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मुंबई में तुकाराम मुंढे का फूड सेफ्टी अभियान तेज, 3,000 से ज्यादा छापे; गंदे किचन से बड़े फूड ब्रांड तक कार्रवाई

महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर चल रहा प्रशासन का सख्त अभियान अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। महाराष्ट्र के फूड सेफ्टी कमिश्नर तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने राज्यभर में 3,000 से अधिक छापे और निरीक्षण किए हैं। इन कार्रवाइयों में कई रेस्तरां, होटल, स्ट्रीट फूड कारोबार, बड़े फूड ब्रांड और खाद्य भंडारण केंद्रों में गंभीर स्वच्छता संबंधी कमियां सामने आने का दावा किया गया है।

FDA की कार्रवाई में कथित तौर पर चूहे और कॉकरोच, गंदे किचन, एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री, अनुचित भंडारण और लाइसेंस से जुड़ी अनियमितताएं सामने आईं। विभाग ने कई प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए हैं। कार्रवाई की जद में छोटे स्थानीय कारोबारों के साथ-साथ Domino’s, Pizza Hut और McDonald’s जैसे बड़े ब्रांडों के आउटलेट भी आए हैं।

मुंबई में मई से शुरू हुआ व्यापक अभियानमुंबई

तुकाराम मुंढे ने मई 2026 में महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा प्रमुख का पद संभालने के बाद निरीक्षण अभियान को तेज किया। उनके नेतृत्व में FDA की टीमें मुंबई और महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों में खाद्य कारोबारियों की जांच कर रही हैं।

इस अभियान की खास बात यह है कि निरीक्षण केवल छोटे दुकानदारों या सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानों तक सीमित नहीं रहा। बड़े रेस्तरां चेन, क्लब, होटल, फूड स्टोरेज सेंटर और अन्य प्रतिष्ठानों की भी जांच की गई।

मुंढे ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि खाद्य कारोबार करने वालों की जिम्मेदारी सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी है और नियमों का पालन नहीं करने वालों पर नियामक कार्रवाई की जाएगी।

किचन में चूहे और कॉकरोच मिलने से मचा हड़कंप

FDA की छापेमारी के दौरान सामने आई तस्वीरों और अधिकारियों की रिपोर्टों ने खाद्य स्वच्छता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कुछ प्रतिष्ठानों में कथित तौर पर कॉकरोच, चूहे, गंदी दीवारें और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री मिली।

कुछ मामलों में कच्चे मांस के अनुचित तरीके से रखे जाने की बात भी सामने आई। हालिया निरीक्षणों में मुंबई के कई होटल और रेस्तरां पर कार्रवाई की गई और पांच प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए। FDA ने लगभग 25 लाख रुपये मूल्य के प्रतिबंधित और अन्य खाद्य उत्पाद भी जब्त किए।

यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता की छोटी-सी चूक भी बड़े पैमाने पर खाद्य विषाक्तता और संक्रमण का कारण बन सकती है।

मुंबई में बड़े ब्रांड भी कार्रवाई से नहीं बचे

मुंढे के अभियान की सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए हुई क्योंकि कार्रवाई की जद में बड़े और लोकप्रिय ब्रांड भी आए। हाल के सप्ताहों में FDA ने मुंबई के चार Domino’s और एक Pizza Hut आउटलेट के परमिट निलंबित किए।

इसके अलावा McDonald’s के Colaba आउटलेट की रसोई में भी कथित तौर पर कॉकरोच की मौजूदगी और अन्य खाद्य सुरक्षा संबंधी खामियां मिलने के बाद लाइसेंस निलंबित किया गया। Radio Club और Khar Gymkhana जैसे प्रतिष्ठानों पर भी स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़े उल्लंघनों के आरोप में कार्रवाई हुई।

इससे यह संदेश गया कि FDA का अभियान केवल छोटे कारोबारियों तक सीमित नहीं है और नियम सभी पर समान रूप से लागू किए जा रहे हैं।

कोर्ट कैंटीन तक पहुंची कार्रवाई

मुंढे की कार्यशैली का एक उदाहरण तब सामने आया जब एक मुंबई अदालत में उनकी विभागीय कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए। अदालत में यह सवाल किया गया कि क्या FDA केवल निजी कारोबारियों को निशाना बना रहा है और क्या अदालत की कैंटीन की भी जांच की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, FDA की टीम ने इसके बाद अदालत की कैंटीन का भी निरीक्षण किया और कुछ ऐसी जगहों पर कार्रवाई की जो कथित तौर पर बिना आवश्यक लाइसेंस के संचालित हो रही थीं।इस घटनाक्रम को मुंढे की उस नीति के उदाहरण के तौर पर देखा गया जिसमें नियामक नियमों को सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।

ढीले खाद्य तेल के खिलाफ भी सख्ती

खाद्य सुरक्षा अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खुले या ढीले खाद्य तेल की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई है। FDA का कहना है कि खुले तेल में मिलावट की संभावना अधिक रहती है और पैकेजिंग के अभाव में उसके स्रोत, बैच और निर्माता की पहचान करना कठिन हो सकता है।

FDA के अनुसार, महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल की बिक्री पर लंबे समय से नियामकीय प्रतिबंध है। विभाग का कहना है कि पहले दी गई अस्थायी छूट 2020 में समाप्त हो गई थी और इसके बाद मूल नियम लागू रहे।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि छोटे उपभोक्ताओं के लिए पैकेज्ड तेल 200 मिलीलीटर, 500 मिलीलीटर और एक लीटर जैसे छोटे पैक में उपलब्ध हैं।

5.31 करोड़ रुपये का तेल जब्त

FDA के आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 के दौरान महाराष्ट्र में 1,247 खाद्य तेल के नमूने लिए गए। इनमें 1,142 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए, जबकि 77 नमूने घटिया, 13 असुरक्षित और 15 गलत लेबल वाले पाए गए।

इसी अभियान के तहत विभाग ने करीब 3,20,781 किलोग्राम खाद्य तेल, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 5.31 करोड़ रुपये है, जब्त किया। अकेले बीड जिले में करीब 1.94 करोड़ रुपये मूल्य का खुला खाद्य तेल जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।ये आंकड़े खाद्य तेल की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर प्रशासन की चिंता को स्पष्ट करते हैं।

कार्रवाई का असर कारोबारियों पर दिखने लगा

मुंबई में लगातार हो रही छापेमारी का असर अब खाद्य कारोबारियों की कार्यशैली पर भी दिखाई देने लगा है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, कई स्ट्रीट वेंडरों और रेस्तरां ने निरीक्षण बढ़ने के बाद अपनी प्रक्रियाओं में बदलाव किए हैं। कुछ कारोबारियों ने कृत्रिम लाल रंग की जगह प्राकृतिक मिर्च का इस्तेमाल शुरू किया, जबकि कुछ ने तलने वाले तेल को ज्यादा बार बदलना और कर्मचारियों के लिए दस्ताने तथा सिर ढकने की व्यवस्था शुरू की।

इससे संकेत मिलता है कि सख्त निरीक्षण केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह रहा, बल्कि खाद्य कारोबारियों को अपनी रोजमर्रा की स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के लिए भी मजबूर कर रहा है।

सोशल मीडिया पर मुंढे की चर्चा

तुकाराम मुंढे की छापेमारी और कार्रवाई की तस्वीरें तथा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं। कई उपभोक्ताओं ने उनके अभियान की सराहना की है और इसे खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में जरूरी सख्ती बताया है।

हालांकि, उनके अभियान को लेकर कुछ कारोबारियों और उद्योग प्रतिनिधियों की ओर से सवाल भी उठे हैं। कुछ लोगों ने नियामक कार्रवाई की प्रक्रिया और उसके आर्थिक प्रभाव पर चिंता जताई है। ऐसे में चुनौती यह है कि कार्रवाई सख्त होने के साथ-साथ पारदर्शी, नियम आधारित और समान रूप से लागू हो।

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स्कूलों के आसपास भी सख्त कार्रवाई की तैयारी

FDA ने अब शैक्षणिक संस्थानों के आसपास संचालित होने वाले खाद्य प्रतिष्ठानों पर भी विशेष ध्यान देने का संकेत दिया है। मुंढे ने अधिकारियों को स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों के आसपास खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ ‘मिशन मोड’ में कार्रवाई करने को कहा है।

इसका सीधा असर बच्चों और युवाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा है, क्योंकि स्कूलों के आसपास बड़ी संख्या में छात्र रोजाना स्ट्रीट फूड और अन्य खाद्य पदार्थ खरीदते हैं।

निष्कर्ष

महाराष्ट्र में तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में चल रहा खाद्य सुरक्षा अभियान मुंबई के रेस्तरां और खाद्य कारोबार के लिए एक बड़ा संदेश बनकर सामने आया है। 3,000 से अधिक छापों, बड़े ब्रांडों पर कार्रवाई, गंदे किचन और कीटों की कथित मौजूदगी तथा करोड़ों रुपये के खाद्य तेल की जब्ती ने खाद्य सुरक्षा को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

इस अभियान की असली सफलता केवल कितने प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई हुई, इससे तय नहीं होगी। महत्वपूर्ण यह होगा कि क्या इससे खाद्य कारोबारियों की स्वच्छता व्यवस्था स्थायी रूप से सुधरती है और उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन मिलता है।

मुंढे के सामने अब चुनौती अभियान को लगातार, निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने की है। यदि निरीक्षण, नमूना जांच, लाइसेंस कार्रवाई और उपभोक्ता जागरूकता एक साथ जारी रहती है, तो मुंबई का यह अभियान देश के अन्य हिस्सों के लिए भी खाद्य सुरक्षा नियमन का एक प्रभावी मॉडल बन सकता है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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