बागी हो सकते हैं रणजीत, गुरु हरीश को दे सकते हैं मात या बिगाड़ सकते हैं समीकरण

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रणजीत रावत बागी होकर रामनगर विधानसभा सीट से लड़ सकते हैं निर्दलीय चुनाव
समर्थकों के साथ लगातार बैठकों का दौर जारी, सभी की निगाहें रणजीत रावत के अगले कदम पर

देहरादून (अमित रतूड़ी)ः उत्तराखंड की हाॅट सीट बन चुकी रामनगर से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का टिकट फाइनल होने पर अब सबकी निगाहें उनके पूर्व प्रमुख सिपहसालार रणजीत रावत पर टिक गई हैं। उनके निर्दलीय या पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि रणजीत रावत अभी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। 2017 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर हारने के बाद रणजीत रावत रामनगर में पूरी तरह से सक्रिय रहे। लिहाजा उन्हें उम्मीद थी कि वह रामनगर से चुनाव जीतेंगे।

चर्चा है कि अगर रणजीत सिंह बागी हो सकते हैं और निर्दलीय भी चुनाव लड़ सकते हैं। चर्चा यह भी है कि वह 11 दावेदारों के लिए पार्टी बनाकर चुनाव लड़ सकते हैं। सूत्रों की मानें तो अभी उनके रामनगर निवास पर समर्थकों के साथ बैठक चल रही है। दूसरी ओर रणजीत सिंह रावत ने बताया कि जो लिस्ट जारी हुई है, वह आधिकारिक नहीं है। अधिकारिक सूची जारी होने के बाद ही वह आधिकारिक बयान जारी करेंगे।

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रणजीत रावत के हरीश रावत के साथ पारिवारिक संबंध होने के साथ ही पूर्ववर्ती रणजीत हरीश रावत सरकार में मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार हुआ करते थे, लेकिन 2017 के बाद दोनों की राह अलग हो गई। रामनगर से हरीश रावत के चुनाव लड़ रहे हैं तो यह सीट एक वजह से भी हॉट हो गई। भाजपा के प्रत्याशी दीवान सिंह बिष्ट पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के भांजे हैं। दोनों रिश्तेदार पहली बार आमने-सामने आ गए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों में जुबानी जंग दिलचस्प होने वाली है। दोनों रिश्तेदार होने के बाद भी एक दूसरे पर शब्दों के बाण चलाते हुए दिखेंगे।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए प्रथम चरण में 53 प्रत्याशियों की सूची जारी करने के बाद कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को 11 अन्य प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी। जबकि छह सीटों पर माथापच्ची अब भी जारी है। नरेंद्रनगर, टिहरी, सल्ट, हरिद्वार ग्रामीण, रुड़की और चैबट्टाखाल। चर्चा है कि अगर रणजीत सिंह बागी हो सकते हैं और निर्दलीय भी चुनाव लड़ सकते हैं। चर्चा यह भी है कि वह 11 दावेदारों के लिए पार्टी बनाकर चुनाव लड़ सकते हैं।

रामनगर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के चुनाव लड़ने से अब यह हॉट हो गई। पहली बार होगा जब रामनगर सीट पर मामा-भांजा आमने-सामने एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। हरीश रावत व दीवान सिंह बिष्ट आपस में मामा-भांजा हैं। उत्तराखंड में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा भले ही घोषित न हुआ हो, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इस समय कांग्रेस के लिए पूरे प्रदेश में सबसे बड़ा चेहरा हैं। ऐसे में हरीश रावत के चुनाव लड़ने या लड़ाने को लेकर सस्पेंस अब खत्म हो गया है। रामनगर सीट पर हरीश रावत समर्थक पहले ही माहौल बनाने में लगे हुए थे। यह बात अलग है कि हरीश रावत के लिए रामनगर सीट पर रणजीत रावत ही सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहे हैं।

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