UTTARAKHAND STF: उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने मानव तस्करी और साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने रोजगार के नाम पर युवाओं को विदेश भेजने वाले एक एजेंट को गिरफ्तार किया है। यह एजेंट युवाओं को बैंकॉक (थाईलैंड) के वीज़ा पर भेजकर वहां से अवैध तरीके से म्यांमार (बर्मा) ले जाता था, जहां उन्हें जबरन साइबर अपराधों में इस्तेमाल किया जाता था। भारत सरकार और साइबर क्राइम पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस नेटवर्क से जुड़े कई खुलासे हुए हैं। इसी कार्रवाई के तहत STF ने म्यांमार के केके पार्क शहर में बंधक बनाए गए उत्तराखंड के 21 युवकों को मुक्त कराकर सुरक्षित भारत वापस लाया है।
कैसे रचा गया साइबर अपराध का ताना-बाना
STF की जांच में पता चला कि उत्तराखंड के कई युवकों को झूठे रोजगार के विज्ञापन दिखाकर या एजेंटों के माध्यम से नौकरी का लालच दिया गया। युवकों को दिल्ली से बैंकॉक भेजा गया, लेकिन वहां से उन्हें अवैध रूप से म्यांमार के केके पार्क शहर में ले जाया गया। वहां इन युवाओं को “साइबर दास” बनाकर काम कराया जाता था। उन्हें ज़बरदस्ती ऑनलाइन धोखाधड़ी, कॉलिंग स्कैम और अन्य साइबर अपराधों में इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस पूछताछ में पीड़ित युवकों ने बताया कि उन्हें न तो अपने परिवारों से संपर्क करने दिया जाता था और न ही वापस लौटने की अनुमति थी।

UTTARAKHAND STF की कार्रवाई: अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर शिकंजा
उत्तराखंड पुलिस की साइबर क्राइम एसटीएफ ने इंस्पेक्टर जनरल नीलेश आनंद भरणे के निर्देशन और सहायक पुलिस अधीक्षक कुश मिश्रा (IPS) के नेतृत्व में इस अभियान को अंजाम दिया। टीम ने भारत सरकार के I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) और गृह मंत्रालय से संपर्क साधकर युवकों की लोकेशन ट्रेस की और म्यांमार से छुड़वाने की प्रक्रिया शुरू की। छुड़ाए गए युवकों को वापस उत्तराखंड लाकर उनके परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि अब तक इस नेटवर्क से जुड़े दो एजेंटों की पहचान हुई है, जिनमें से एक एजेंट को आज उधम सिंह नगर से गिरफ्तार किया गया है।

फरीदाबाद और म्यांमार के बीच एजेंटों का संपर्क
आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पूछताछ जारी है। जांच में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार एजेंट का सीधा संपर्क म्यांमार के केके पार्क में मौजूद लोगों से था, जो भारत के अलग-अलग राज्यों से युवकों को भर्ती कर वहां भेजते थे। उन्हें ‘ऑनलाइन जॉब’ या ‘डिजिटल मार्केटिंग’ का झांसा देकर साइबर फ्रॉड सेंटरों में काम करने को मजबूर किया जाता था। इन केंद्रों में भारतीय युवकों से फोन कॉल्स, ऑनलाइन स्कैम और फर्जी बैंकिंग ट्रांजैक्शन जैसे अपराध कराए जाते थे। STF अब एजेंट के विदेश संपर्कों और बैंक ट्रांजैक्शनों की जांच कर रही है।

UTTARAKHAND STF ने दी चेतावनी: रोजगार के नाम पर ठगी से बचें
UTTARAKHAND STF प्रमुख नवनीत सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों में युवाओं को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने अपील की कि कोई भी युवक अगर विदेश में नौकरी के लिए जा रहा है तो पहले कंपनी, वीज़ा और ऑफर लेटर की पूरी जांच करे। उन्होंने बताया कि कई एजेंट सोशल मीडिया और निजी नेटवर्क के ज़रिए युवाओं को फंसाते हैं और बाद में उन्हें मानव तस्करी और साइबर अपराधों में धकेल देते हैं। इसलिए किसी भी संदिग्ध एजेंट या ऑफर की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस या एसटीएफ को दें।

भारत सरकार और राज्य पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
यह अभियान भारत सरकार के साइबर अपराध रोकथाम मिशन का हिस्सा है। I4C और राज्य की साइबर क्राइम शाखाओं के सहयोग से देशभर में ऐसे नेटवर्क की पहचान की जा रही है जो रोजगार के बहाने युवाओं को विदेश भेज रहे हैं। उत्तराखंड STF ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में शामिल अन्य एजेंटों की तलाश में है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह रोजगार के नाम पर युवाओं की तस्करी कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराध करवा रहा था। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।

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