UTTARAKHAND HUMAN WILDLIFE CONFLICT: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही मानव-भालू और मानव-गुलदार संघर्ष की घटनाओं ने राज्य सरकार को गंभीर रूप से चिंतित कर दिया है। हाल के दिनों में चमोली, रुद्रप्रयाग और आसपास के इलाकों में भालू के हमलों में अचानक वृद्धि दर्ज की गई है। सीएम धामी ने सभी जिलों में वन विभाग को त्वरित कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा है कि जनमानस की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा है कि भालू या अन्य वन्यजीव संबंधित घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए।
UTTARAKHAND HUMAN WILDLIFE CONFLICT: ₹50 लाख की तत्काल धनराशि जारी
इसी मुद्दे पर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने चमोली जिले की घटनाओं को लेकर आज वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। उन्होंने विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया कि संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जाए, और ग्रामीणों के साथ सतत संवाद स्थापित किया जाए ताकि लोगों में विश्वास बने रहे। उन्होंने कहा कि “सरकार इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं है।” उधर, प्रमुख सचिव (वन एवं पर्यावरण) ने भी भालू-प्रभावित क्षेत्रों के सभी प्रभागीय वनाधिकारियों के साथ बैठक कर मौजूदा कार्रवाइयों की समीक्षा की। (UTTARAKHAND HUMAN WILDLIFE CONFLICT)

प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए प्रभागों को ₹50 लाख की तत्काल धनराशि जारी की जा रही है, जिसका उपयोग आधुनिक उपकरणों की खरीद और निगरानी प्रणाली मजबूत करने में किया जाएगा। वन विभाग को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि इंटीग्रेटेड हेल्पलाइन नंबर 1926 का व्यापक प्रचार किया जाए, ताकि ग्रामीण भालू या गुलदार की गतिविधि की सूचना तुरंत दे सकें। उत्तराखंड के ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड बढ़ने के साथ भालू भोजन की तलाश में मानव बस्तियों की ओर अधिक आने लगे हैं, जिससे घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। सरकार का कहना है कि जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम तेजी से उठाए जा रहे हैं।

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