UTTARAKHAND BOMB THREAT: उत्तराखंड में अदालतों को बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को लगातार चौथे दिन प्रदेश की विभिन्न अदालतों को विस्फोटक से उड़ाने की धमकी मिली। आज मिली धमकी में नैनीताल हाईकोर्ट के साथ-साथ देहरादून और नैनीताल की जिला अदालतों को निशाना बनाया गया है। विशेष रूप से नैनीताल जिला न्यायालय को पिछले तीन दिनों में यह तीसरी बार धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ है। बार-बार मिल रही इन धमकियों के कारण सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

UTTARAKHAND BOMB THREAT: देहरादून जिला न्यायालय परिसर खाली कराया गया
आज सुबह जैसे ही देहरादून जिला जज को ई-मेल के माध्यम से धमकी मिली, पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। एहतियात के तौर पर पूरे कोर्ट परिसर को तत्काल खाली कराया गया और कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया गया। करीब दो घंटे तक चले इस भारी-भरकम सर्च ऑपरेशन के बाद पुलिस को कोई भी संदिग्ध सामग्री बरामद नहीं हुई, जिसके बाद प्रशासन और वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने पुष्टि की कि अज्ञात व्यक्ति द्वारा ई-मेल से मिली धमकी का त्वरित संज्ञान लेते हुए जांच की गई, लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला।

सैन्य-ग्रेड विस्फोटक ‘C-4’ और ISI का जिक्र
इस बार मिली धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता इसलिए बढ़ा दी है क्योंकि इसमें किसी सामान्य विस्फोटक के बजाय सैन्य-ग्रेड सामग्री ‘C-4’ का जिक्र किया गया है । धमकी भरे पत्र के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: ई-मेल में दावा किया गया कि परिसर के अंदर C-4 और नाइट्रेट से बने 5 बम पहले से ही रखे गए हैं । विशेषज्ञों के अनुसार C-4 (कम्पोजिशन-4) एक उच्च क्षमता वाला प्लास्टिक विस्फोटक है जिसका उपयोग मुख्य रूप से सेना करती है।

पत्र में सुबह 11:15 बजे विस्फोट करने की बात लिखी गई थी । यह भी कहा गया कि यदि बम अपने आप नहीं फटे तो कुछ लोग अंदर आकर खुद को उड़ा लेंगे, ई-मेल में तमिलनाडु के ईडब्ल्यूएस आरक्षण और ब्राह्मण वर्चस्व के विरोध जैसी बातें लिखी गई थीं। इसके अंत में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI, तमिल टाइगर ऑफ ईलाम (LTTE) और DMK आईटी विंग का भी उल्लेख किया गया था।(UTTARAKHAND BOMB THREAT)
कामकाज प्रभावित होने से वकीलों में नाराजगी
बार-बार कोर्ट परिसर खाली कराने और कामकाज ठप होने से अधिवक्ताओं में भारी रोष है । नैनीताल के वकीलों का कहना है कि इस तरह की धमकियों से न केवल हजारों लोगों की जान का जोखिम बना हुआ है, बल्कि न्यायिक कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है । अधिवक्ताओं ने मांग की है कि जब तक धमकी देने वाले शरारती तत्वों को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता, तब तक सुरक्षा के मद्देनजर अदालतों को बंद रखा जाए । उल्लेखनीय है कि देहरादून और नैनीताल से पहले उत्तरकाशी, टिहरी और रुद्रप्रयाग की अदालतों को भी इसी तरह की धमकियां मिल चुकी हैं ।

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