UTTARAKHAND ECO TOURISM POLICY 2026: उत्तराखंड में पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में वन विभाग के अंतर्गत ईको टूरिज्म की उच्च अधिकार प्राप्त समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि चूंकि प्रदेश का अधिकतर भू-भाग वनों से ढका हुआ है, इसलिए यहां ईको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जंगलों के बीच ऐसे नए स्पॉट खोजे जाएं और उन्हें विकसित किया जाए जो पर्यटकों को आकर्षित कर सकें।

15 जनवरी तक फाइनल होगी UTTARAKHAND ECO TOURISM POLICY 2026
बैठक का सबसे अहम फैसला साहसिक पर्यटन को लेकर रहा। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग (पर्वतारोहण) के लिए एक इंटीग्रेटेड पॉलिसी तैयार की जाए। उन्होंने इसके लिए 15 जनवरी की डेडलाइन तय की है, तब तक यह पॉलिसी फाइनल होकर शासन को प्रस्तुत करनी होगी। मुख्य सचिव ने एक व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि पॉलिसी को अंतिम रूप देने से पहले प्राइवेट स्टेक होल्डर्स यानी इस क्षेत्र में काम कर रहे निजी संचालकों और एजेंसियों से भी बात कर ली जाए। ऐसा करने से भविष्य में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों से बचा जा सकेगा।

नई चोटियां खुलेंगी, पर्यावरण ऑडिट होगा अनिवार्य
साहसिक पर्यटन को विस्तार देते हुए सरकार ने राज्य में ट्रैकिंग के लिए नई पहाड़ी चोटियों को खोलने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि नए रूट्स और चोटियों को खोलने की दिशा में तेजी से काम किया जाए। हालांकि, पर्यावरण का ध्यान रखना भी प्राथमिकता होगी। इसलिए नई जगहों को खोलने से पहले उनका पर्यावरण ऑडिट और अन्य सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके संचालन के लिए जल्द ही एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी कर दी जाएगी ताकि पर्यटकों की सुरक्षा और प्रकृति का संरक्षण साथ-साथ चल सके।

चौरासी कुटिया का जल्द होगा कायाकल्प
ऋषिकेश स्थित विश्व प्रसिद्ध चौरासी कुटिया (बीटल्स आश्रम) के जीर्णोद्धार कार्य को लेकर भी मुख्य सचिव ने सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर के जीर्णोद्धार का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसके लिए कार्यदायी संस्था को एक निश्चित टाइम लाइन दी जाए और लक्ष्य निर्धारित किए जाएं ताकि काम समय पर खत्म हो सके और पर्यटक इसका लाभ उठा सकें। इसके साथ ही उन्होंने मसूरी के पास स्थित ‘जबरखेत नेचर रिजर्व’ मॉडल की तारीफ की। उन्होंने निर्देश दिए कि जबरखेत मॉडल को राज्य के अन्य चिन्हित ईको टूरिज्म स्थलों पर भी लागू किया जाए।

UTTARAKHAND ECO TOURISM POLICY 2026: 10 साइट्स का प्लान एक महीने में मांगा
मुख्य सचिव ने संभागीय वन अधिकारियों (डीएफओ) को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि डीएफओ को यह टास्क दिया जाए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में ईको टूरिज्म को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं। इसके अलावा, अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे 10 चिन्हित ईको टूरिज्म साइट्स का विस्तृत प्लान एक महीने के भीतर तैयार करके शासन को भेजें। वन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए एक ठोस मैकेनिज्म तैयार करने की बात भी कही गई।

ईको टूरिज्म बोर्ड होगा पावरफुल, मिलेगा अलग बजट
बैठक में ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (ईटीडीबी) को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यटन गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी इसी बोर्ड को दी जा सकती है। इसके लिए बोर्ड में मैन पावर बढ़ाई जाएगी और बजट का प्रावधान भी किया जाएगा। उन्होंने अपर सचिव वन को निर्देश दिए कि ईटीडीबी के लिए एक नया बजट हेड खोला जाए, ताकि उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (यूटीडीबी) की तरह ही ईटीडीबी को भी सरकारी ग्रांट मिल सके। ईको टूरिज्म साइट्स के संचालन के लिए बोर्ड के माध्यम से जल्द ही एमओयू साइन किए जाएंगे।

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