/ Jan 12, 2026

News Elementor

RECENT NEWS

दिसंबर 2025 में रिटेल महंगाई 1.33% बढ़ी, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से बिगड़ा बजट

RETAIL INFLATION INDIA: देश में रिटेल यानी खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2025 में बढ़कर 1.33% हो गई है। यह लगातार दूसरा महीना है जब महंगाई के आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे ठीक एक महीने पहले यानी नवंबर 2025 में महंगाई दर 0.71% बढ़ी थी। दिसंबर का यह आंकड़ा पिछले तीन महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि दिसंबर में महंगाई के ये आंकड़े लगातार 11वें महीने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के तय टारगेट से नीचे रहे हैं।

RETAIL INFLATION
RETAIL INFLATION

RETAIL INFLATION INDIA: खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाई चिंता

नवंबर 2025 की तुलना में दिसंबर 2025 में खाद्य मुद्रास्फीति में 120 आधार अंकों की वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वस्तुओं की कीमतों में सालाना बढ़ोतरी का प्रमुख कारण सब्जियां, दालें, मसाले, अंडे, मांस और मछली जैसी खाने-पीने की चीजें हैं। इसके अलावा पर्सनल केयर और इस्तेमाल की अन्य चीजों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। दिसंबर महीने में बिजली के दाम बढ़ने से भी महंगाई पर असर पड़ा है। गौरतलब है कि महंगाई के बास्केट में लगभग 50% योगदान खाने-पीने की चीजों का ही होता है। खाद्य पदार्थों की महीने-दर-महीने की महंगाई माइनस 3.91% से बढ़कर माइनस 2.71% हो गई है।

RETAIL INFLATION
RETAIL INFLATION

सब्जियों और नॉनवेज के दामों में उतार-चढ़ाव

जनवरी 2025 से लेकर अक्टूबर 2025 तक देश में सब्जियों जैसी खाने-पीने की चीजों की कीमतें काफी हद तक गिर गई थीं, लेकिन नवंबर महीने से कीमतें फिर से बढ़ने लगी हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि दिसंबर में सब्जियां महंगी हो गईं क्योंकि सब्जियों का इन्फ्लेशन प्रिंट नवंबर में (-) 22.20% से बढ़कर (-) 18.47% हो गया। वहीं दूसरी ओर दिसंबर 2025 के लिए अंडे का इन्फ्लेशन प्रिंट 4.76% पर रहा, जबकि मांस और मछली का इन्फ्लेशन प्रिंट भी बढ़कर 5.12% हो गया। राहत की बात यह है कि पिछले 4 महीनों में, दिसंबर तक तेल और फैट की महंगाई लगातार गिरी है और यह 6.75% पर आ गई है।

RETAIL INFLATION
RETAIL INFLATION

शहर और गांव दोनों जगह बढ़ी महंगाई

ग्रामीण और शहरी दोनों सेगमेंट में सीपीआई (CPI) इन्फ्लेशन बढ़कर क्रमशः 0.76% और 2.03% हो गया है। अगर विस्तार से देखें तो ग्रामीण सेक्टर में हेडलाइन महंगाई दिसंबर 2025 में 0.76% थी, जबकि नवंबर 2025 में यह 0.10% थी। वहीं, ग्रामीण सेक्टर में खाने-पीने की चीजों की महंगाई दिसंबर 2025 में -3.08% देखी गई, जो नवंबर में -4.05% थी। शहरी क्षेत्र की स्थिति देखें तो यहां हेडलाइन महंगाई नवंबर 2025 के 1.40% से बढ़कर दिसंबर 2025 में 2.03% हो गई है। शहरी क्षेत्रों में भी खाने-पीने की चीजों की महंगाई में बढ़ोतरी देखी गई है, जो नवंबर के -3.60% से बढ़कर दिसंबर में -2.09% हो गई है।

RETAIL INFLATION
RETAIL INFLATION

पिछले एक साल का महंगाई का ट्रेंड

दिसंबर 2024 में महंगाई दर 5.22% थी, जो जनवरी 2025 में घटकर 4.26% रह गई। इसके बाद फरवरी में यह 3.61% और मार्च 2025 में 3.34% दर्ज की गई। अप्रैल में यह आंकड़ा 3.16% और मई में 2.82% रहा। जून 2025 में महंगाई दर 2.10% थी, जो जुलाई में घटकर 1.61% हो गई। अगस्त में इसमें थोड़ी बढ़ोतरी हुई और यह 2.07% पर पहुंची, लेकिन सितंबर में फिर गिरकर 1.54% हो गई। अक्टूबर 2025 में रिटेल महंगाई 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई थी, जो 14 साल में सबसे कम स्तर था। इसके बाद नवंबर में यह बढ़कर 0.71% और अब दिसंबर 2025 में 1.33% हो गई है।

RETAIL INFLATION
RETAIL INFLATION

क्या है सीपीआई और बेस ईयर का गणित

सरकार महंगाई मापने के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) सीरीज का इस्तेमाल करती है। यह सरकार का महंगाई मापने का एक आसान तरीका है जो बताता है कि दूध, सब्जी और पेट्रोल जैसी रोजमर्रा की चीजें कितनी महंगी या सस्ती हो रही हैं। भारत में सीपीआई की मौजूदा सीरीज 2012 के बेस ईयर पर आधारित है। इसका मतलब है कि 2012 की कीमतों को 100 मानकर तुलना की जाती है। समय के साथ इसे अपडेट किया जाता है ताकि आंकड़े सही रहें और हर नई सीपीआई सीरीज में बेस ईयर बदल दिया जाता है।

RETAIL INFLATION
RETAIL INFLATION

बेस ईयर वह साल होता है जिसकी कीमतों को आधार माना जाता है और उसी साल की चीजों की औसत कीमत को 100 का मान दिया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि 2020 बेस ईयर है और उस साल एक किलो टमाटर 50 रुपये का था और 2025 में वह 80 रुपये का हो गया, तो इसी फॉर्मूले से महंगाई की गणना प्रतिशत में की जाती है। RETAIL INFLATION का बढ़ना और घटना मुख्य रूप से प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। जब डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होती, तो इन चीजों की कीमत बढ़ जाती है। वहीं, इसके विपरीत अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा होगी, तो महंगाई कम हो जाएगी।

ये भी पढ़िए-

UTTARAKHAND UCC
UTTARAKHAND UCC

उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण में 24 गुना वृद्धि, दूसरे राज्यों के लिए पेश की मिसाल

देश दुनिया से जुड़ी हर खबर और जानकारी के लिए क्लिक करें-देवभूमि न्यूज

RECENT POSTS

CATEGORIES

Sports

Entertainment

Share Market

All Rights Reserved with Masterstroke Media Private Limited.