/ Feb 04, 2026
All rights reserved with Masterstroke Media Private Limited.
UTTARAKHAND VOTER LIST UPDATE: उत्तराखंड में आगामी चुनाव प्रक्रियाओं को दुरुस्त करने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के करीब 19.79 लाख मतदाताओं पर मतदाता सूची से नाम कटने का खतरा मंडरा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पूर्व की गतिविधियों में इन मतदाताओं की अब तक बीएलओ मैपिंग नहीं हो पाई है। चुनाव आयोग के बार-बार प्रयासों और अपीलों के बावजूद इन मतदाताओं ने अभी तक इस प्रक्रिया में सक्रियता नहीं दिखाई है, जिससे उनके मताधिकार पर संकट के बादल छा गए हैं।

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 84,42,263 है। निर्वाचन विभाग के अथक प्रयासों के बाद अब तक 64,63,099 मतदाताओं की बीएलओ मैपिंग सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है, जो कुल संख्या का लगभग 76 प्रतिशत है। हालांकि, शेष 19,79,164 मतदाता अभी भी इस अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि एसआईआर के दौरान इन मतदाताओं ने फॉर्म जमा नहीं किए, तो उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा और संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।

निर्वाचन विभाग की कार्ययोजना के अनुसार, प्री-एसआईआर गतिविधियों के तहत बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मैपिंग का कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। शुरुआती चरण में उन मतदाताओं को लक्षित किया गया जिनके परिवार के नाम वर्ष 2003 की उत्तराखंड की मतदाता सूची में शामिल थे। अब दूसरे चरण में उन मतदाताओं की मैपिंग की जा रही है जो वर्तमान में उत्तराखंड में निवास कर रहे हैं, लेकिन वर्ष 2003 में उनके वोट उत्तर प्रदेश या अन्य राज्यों की सूची में दर्ज थे। विभाग का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी बनाना और केवल वास्तविक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना है।

जल्द ही पूरे राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान शुरू होने वाला है, जिसके तहत बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन फॉर्म पहुंचाएंगे। इस प्रक्रिया में जिन मतदाताओं की मैपिंग पहले ही हो चुकी है, उन्हें किसी भी तरह के अतिरिक्त दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं होगी; उन्हें केवल फॉर्म भरकर वापस करना होगा। इसके विपरीत, जिन मतदाताओं की मैपिंग अभी तक नहीं हुई है, उन्हें फॉर्म के साथ वर्ष 2003 के वोट से संबंधित अनिवार्य दस्तावेज भी जमा करने होंगे। इस प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले मतदाताओं को औपचारिक नोटिस भेजा जाएगा और अंतिम तिथि तक जवाब न देने पर उनके वोट काट दिए जाएंगे।

मतदाता सत्यापन की इस प्रक्रिया में राज्य के अलग-अलग जिलों में स्थिति भिन्न बनी हुई है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में सबसे अधिक मतदाता अभी भी बीएलओ मैपिंग के दायरे से बाहर हैं। इन जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं जो अन्य राज्यों से आकर यहाँ बसे हैं। वहीं, राज्य के पर्वतीय जिलों में मैपिंग की स्थिति मैदानी इलाकों की तुलना में काफी बेहतर और संतोषजनक बताई जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य फर्जी या स्थानांतरित मतदाताओं को सूची से बाहर करना है।

राज्य निर्वाचन विभाग ने एक बार फिर आम जनता से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के बीएलओ से तुरंत संपर्क करें। मतदाताओं को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित फॉर्म भरें और मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराएं ताकि उनका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रहे। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और किसी भी वास्तविक मतदाता को उसके अधिकार से वंचित करने का इरादा नहीं है, लेकिन मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है। (UTTARAKHAND VOTER LIST UPDATE)

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में गुलदार का आतंक, 5 साल के बच्चे को मां के हाथ से खींच ले गया
देश दुनिया से जुड़ी हर खबर और जानकारी के लिए क्लिक करें-देवभूमि न्यूज
All Rights Reserved with Masterstroke Media Private Limited.