/ Jan 02, 2026
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UTTARAKHAND SIR: उत्तराखंड निर्वाचन विभाग ने राज्य के मतदाताओं को एक बड़ी सहूलियत दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम की विशेष पहल पर प्रदेश में वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम खोजने की प्रक्रिया को बेहद सरल और सुविधाजनक बना दिया गया है। निर्वाचन आयोग ने एक नया सिस्टम तैयार किया है जिसके तहत अब मतदाता केवल एक क्लिक पर अपनी 2003 की मतदाता सूची देख सकेंगे। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब वोटर लिस्ट में नाम खोजने के लिए मतदाता अपने गली, मोहल्ले या एरिया के नाम से भी अपनी जानकारी हासिल कर सकते हैं।

UTTARAKHAND SIR की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने यह निर्देश दिए थे कि पुरानी मतदाता सूचियों तक आम जनता की पहुंच आसान बनाई जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए 2003 की मतदाता सूची को ऑनलाइन सर्च करने के सिस्टम को अपग्रेड किया गया है। अक्सर देखा जाता है कि कई सालों पुरानी सूची होने के कारण लोगों को अपने पुराने बूथ नंबर या वार्ड की सही जानकारी याद नहीं रहती, जिससे उन्हें अपना रिकॉर्ड खोजने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब नए यूजर इंटरफेस के आने से यह समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने इस नई सुविधा के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पहले मतदाताओं को अपना नाम खोजने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन अब सर्च विकल्पों को बहुत ही व्यावहारिक बना दिया गया है। सीईओ उत्तराखंड की आधिकारिक वेबसाइट www.ceo.uk.gov.in पर यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अब कोई भी व्यक्ति अपने घर बैठे-बैठे केवल अपने मोहल्ले, गली या क्षेत्र का नाम टाइप करके उस समय के पोलिंग बूथ और वोटर लिस्ट में अपना नाम देख सकता है।

राज्य में मतदाताओं के सत्यापन और पुराने रिकॉर्ड्स के मिलान के लिए बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) आउटरीच अभियान चलाया जा रहा है। सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि यह अभियान आगामी 10 जनवरी तक जारी रहेगा। इस दौरान बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। वे मतदाताओं द्वारा दी गई वर्तमान जानकारी का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से कर रहे हैं। चूंकि यह अभियान जमीनी स्तर पर चल रहा है, इसलिए कई बार ऐसी स्थिति बन रही थी कि मतदाताओं को अपने 2003 के बूथों की सही जानकारी नहीं थी। इस कारण सत्यापन कार्य में समय लग रहा था।

मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वेबसाइट के यूजर इंटरफेस को और अधिक यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। हालांकि, वर्ष 2003 की मतदाता सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड की वेबसाइट पर पहले से ही उपलब्ध थी, लेकिन तब सर्च के विकल्प सीमित थे। पहले मतदाता केवल अपने विधानसभा क्षेत्र, अपने नाम या अपने पिता/पति के नाम के आधार पर ही मतदाता क्रमांक और बूथ संख्या की जानकारी प्राप्त कर सकते थे। अब इसमें ‘एरिया सर्च’ का नया फीचर जोड़ दिया गया है। इस नए फीचर के जुड़ने से गली और मोहल्लों के नाम से डेटा फिल्टर करना संभव हो गया है, जिससे सटीक जानकारी सेकंडों में सामने आ जाती है।

सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने प्रदेश के जन सामान्य से अपील की है कि वे इस अभियान में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि बीएलओ जब उनके घर आएं तो उन्हें अपेक्षित जानकारी उपलब्ध कराएं। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक मतदाता के मताधिकार की सुरक्षा करना है। बीएलओ द्वारा हर मतदाता से समन्वय, संवाद और पहुंच सुनिश्चित की जा रही है ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे और मतदाता सूची त्रुटि रहित तैयार हो सके। प्रशासन का प्रयास है कि तकनीकी सरलीकरण के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया में जनभागीदारी को और अधिक बढ़ाया जाए।

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