मंत्री सतपाल महाराज का बड़ा बयान…ऐसे लगेगी अफसरशाही पर लगाम

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देहरादून, ब्यूरो। उत्तराखंड के साथ ही पूरे देश के कई राज्यों में नौकरशाही नेताओं पर अक्सर हावी रही है। अफसर पांच साल तक राजनीतिक दलों के चुनाव जीतने के साथ ही अपने हाव-भाव में बदलाव करते हैं। उत्तराखंड में राज्य गठन के बाद से ही यहां अफसरशाही हावी रही है। किसी भी विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव और अपर सचिव आदि पदों पर विराजमान अफसरों अपने मंत्रियों की तक नहीं सुनते हैं। ऐसे कई मामले पिछली सरकारों में देखने को मिले हैं जब विभागीय मंत्री और सचिव की ही आपस में नहीं बनी। इस गंभीर समस्या पर नकेल कसने के लिए उत्तराखंड सरकार में दोबारा मंत्री बने सतपाल महाराज सामने लेकर आए हैं। आज मीडिया से मुखाबित होते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की है कि पूर्व में एनडी तिवारी सरकार की तरह राज्य में मंत्री को अपने विभागीय आईएएस अफसरों जिनमें सचिव, प्रमुख सचिव, अपर सचिव शामिल हैं उनकी सीआर यानि काॅन्फिडेंशियल रिपोर्ट लिखने का अधिकार मिले। इससे जहां नौकरशाही को सत्ता का डर रहेगा साथ ही काम के साथ लाल फिताशाही पर भी लगाम लग पाएगी।

उन्होंने कहा कि सेना और दूसरे संस्थानों में भी ऐसी व्यवस्था होती है। इससे कार्यप्रणाली सुधरती है और कहीं न कहीं एक व्यवस्था दुरुस्त होती है। महाराज के बयान से ब्यूरोक्रेसी में हलचल मचना तय है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने वरिष्ठ मंत्री सतपाल महाराज के सुझाव पर कितना अमल कर पाते हैं। उत्तराखंड की बात करें तो यहां पहले से ही अफसरों की लाॅबिंग काम करती आई है। किसी भी काम को धरातल पर उताने में कहीं न कहीं अफसरों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। अगर अफसर ही बेलगाम हों तो नेता घोषणाएं और अच्छे काम करने के बाद भी जनता तक उसका फायदा पहुंचना मुश्किल है।