/ Feb 02, 2026
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BUDGET 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 में उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। इस बजट में केंद्र सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए केंद्रीय करों (टैक्स) की हिस्सेदारी में बड़ी बढ़ोतरी की है। उत्तराखंड को इस बार केंद्रीय करों से 17,414.57 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे, जो पिछले बजट के मुकाबले 1739.59 करोड़ रुपये अधिक हैं। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य की हिस्सेदारी का प्रतिशत भी 1.118 से बढ़कर 1.141 हो गया है।

आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में उत्तराखंड को सबसे अधिक राशि आयकर (इनकम टैक्स) और कॉर्पोरेट टैक्स के माध्यम से प्राप्त होगी। बजट विवरण के अनुसार, आयकर में हिस्सेदारी के तौर पर राज्य को 6,197.38 करोड़ रुपये मिलेंगे, जबकि कॉर्पोरेट टैक्स से 5,112.08 करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान है। सचिव वित्त दिलीप जावलकर के अनुसार, वित्तीय विकेंद्रीकरण के तहत प्राप्त होने वाली यह अतिरिक्त राशि राज्य की विकास यात्रा को और अधिक सशक्त बनाएगी, जिससे आधारभूत संरचना के कार्यों में तेजी आएगी।

पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने ‘इको-फ्रेंडली माउंटेन ट्रेल’ (हिल ट्रेक) विकसित करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में ट्रैकिंग और हाइकिंग जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से पहाड़ों के युवाओं को गाइड, पोर्टर, टैक्सी ऑपरेटर और होम-स्टे संचालक के रूप में स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही, 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10 हजार टूरिस्ट गाइड को प्रशिक्षण देने और डिजिटल नॉलेज ग्रिड के जरिए सांस्कृतिक स्थलों के दस्तावेजीकरण से तकनीकी क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होंगे।

केंद्रीय बजट में देश के भीतर तीन नए आयुर्वेद एम्स (AIIMS) खोलने का प्रस्ताव रखा गया है। उत्तराखंड की समृद्ध जड़ी-बूटी परंपरा और आयुर्वेदिक औषधियों की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य को इनमें से एक संस्थान मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार ने अगले पांच वर्षों में बड़ी संख्या में हेल्थ प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षण देने का भी लक्ष्य रखा है। जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सुविधाओं के विस्तार से पहाड़ी जिलों के मरीजों को इलाज के लिए मैदानी इलाकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

राज्य के पारंपरिक शिल्प और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान हैं। खादी, हैंडलूम और ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) के तहत बनने वाले सामानों को बाजार से जोड़ने के लिए एकीकृत योजना शुरू की जाएगी। महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के तहत कारीगरों को बेहतर ब्रांडिंग और मार्केट लिंक उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों में सड़क, पानी और सीवर जैसी नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाया गया है।

बजट से पूर्व हुई परामर्श बैठकों में उत्तराखंड सरकार ने केंद्र के सामने अपनी कई प्राथमिकताएं रखी थीं। राज्य को ‘वॉटर टावर’ बताते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन और आपदा पुनर्निर्माण के लिए शत-प्रतिशत राशि स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (SDRF) से देने की मांग की गई थी। कनेक्टिविटी के मोर्चे पर ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को समय पर पूरा करने और टनकपुर-बागेश्वर-रामनगर रेलवे सर्किट के सर्वे पर जोर दिया गया है। इसके अलावा, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए तारबंदी, वृद्धावस्था पेंशन में केंद्र का हिस्सा बढ़ाने और आगामी कुंभ मेले के लिए विशेष बजट की मांग भी शामिल है।

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