HomeViral Newsजम्मू-कश्मीर के राजौरी में तबाही: अचानक आई बाढ़ से 11 लोगों की...

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में तबाही: अचानक आई बाढ़ से 11 लोगों की मौत, कई वाहन बहे; राहत-बचाव अभियान तेज

जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ जिलों में मूसलाधार बारिश के बाद आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। तेज बहाव में कई वाहन बह गए, मकान क्षतिग्रस्त हो गए और सड़कें तथा पुल टूटने से अनेक गांवों का संपर्क बाकी क्षेत्रों से कट गया। राहत एवं बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

राजौरी में रातभर हुई बारिश बनी तबाही की वजह

राजौरी और पुंछ के पहाड़ी इलाकों में देर रात से लगातार भारी बारिश होती रही। कई स्थानों पर अचानक जलस्तर बढ़ गया और पहाड़ों से मलबा तथा चट्टानें नीचे आने लगीं। देखते ही देखते छोटे-छोटे नाले उफनती नदियों में बदल गए और आसपास के गांव बाढ़ की चपेट में आ गए।

स्थानीय लोगों के अनुसार कई परिवारों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। तेज बहाव में घरों के बाहर खड़े वाहन बह गए और कई मकान मलबे में दब गए। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत अभियान शुरू किया।

राजौरी में कई वाहन और मकान बहेराजौरी

फ्लैश फ्लड का सबसे अधिक असर राजौरी जिले के निचले इलाकों में देखा गया, जहां दर्जनों वाहन पानी और मलबे में बह गए। कई स्थानों पर सड़कें धंस गईं, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

भारी बारिश के कारण बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुईं। कई गांवों में बिजली आपूर्ति बंद हो गई, जबकि मोबाइल नेटवर्क बाधित होने से राहत कार्यों में शुरुआती कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

राहत एवं बचाव अभियान जारी

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, भारतीय सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच गईं। बचाव दल नावों, रस्सियों और भारी मशीनों की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे हैं।

भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर ने कई स्थानों पर फंसे नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रशासन ने राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां प्रभावित परिवारों को भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

कई लोग अब भी लापता

प्रशासन के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कई लोग अब भी लापता हैं। राहत दल मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश में लगातार अभियान चला रहे हैं।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि कुछ परिवारों के सदस्य तेज बहाव में बह गए और उनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल ने लिया राजौरी और पुंछ का जायजा

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर राज्य लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली तथा केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्रा पर असर

लगातार खराब मौसम और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन अमरनाथ यात्रा और माता वैष्णो देवी यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य होने और मार्ग सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही यात्राएं दोबारा शुरू की जाएंगी। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

मौसम विभाग का अलर्ट

भारतीय मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

स्थानीय लोगों की आपबीती

प्रभावित गांवों के लोगों ने बताया कि रात के समय अचानक पानी का स्तर इतना तेजी से बढ़ा कि लोगों को घर छोड़कर भागना पड़ा। कई परिवारों का सामान, पशुधन और आजीविका के साधन बह गए।

एक स्थानीय निवासी ने बताया कि कुछ ही मिनटों में पूरी बस्ती पानी और मलबे से भर गई। लोगों ने किसी तरह ऊंचे स्थानों पर पहुंचकर अपनी जान बचाई। कई परिवार अब राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

विशेषज्ञों की चिंता

आपदा विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण, वनों की कटाई और जल निकासी व्यवस्था की कमी भी नुकसान को बढ़ाती है।

विशेषज्ञों ने ऐसे संवेदनशील इलाकों में बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली, मजबूत जल निकासी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन ढांचे को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है।

आगे और समाचार पढ़े:

सरकार की राहत घोषणा

प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के लिए अनुग्रह सहायता तथा घायल लोगों के निःशुल्क उपचार की घोषणा की है। साथ ही क्षतिग्रस्त मकानों और फसलों का सर्वेक्षण कर उचित मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

राजस्व, लोक निर्माण, स्वास्थ्य और बिजली विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं को बहाल करने में जुटी हुई हैं।

निष्कर्ष

राजौरी और पुंछ में आई फ्लैश फ्लड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाएं कितनी तेजी से विनाशकारी रूप ले सकती हैं। अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग लापता हैं और राहत-बचाव अभियान लगातार जारी है।

सरकार, सेना और आपदा प्रबंधन एजेंसियां प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने में जुटी हैं, लेकिन मौसम विभाग के ताजा अलर्ट को देखते हुए आने वाले कुछ दिन अभी भी चुनौतीपूर्ण बने रह सकते हैं। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

WhatsApp Group
Join Now
PandeyAbhishek
PandeyAbhishek
Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular