HomeViral Newsअसम में बाढ़ का कहर जारी: 47 लोगों की मौत, 7 लाख...

असम में बाढ़ का कहर जारी: 47 लोगों की मौत, 7 लाख से अधिक प्रभावित; पांच नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर

असम में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने राज्य के कई जिलों में भीषण तबाही मचा दी है। बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 7 लाख से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, राज्य की पांच प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे कई जिलों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण स्थिति सामान्य होने के बजाय और चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।

राज्य सरकार के अनुसार, बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शिवसागर, जोरहाट, चराईदेव, गोलाघाट, नगांव, धेमाजी और डिब्रूगढ़ शामिल हैं। हजारों घर जलमग्न हो चुके हैं, सैकड़ों गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से टूट गया है और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों तथा राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।

असम में चारों ओर पानी ही पानीअसम

लगातार बारिश और नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि के कारण कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। ग्रामीण अपने घरों की छतों, ऊंचे स्थानों और अस्थायी शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। अनेक परिवारों को नावों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।

कई इलाकों में सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त नावें और बचाव दल तैनात किए हैं।

असम की पांच नदियां खतरे के निशान से ऊपर

ASDMA की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ब्रह्मपुत्र, बुरीदिहिंग, धनसिरी, दिखौ और दिसांग सहित पांच प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कई स्थानों पर जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में नए क्षेत्रों के जलमग्न होने की आशंका बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रहती है तो बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

सात लाख से अधिक लोग प्रभावित

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या सात लाख से अधिक पहुंच चुकी है। हजारों परिवार अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। प्रशासन द्वारा सैकड़ों राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

सेना और NDRF राहत कार्य में जुटी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), पुलिस तथा अग्निशमन विभाग की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।

बाढ़ग्रस्त इलाकों से हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। नावों, मोटरबोट और अन्य विशेष उपकरणों की मदद से फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। कई स्थानों पर हेलीकॉप्टरों के माध्यम से भी आवश्यक सामान पहुंचाने की तैयारी की गई है।

कृषि और पशुधन को भारी नुकसान

बाढ़ का सबसे अधिक असर खेती पर पड़ा है। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब चुकी है, जिससे धान और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा लाखों पशु-पक्षी भी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

कई किसानों का कहना है कि उनकी पूरी फसल नष्ट हो गई है और अब उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है ताकि प्रभावित किसानों को उचित सहायता प्रदान की जा सके।

मुख्यमंत्री ने किया प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कई बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी प्रभावित परिवार तक सहायता पहुंचाने में देरी नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है और राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की भी घोषणा की है।

रेलवे और सड़क यातायात प्रभावित

बाढ़ के कारण कई स्थानों पर रेलवे ट्रैक जलमग्न हो गए हैं, जिससे अनेक ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं। कुछ ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि कई का मार्ग बदला गया है।

सड़कों के डूबने और पुलों को नुकसान पहुंचने से सड़क यातायात भी बाधित है। प्रशासन लगातार मार्ग बहाल करने का प्रयास कर रहा है ताकि राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके।

मौसम विभाग का अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने असम के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी वर्षा की संभावना जताई है। लोगों को नदियों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तुरंत कम होने की संभावना नहीं है, इसलिए आने वाले दिन भी चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं।

आगे और समाचार पढ़े:

राहत शिविरों में बढ़ाई गई सुविधाएं

राज्य सरकार ने राहत शिविरों में भोजन, चिकित्सा, पेयजल और स्वच्छता की अतिरिक्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी राहत शिविरों में तैनात हैं ताकि जलजनित बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।

बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

निष्कर्ष

असम इस समय मानसून की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। 47 लोगों की मौत, सात लाख से अधिक प्रभावित आबादी और पांच प्रमुख नदियों का खतरे के निशान से ऊपर बहना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी के कारण चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।

राज्य सरकार, सेना और आपदा प्रबंधन एजेंसियां मिलकर प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने में जुटी हैं। अब सबकी उम्मीद इस बात पर टिकी है कि मौसम जल्द सामान्य हो और बाढ़ का पानी उतरने के साथ राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी आए।

WhatsApp Group
Join Now
PandeyAbhishek
PandeyAbhishek
Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular