इंदिरा से दुश्मनी लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी से थी दोस्ती

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1982 का गढ़वाल लोकसभा सीट पर हुआ उपचुनाव देश की राजनीति में अपना अलग ही स्थान रखता है. ऐसा चुनाव न उससे पहले हुआ था और न उसके बाद देखने को मिला. जब एक लोकसभा के उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी को हराने के लिए पूरा केंद्रीय मंत्री मंडल और 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने डेरा डाल दिया था. यहां तक की तत्कालीन प्रधानमंत्री ने एक नहीं 38 जनसभाएं सिर्फ इस लोकसभा क्षेत्र में की थी. लेकिन इस चुनाव को लड़ रहे निर्दलीय प्रत्याशी और जिनके लिए पूरी सरकार ने जोर लगा दिया था ऐसे कांग्रेस के प्रत्याशी ने कभी आपसी सामान्जस्य नहीं बिगाड़ा, एक दूसरे को छोटे- बड़े की तरह हमेशा सम्मान दिया और हां कभी जनता के बीच महौल को भी खराब नहीं होने दिया.

जिस तरह से अब चुनावों में  देखा जाता है कि राजनीति कितने निम्नस्तर तक गिर गई है. इस के पीछे एक रोचक स्टोरी है जो आज तक शायद ही आप ने सुनी हो. इस स्टोरी पर आने से पहले हम थोड़ा से 1882 के इस उपचुनावों पर आप को जानकारी दे देते हैं. दरअसल तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और यूपी के मुख्यमंत्री रहे हेमवती नंदन के मन मुटाव के बारे में कौन नहीं जानता है. जब 1980 में आम चुनाव के बाद इंदिरा गांधी के प्रति हेमवती नंदन बहुगुणा की नाराजगी इतनी बढ़ गई कि उन्होंने पार्टी और संसद से इस्तीफा दे दिया. इस के बाद गढ़वाल सीट पर 1981 में उपचुनाव घोषित हुए लेकिन तत्कालीन जिलाधिकारी गढ़वाल द्वारा मुख्य निर्वाचन आयोग को भेजी एक रिपोर्ट के बाद चुनाव रद्द हो गये थे और उसके बाद 1982 में उपचुनाव घोषित हुए. इस उपचुनाव में हेमवती नंदन बहुगुणा ने इंदिरा गांधी के खिलाफ निर्दलीय ताल ठोक दी थी और इंदिरा गांधी ने चंद्र मोहन सिंह नेगी को अपना प्रत्याशी बनाया. यह चुनाव इंदिरा गांधी के लिए नाम का सवाल था. पूरी ताकत उन्होंने जहां झोंग दी थी. सत्ता का दुर्पयोग भी जमकर हो रहा था. जनता को कुचलने की भी कोशिश हुई. लेकिन इन सबके बीच दोनों प्रत्याशी हेमवती नंदन बहुगुणा और चंद्र मोहन सिंह नेगी ने आपसी मनमुटाव पैदा नहीं होने दिया और चुनाव के साथ और उसके बाद भी माहौल को भी नहीं बिगड़ने दिया. ऐसा क्यों कहा जा रहा है इसके पीछे की रोचक स्टोरी पर आते हैं.

उस समय चुनाव लड़ने के लिए बहुच ज्यादा संसाधन नहीं हुआ करते थे. यहां तक की प्रत्याशियों को कभी – कभी किसी घरों में शरण लेकर रात गुजारनी पड़ती थी. रहने के लिए प्रयाप्त जो इंतेजाम नहीं थे. अब चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी चंद्र मोहन सिंह नेगी पौड़ी जिले के मुंडनेश्वर क्षेत्र गये हुए थे. यहां प्रचार करते- करते उन्हें इसी क्षेत्र में रात हो गई. फिर उन्होंने निश्चय किया कि वे यहीं रात गुजारेंगे और वे रात्री विश्राम के लिए इस क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति डॉक्टर अबदयाल सिंह असवाल जी के यहां उनके गांव मिरचोड़ा पहुंच गये. डॉक्टर अबदयाल सिंह असवाल थोकदार परिवार से थे इसलिए उनके यहां रहने और खाने की कोई कमी नहीं होने वाली थी. यहां चंद्र मोहन सिंह नेगी को पूरा सम्मान मिला वे पुराने परिचित भी थे. वहीं दूसरी और हेमवती नंदन बहुगुणा रात्री विश्राम के लिए पाटीसैंण में रूके हुए थे. यहां तब एक कमरे का एक छोटा सा बंगला होता था, लेकिन यहां भी खाने की प्रयाप्त सुविधाएं तब नहीं थी. पाटीसैंण से मिरचोड़ा गांव बहुत ज्यादा दूर नहीं है, फिर हेमवती नंदन बहुगुणान ने सोचा डॉक्टर अबदयाल सिंह असवाल जी के यहां भोजन भी हो जायेगा और कुछ चुनावी रणनीति पर भी बातचीत हो जायेगी…उनके भी इस परिवार से पुराने रिस्ते थे.

अब चंद्र मोहन सिंह नेगी और असवाल जी के बातचीत ही कर रहे थे तभी हेमवती नंदन बहुगुणा वहां पहुंच गये. बहुगुणा जी उम्र में नेगी जी से बड़े थे तो बहुगुणा जी के सम्मान नेगी जी एकदम खड़े हो गये और उनका अभिवादन किया. उस समय वहां पर डॉक्टर अबदयाल सिंह असवाल जी के बड़े बेटे रतन सिंह असवाल मौजूद थे जो उस समय छटवीं के छात्र थे. इस मुलाकात को लेकर रतन सिंह असवाल जी ने बताया कि नेगी जी शरीर से मोटे थे तो बहुगुणा जी ने मजाकिया अंदाज में नेगी जी से कहा कि तु चारपाई में ही बैठा रह मैं कुर्सी में बैठ जाता हूं. फिर इनके बीच तीन- चार घंटे की लंबी बात-चीत हुई. साथ खाना खाया. बहुगुणा जी मजाकिया बहुत थे वे नेगी जी के साथ बार- बार मजाक भी कर रहे थे लेकिन कहीं नहीं लग रहा था कि दोनों एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. हां जाते- जाते बहुगुणा जी ने नेगी जी को ये जरूर कहा कि भुला गढ़वाली में जिसका मतलब होता है छोटा भाई तू चुनाव हार रहा है. इस पर नेगी जी मुस्कुरा दिया. लेकिन इस पर भी दोनों के बीच कोई बहस नहीं हुई, वे दोनों जानते थे कि दिल्ली वाले चुनाव लड़कर चले जायेंगे, दोनों ने यहीं रहना है और यह जनता ने भी. ये था पुराने नेताओं का एक- दूसरे के प्रति सम्मान. जो अब कम होता जा रहा है. इस उपचुनाव में हेमवती नंदन बहुगुणा जीत गये थे . चंद्र सिंह नेगी चुनाव हारे जरुर थे लेकिन इसके बाद ये दो आम चुनाव वे ही जीते थे तब उनके विपक्ष में बहुगुणा जी नहीं थे. आज की पॉलटिकल स्टोरी में मेरे साथ इतना ही कल मिलते हैं एक नई स्टोरी के साथ.