Dropshipping GST को लेकर ज्यादातर नए सेलर्स एक बड़ी गलतफहमी पाल लेते हैं, यह सोचकर कि माल खुद न रखने और न भेजने से टैक्स का झंझट भी शायद नहीं होगा। जबकि असलियत में कानून की नजर में आप उतने ही जिम्मेदार सेलर हैं, जितना कोई अपने गोदाम से सामान भेजने वाला। कब रजिस्ट्रेशन जरूरी है और कब नहीं, यह समझना शुरुआत में ही बेहद जरूरी है। आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
अपनी वेबसाइट से बेचने पर नियम क्या हैं?
अगर कोई अपनी खुद की वेबसाइट, जैसे Shopify या WooCommerce, से सामान बेचता है, तो सामान्य टर्नओवर सीमा लागू होती है। सामान बेचने पर 40 लाख रुपये और सर्विस देने पर 20 लाख रुपये से ज्यादा सालाना टर्नओवर होने पर ही रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है।
हालांकि एक अहम शर्त यह है कि अगर किसी दूसरे राज्य में भी सामान भेजा जाता है, तो टर्नओवर चाहे जितना भी हो, रजिस्ट्रेशन तुरंत अनिवार्य हो जाता है। ज्यादातर D2C ब्रांड शुरुआत से ही देशभर में शिपिंग करते हैं, इसलिए व्यवहार में यह Dropshipping GST सीमा शायद ही किसी को बचा पाती है।
मार्केटप्लेस से बेचने पर अलग नियम लागू होते हैं
Amazon, Flipkart या Meesho जैसे मार्केटप्लेस पर लिस्टिंग करते ही यह पूरी तरह अलग मामला बन जाता है। CGST एक्ट की धारा 24(ix) के तहत, ऐसे प्लेटफॉर्म से बेचने वाले हर सेलर के लिए रजिस्ट्रेशन पहले दिन से अनिवार्य है, चाहे टर्नओवर कितना भी कम क्यों न हो।
इसके अलावा मार्केटप्लेस हर ऑर्डर पर 0.5 प्रतिशत TCS काटकर सरकार के पास जमा करता है। यह रकम अतिरिक्त टैक्स नहीं, बल्कि एडवांस पेमेंट है, जिसे बाद में रिटर्न फाइल करते समय क्रेडिट के रूप में वापस क्लेम किया जा सकता है।
टैक्स रेट प्रोडक्ट के हिसाब से बदलता है
इसमें Dropshipping GST की दर एक जैसी नहीं होती, बल्कि प्रोडक्ट कैटेगरी पर निर्भर करती है। 1,000 रुपये से कम के कपड़ों पर 5 प्रतिशत, प्रोसेस्ड फूड और कुछ इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज पर 12 प्रतिशत, ज्यादातर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन एक्सेसरीज पर 18 प्रतिशत, जबकि लग्जरी आइटम पर 28 प्रतिशत तक टैक्स लगता है। सप्लायर भारत के बाहर का हो तब भी यह जिम्मेदारी नहीं बदलती, क्योंकि सेलर ऑफ रिकॉर्ड होने के नाते बिक्री मूल्य पर टैक्स जमा करना उसी की जिम्मेदारी रहती है।

कंपोजिशन स्कीम कब इस्तेमाल की जा सकती है?
कंपोजिशन स्कीम सिर्फ उन्हीं के लिए उपलब्ध है, जो सिर्फ अपनी वेबसाइट से बेचते हैं और सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से कम है। मार्केटप्लेस पर बेचने वालों के लिए यह विकल्प उपलब्ध नहीं है। अगर किसी अनरजिस्टर्ड सप्लायर से खरीद की जाती है, तो रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत टैक्स खुद जमा करना पड़ता है, जिसे बाद में इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में क्लेम किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: Dropshipping GST से जुड़ी पूरी जानकारी कहां मिलेगी?
जवाब: विस्तृत गाइड DisyTax की गाइड पर मिल सकती है।
सवाल: अपनी वेबसाइट से बेचने पर Dropshipping GST रजिस्ट्रेशन कब जरूरी होता है?
जवाब: सामान बेचने पर 40 लाख और सर्विस पर 20 लाख रुपये टर्नओवर से ज्यादा होने पर, या किसी दूसरे राज्य में सामान भेजने पर रजिस्ट्रेशन जरूरी हो जाता है।
सवाल: मार्केटप्लेस पर बेचने वालों के लिए Dropshipping GSTके क्या नियम है?
जवाब: Amazon, Flipkart या Meesho जैसे प्लेटफॉर्म पर बेचने वाले हर सेलर के लिए रजिस्ट्रेशन टर्नओवर चाहे जितना भी हो, पहले दिन से अनिवार्य है।
सवाल: TCS क्या है और यह कैसे काम करता है?
जवाब: मार्केटप्लेस हर ऑर्डर पर 0.5 प्रतिशत TCS काटता है, जिसे बाद में रिटर्न फाइल करते समय क्रेडिट के रूप में वापस क्लेम किया जा सकता है।
सवाल: क्या कंपोजिशन स्कीम मार्केटप्लेस सेलर्स के लिए उपलब्ध है?
जवाब: नहीं, कंपोजिशन स्कीम सिर्फ उन सेलर्स के लिए है जो सिर्फ अपनी वेबसाइट से बेचते हैं और टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से कम है।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।
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