/ Feb 11, 2026
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NATIONAL HORTICULTURE MISSION: भारत सरकार ने देश में बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास और किसानों की आय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अपनी प्रमुख योजनाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में जानकारी दी कि बागवानी क्षेत्र को आधुनिक बनाने और बंपर पैदावार के समय किसानों को घाटे से बचाने के लिए सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है। इसके तहत वर्ष 2004-05 में शुरू किए गए राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) का पुनर्गठन करते हुए अब इसे ‘एकीकृत बागवानी विकास मिशन’ (एमआईडीएच) के दायरे में पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है।

वर्ष 2014-15 में एनएचएम को एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) में शामिल किया गया था, लेकिन वर्ष 2025 में इस योजना का एक बार फिर संशोधित परिचालन दिशानिर्देशों के साथ पुनर्गठन किया गया है। नए सुधारों के बाद अब यह योजना देश के सभी जिलों में लागू कर दी गई है। सरकार ने विभिन्न हस्तक्षेपों के लिए लागत मानदंडों को बढ़ाया है, ताकि किसानों को बेहतर वित्तीय सहायता मिल सके। इस संशोधित योजना में अब उच्च मूल्य वाली फसलों, विदेशी फलों और औषधीय फसलों के उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

जल्दी खराब होने वाले बागवानी उत्पादों (पेरिशेबल गुड्स) की खेती करने वाले किसानों के लिए सरकार ‘बाजार हस्तक्षेप योजना’ (एमआईएस) लागू कर रही है। यह योजना उन फसलों के लिए है जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था के अंतर्गत नहीं आती हैं। सरकार ने इसमें ‘मूल्य अंतर भुगतान’ (पीडीपी) का नया घटक भी जोड़ा है। इसके तहत कृषि एवं बागवानी परिषद (एपीएमसी) मंडियों में बेची गई फसलों के लिए ‘बाजार हस्तक्षेप मूल्य’ (एमआईपी) और वास्तविक ‘विक्रय मूल्य’ के बीच के अंतर का सीधा भुगतान किसानों को किया जाएगा। यह भुगतान पारदर्शी तरीके से सीधे पंजीकृत किसानों के बैंक खातों में भेजा जाता है।

प्रमुख बागवानी फसलों जैसे टमाटर, प्याज और आलू के बाजार को नियंत्रित करने और किसानों की मदद के लिए सरकार परिवहन और भंडारण लागत की प्रतिपूर्ति कर रही है। केंद्रीय नोडल एजेंसियों और राज्यों द्वारा नामित एजेंसियों को यह सहायता दी जाती है ताकि उत्पादक राज्यों से उपभोक्ता राज्यों तक इन फसलों को सुगमता से पहुंचाया जा सके। इससे न केवल उत्पादक किसानों को सही दाम मिलता है, बल्कि उपभोक्ता राज्यों में कीमतों को भी नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। सरकार की इन पहलों का मुख्य उद्देश्य बागवानी क्षेत्र को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना और किसानों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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