भूस्खलन रोकथाम के ठेके में बड़ा ‘खेल’? ₹5600000 का भुगतान; काम धेलेभर का भी नहीं!

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देहरादून (आशीष डोभाल )। उत्तराखंड वन विभाग में हर कदम पर घपले घोटाले और गबन के मामले अक्सर सामने आते रहे जंगल विभाग का पहले से ही भ्रष्टाचार के मामलों में पहला नंबर रहा है। एक कहावत भी है जंगल में मोर नाचा किसने देखा। यह कहावत उत्तराखंड वन विभाग के अफसरों के साथ ही यहां पंजीकृत ठेकेदारों पर एकदम सटीक बैठती है। जंगल विभाग के अफसरों और कार्मिकों से मिलकर एक ठेकेदार ने ऐसा ही गोलमाल किया है जिसमें धरातल पर काम तो हुआ नहीं पर भुगतान 56 लाख रुपए का करवा दिया गया। इस मामले में बड़े हेरफेर के आरोप लग रहे हैं।

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भ्रष्टाचार का यह मामला सीमांत उत्तरकाशी जनपद के के गोविंद वन्य जीव विहार राष्ट्रीय पार्क पुरोला के मोरी क्षेत्र का है। गोविंद वन्य जीव विहार राष्ट्रीय पार्क पुरोला के अंतर्गत लिवाड़ी गांव के नीचे अगले भाग पर भूस्खलन रोकथाम के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग उत्तराखंड शासन ने ₹71.09 लाख रुपए स्वीकृत किए थे। इस काम की दो किश्त भी ठेकेदार ने हजम कर ली हैं और मौके पर कुछ भी काम नहीं किया है। पहले काम निर्धारित साइट से दूसरी जगह ठेकेदार ने कर डाला। इसके बाद भी ठेकेदार की दो किश्त का भुगतान कैसे कर दिया गया? यह अपने आप में बड़ा सवाल है। स्थानीय लोगों के अनुसार मौके पर काम मुश्किल से ₹200000 का भी काम नहीं किया गया है। ₹71.09 में से 56 लाख की दो किश्तों का भुगतान भी हो चुका है, लेकिन मौके पर काम देख कर हर कोई अंदाजा लगा सकता है कि इस पर कितना खर्च हुआ है।

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ठेकेदार प्रमोद रावत

बता दें कि यह काम गोविंद वन्य जीव विहार राष्ट्रीय पार्क पुरोला उत्तरकाशी के अंतर्गत पड़ने वाले सीमांत लिवाड़ी गांव का है। गाँव के अगले हिस्से में भूस्खलन रोकथाम के लिए उत्तराखंड शासन की ओर से यह काम स्वीकृत हुआ था। लिवाड़ी गांव के निचले भाग पर भूमि कक्ष संख्या 15 सी में भूस्खलन रोकथाम कार्य के लिए पैसा जारी हुआ था, लेकिन ठेकेदार ने 15-सी की बजाय 15-बी में यह काम करवा दिया। काम कितना हुआ कितना नहीं यह मौके पर जाकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन वन विभाग के अफसरों और कार्मिकों ने काम होने से पहले पेमेंट कर दिया और काम अभी भी अधूरा है। हालांकि लिवाड़ी गांव निवासी ठेकेदार प्रमोद रावत को काम पूरा न करने को लेकर नोटिस जारी किए हैं, लेकिन यहां अपने आप बड़ा सवाल है कि बिना काम पूरा हुए ही कैसे ठेकेदार का एक के बाद एक दोनों किश्तों का भुगतान कर दिया गया? पहले तो ठेकेदार से गलत जगह निर्माण के लिए वसूली करने के साथ ही विभाग से ही ब्लैक लिस्ट किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उल्टा वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से सांठगांठ कर ठेकेदार ने 56 लाख का भुगतान करवा लिया।

इस संबंध में ठेकेदार प्रमोद रावत से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका मोबाइल कई दिन से बंद आ रहा है। उनको whatsapp के माध्यम से मैसेज भी ड्रॉप किए गए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है।

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देवी प्रसाद बलूनी, उपनिदेशक गोविंद वन्य जीव विहार राष्ट्रीय पार्क पुरोला (उत्तरकाशी)

दूसरी ओर इस संबंध में गोविंद वन्य जीव विहार राष्ट्रीय पार्क पुरोला के उपनिदेशक देवी प्रसाद बलूनी से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है और इस संबंध में उन्होंने जांच के लिए अधीनस्थ कार्मिकों को पत्र जारी किया है ।जल्द ही मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का उन्होंने आश्वासन दिया है।

देखें उत्तराखंड शासन की ओर से स्वीकृत धनराशि के संबंध में जारी पत्र…

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