HomeBusinessImport General Manifest कैसे काम करता है? इंपोर्टर्स के लिए पूरी गाइड

Import General Manifest कैसे काम करता है? इंपोर्टर्स के लिए पूरी गाइड

Import General Manifest एक ऐसा दस्तावेज है, जिसे ज्यादातर नए इंपोर्टर नजरअंदाज कर देते हैं, क्योंकि इसे भरने की जिम्मेदारी उनकी नहीं होती। लेकिन यही एक गलती अक्सर सामान को पोर्ट पर फंसा देती है। अगर इसमें आपकी कंपनी का नाम, पता या IEC नंबर गलत दर्ज हो जाए, तो पूरा शिपमेंट अटक सकता है, भले ही बाकी सारे दस्तावेज सही हों। आइए इस दस्तावेज की पूरी जानकारी विस्तार से समझते हैं।

Import General Manifest क्या है?

Import General Manifest, कस्टम्स एक्ट 1962 की धारा 30 के तहत कैरियर द्वारा भारतीय कस्टम्स को दी जाने वाली घोषणा है, जिसमें जहाज या विमान पर मौजूद हर शिपमेंट का ब्योरा दर्ज होता है। आपका शिपमेंट इसमें सिर्फ एक लाइन के रूप में दिखता है, जो आपके बिल ऑफ लेडिंग नंबर से जुड़ा होता है। इसे इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ICEGATE पोर्टल पर तय फॉर्मेट में फाइल किया जाता है, जिसमें ट्रांसपोर्ट और वेसल की जानकारी, कार्गो का ब्योरा और स्टेकहोल्डर की डिटेल जैसी तीन तरह की जानकारी शामिल होती है।

इसे कौन फाइल करता है?

इसे इंपोर्टर नहीं, बल्कि कैरियर फाइल करता है। फुल कंटेनर लोड के लिए शिपिंग लाइन, लूज कार्गो के लिए NVOCC या फ्रेट फॉरवर्डर, और एयर कार्गो के लिए एयरलाइन इसे फाइल करने की जिम्मेदारी संभालती है। भले ही इंपोर्टर इसे खुद फाइल नहीं करता, फिर भी वह इसके डेटा का स्रोत होता है। इसलिए अपनी कंपनी का सही कानूनी नाम, पता और IEC नंबर सप्लायर को शिपिंग इंस्ट्रक्शन मिलने से पहले ही सही-सही भेज देना बेहद जरूरी है, ताकि बाद में सुधार की नौबत न आए।

फाइलिंग का समय और जुर्माना

सी कार्गो मैनिफेस्ट एंड ट्रांसशिपमेंट रेगुलेशन 2018 के तहत, जहाज के आखिरी विदेशी पोर्ट से रवाना होने से पहले ही इसे फाइल करना जरूरी है। ज्यादातर शिपिंग लाइन सेलिंग से करीब 72 घंटे पहले ही डेटा मांग लेती हैं, यानी आपका कंसाइनी डिटेल सुधारने की खिड़की सामान समंदर पार होने से पहले ही बंद हो जाती है।

बिना उचित कारण देरी से फाइल करने पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। इससे भी बड़ी परेशानी वेसल डिटेंशन, क्लीयरेंस में देरी और डेमरेज के रूप में सामने आती है, जो सीधे जुर्माने से भी महंगी पड़ सकती है।

Bill of Entry से इसका क्या फर्क है?

Import General Manifest और Bill of Entry दोनों ही अहम कस्टम्स दस्तावेज हैं, लेकिन दोनों आयात प्रक्रिया के अलग-अलग चरण में काम आते हैं। यह कैरियर या फ्रेट एजेंट द्वारा माल के भारत पहुंचने की घोषणा है, जो कार्गो उतरने से पहले ही फाइल हो जाती है।

Import General Manifest फाइल करता शिपिंग एजेंट पोर्ट ऑफिस में
Import General Manifest पोत के आने से पहले शिपिंग एजेंट द्वारा फाइल किया जाता है

वहीं Bill of Entry इंपोर्टर या उसके कस्टम हाउस एजेंट द्वारा माल पहुंचने के बाद क्लीयरेंस के लिए भरी जाती है। जब तक इसकी एंट्री ICEGATE सिस्टम में नहीं दिखती, तब तक Bill of Entry फाइल ही नहीं की जा सकती, इसलिए यह पूरी क्लीयरेंस प्रक्रिया की नींव मानी जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: Import General Manifest की पूरी जानकारी कहां मिलेगी?
जवाब: ट्रैकिंग और फाइलिंग की विस्तृत जानकारी ICEGATE की आधिकारिक वेबसाइट पर मिल सकती है।

सवाल: इसे इंपोर्टर खुद फाइल कर सकता है?
जवाब: नहीं, इसे हमेशा कैरियर, यानी शिपिंग लाइन, फ्रेट फॉरवर्डर या एयरलाइन ही फाइल करती है।

सवाल: Import General Manifest देरी से फाइल करने पर कितना जुर्माना लगता है?
जवाब: बिना उचित कारण देरी होने पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है, इसके अलावा डेमरेज और डिटेंशन का खर्च भी लगता है।

सवाल: क्या इसे Bill of Entry से पहले फाइल करना जरूरी है?
जवाब: हां, जब तक इसकी एंट्री ICEGATE सिस्टम में नहीं दिखती, तब तक Bill of Entry फाइल नहीं की जा सकती।

सवाल: गेटवे और लोकल के बीच क्या अंतर है?
जवाब: जिस बंदरगाह पर कार्गो पहले पहुंचता है वहां गेटवे फाइलिंग होती है, जबकि इनलैंड डेस्टिनेशन पोर्ट पर पहुंचने पर लोकल फाइलिंग की जाती है।

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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