विधानसभा सत्र में कांग्रेस विधायकों ने फाड़ी बजट की प्रतियां, मार्शल से धक्का-मुक्की; जमकर हंगामा

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विधानसभा सत्र में कांग्रेस विधायकों ने फाड़ी बजट की प्रतियां, मार्शल से धक्का-मुक्की; जमकर हंगामा

जिला विकास प्राधिकरण लूट का अड्डा, कांग्रेस ने किया सदन में नियम 58 के तहत चर्चा के दौरान हंगामा

देहरादून, ब्यूरो। उत्तराखंड की पांचवीं विधानसभा के दूसरे सत्र में आज गुरुवार को विपक्ष के विधायकों ने जिला विकास प्राधिकारणों को समाप्त करने की मांग को लेकर जमकर हंगामा काटा। विधायकों ने बजट की काॅपी भी फाड़ दी। विधायक अनुपमा रावत और सुमित हृदयेश से विधानसभा मार्शल की धक्का-मुक्की भी हुई। स्पीकर ऋतु खंडूड़ी ने काफी समझाया लेकिन विपक्ष शांत नहीं बैठा। दोपहर बाद नियम 58 के तहत जिला विकास प्राधिकारण को लेकर सदन में बहस हुई। विपक्ष ने इसे पर्वतीय क्षेत्रों के हिसाब से अव्यावहारिक करार दिया। विधायकों ने कई तरह के सवाल प्राधिकरण को लेकर उठाए। इन्हें लूट का अड्डा करार देते हुए बंद करने की मांग की गई। ग्रामीण इलाकों में जहां साइकिल नहीं जाती वहां पर कार पार्किंग के नियम इस प्राधिकरण के तहत बनाए गए हैं। हालांकि मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने सवाल के जवाब में कहा कि प्राधिकरण से कोई अगर कोई स्वेच्छा से अपना नक्शा पास करवाना चाहता है तो कर सकता है। लेकिन, विपक्ष ने एक नहीं मानी और इसे निरस्त करने की मांग को लेकर अड़े रहे।

विधानसभा सत्र में कांग्रेस विधायकों ने फाड़ी बजट की प्रतियां, मार्शल से धक्का-मुक्की; जमकर हंगामा

विधानसभा सत्र में कांग्रेस विधायकों ने फाड़ी बजट की प्रतियां, मार्शल से धक्का-मुक्की; जमकर हंगामा

सदन में चर्चा के दौरान ज्वालापुर विधायक रवि बहादुर ने भी कई सवाल इस प्राधिकरण को लेकर उठाए। वहीं, हरिद्वार ग्रामीण विधायक अनुपमा रावत ने कहा कि मेरी विधानसभा में लोगों से नक्शा मांगा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण लूटपाट का जरिया बन गया है। लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण क्षेत्रों से प्राधिकरण को खत्म करना चाहिए। वहीं कांग्रेस विधायक सुमित हृ्रदयेश ने कहा कि नजूल भूमि को फ्री होल्ड करने की प्रक्रिया होनी चाहिए। प्राधिकरण इन लोगों पर कार्रवाई करता है।

वहीं, संसदीय कार्य मंत्री एवं शहरी विकास मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो पैसा प्राधिकरण कमाते हैं, उस क्षेत्र में अवस्थापना से जुड़े कामों में लगता है। 2016 के बाद जो क्षेत्र जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण में शामिल हुए थे, वहां मानचित्र की कोई अनिवार्यता नहीं है। इसके बाद मंत्रिमंडलीय उप समिति की रिपोर्ट के आधार पर तमाम राहत दी गई। तय किया गया था कि अगर 2016 के बाद विकास प्राधिकरण में शामिल होने वाले नए क्षेत्रों को नक्शा पास कराने की स्वेच्छा से आजादी होगी, बाध्यता नहीं होगी। मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया था कि 2016 से पूर्व के बने हुए विकास प्राधिकरण को छोड़कर नए जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण को स्थगित किया गया था।

उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने कहा कि प्राधिकरण की जरूरत क्यों है? पालिका, नगर पंचायत से नक्शे पास होते थे। जब प्राधिकरण इतना पैसा वसूल रहा है तो उसके बदले जनता को क्या सुविधा दे रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में शुल्क दो फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में शुल्क पांच फीसदी। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण बेतुका निर्णय है। गरीबों से यह मात्र वसूली का जरिया है। उप नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछली कमेटी की रिपोर्ट को पटल पर रक्खकर प्राधिकरण को समाप्त किया जाए।