतिम सूची में कोई पूर्व नौकरशाह या पुलिस अधिकारी नहीं है। एक उम्मीदवार के सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी होने की जानकारी सामने आई है, जबकि अन्य उम्मीदवारों का अनुभव सरकारी संस्थाओं और बड़े प्रोजेक्ट्स में रहा है।
अब ट्रस्ट की बैठक में तीन नामों में से एक का चयन होगा। यदि नियुक्ति होती है, तो यह राम मंदिर के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय होगा। आने वाले समय में CEO मंदिर परिसर के प्रशासन, श्रद्धालु सुविधाओं और सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

