कांग्रेस ने रामजन्म भूमि का मुद्दा भाजपा को देकर अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार दी?

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राम जन्म भूमि के मुद्दे को 90 के दशक से भाजपा ऐसे जकड़ कर रखा है कि जैसे उस पर फैविकोल का मजबूत जोड़ लगा हो, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राम जन्म भूमि को चुनावी मुद्दा बनाने की शुरूआत भाजपा ने नहीं कांग्रेस ने की थी |आज हम आपको बताएँगे कि कैसे सबसे पहले राम जन्मभूमि चुनावी मुद्दा बना और कैसे कांग्रेस ने अपनी जीत के लिए इस मुद्दे को हथियार बनाया था | रामजन्म भूमि के मुद्दे की शुरूआत आजादी के एक साल बाद 1948 से शुरू हो गई थी, आजादी के पहले से 1934 में कांग्रेस के अंदर एक अलग विचार धारा सोशलिस्ट पार्टी ने जन्म ले लिया था |

इस पार्टी में राम मनोहर लोहिया और आचार्य नरेंद्र देव जैसे नाम शामिल थे, लेकिन आजादी के बाद इनके बीच खिंचतान बड़ गई और 1948 में सोशलिस्ट पार्टी के 13 विधायकों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा से इस्तीफा दे दिया | इसके बाद 13 सीटों पर उप चुनाव हुआ, इस उप चुनाव में फैजाबाद सीट हॉट सीट बन गई थी |इस फैजाबाद सीट में ही रामजन्म भूमि अयोध्या भी आता है, तब फैजाबाद से सोशलिस्ट पार्टी से वहां के समाजवादी विचारधारक आचार्य नरेंद्र देव उम्मीदवार थे |

आचार्य नरेंद्र देव ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दिया था |आचार्य नरेंद्र देव फैजाबाद के ही रहने वाले थे और उनकी इस क्षेत्र में जबर्दस्त पकड़ थी, उन्हें हराना कांग्रेस के लिए आसान नहीं था | उस समय केंद्र और राज्य में कांग्रेस की ही सरकार थी, तब प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू थे, गृह मंत्री सरदार बल्लभाई पटेल थे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे गोविंद बल्लभ पंत, आचार्य नरेंद्र देव के खिलाफ कांग्रेस ने बाबा राघव दास को खड़ा किया | बाबा राघव दास वैसे महाराष्ट्र के रहने वाले थे लेकिन पूर्वी यूपी उनकी कर्मभूमि थी, देवरिया के बरहज कस्बे में उनका आश्रम था | वे धार्मिक संत तो नहीं थे लेकिन गांधीवादी और समाजसेवक थे, अब चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस ने हिंदू वोटो के धूर्वीकरण की राणनीति बनाई |

चुनाव प्रचार में कांग्रेस प्रत्याशी बाबा राघव दास ने कसम खा ली थी कि वे चुनाव जीतते ही राम जन्मभूमि को विधर्मियों से मुक्त कराएंगे, इस चुनाव में कांग्रेस ने अयोध्या में जो पोस्टर लगाये उन में आचार्य नरेंद्र देव को रावण की तरह दिखाया गया | साथ ही चुनाव में बाबा राघव दास को राम की तरह पेश किया गया, इस तरह से चुनाव में रामजन्म भूमि मुद्दा पहली बार चुनावी मुद्दा बनाया गया | इस चुनाव में बाबा राघव दास जीत गये और आचार्य नरेंद्र देव हार गये, जीत का अंतर लगभग एक हजार वोटों का था |

अब चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस तो नहीं लेकिन बाबा राघव दास अपना संकल्प पूरा करने में जुट गये, फिर दिंसबर 1949 में बाबा राघव दास ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर पहले सरयू नदि में स्नान किया और फिर बाबरी मस्जिद का ताला तोड़कर वहां भगवान राम की मूर्ति रख दी, अगले ही दिन अयोध्या में हंगामा शुरू हो गया, बात प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू तक जा पहुंची, फिर जवाहर लाल नेहरू ने अयोध्या के हालातों को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत को पत्र लिखा जिसमें मूर्ति हटाने को कहा गया | पंत जी ने भी डीएम फैजाबाद को निर्देश दिए कि वहां से मूर्ति हटाई जाये, तब केके नायर फैजाबाद के डीएम हुआ करते थे | डीएम ने वहां से मूर्ति हटाने से मना कर दिया, उन्होंने कहा कि अगर अब वहां से मूर्ति हटाई जाती है तो यहां खून खराबा हो सकता है |

कांग्रेस ने रामजन्म भूमि का मुद्दा भाजपा को देकर अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार दी?

ऐसे में फिर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने गृह मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल को पत्र लिखा सरदार पटेल ने भी मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत को विकल्प तलाशने को कहा, अब इस पूरे मामले पर डीएम केके नायर को इस्तीफा देना पड़ा तक जाकर कुछ मामला शांत हुआ | 1980 में भाजपा के गठन के साथ ही भाजपा ने इसे अपना प्रमुख मुद्दा बना लिया…तो ये मुद्दा उठाया किसी ने और बाद में पकड़ लिया किसी और ने |