डीएम, मुख्य शिक्षा अधिकारी ने जीआईसी सूखीढांग में छात्र-छात्राओं के साथ किया भोजन 

चंपावत, ब्यूरो। उत्तराखंड के चंपावत जिले के राजकीय इंटर काॅलेज में दो दिन से सुर्खियों में रहे मध्यान्ह भोजन विवाद की जांच में कारण कुछ और ही सामने आया है। महिला की जाति के कारण नहीं बल्कि छात्र-छात्राओं ने स्वास्थ्य कारणों से चावल नहीं खाया और मध्यान्ह भोजन का विरोध किया था। एक दिन पहले चंपावत जिले के डीएम, मुख्य शिक्षा अधिकारी समेत कई अफसर खुद चंपावत के राजकीय इंटर काॅलेज (जीआईसी) सूखीढांग पहुंचे और स्कूल की छात्र-छात्राओं के साथ भोजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर किसी छात्र को चावल नहीं खाना है तो उनके लिए रोटी बनाई जाए और साथ ही वह सब्जी और दाल तो खा ही सकते हैं। इस दौरान छात्र-छात्राओं के अभिभावक भी मौजूद रहे। डीएम समेत अन्य अफसरों ने अभिभावकों से बातचीत की और छात्रों को भोजन करने के लिए राजी किया।

बता दें कि दो दिन पूर्व मीडिया की सूर्खियों में रहा कि चंपावत के सूखीढांग जीाआईसी में कुछ छात्र-छात्राओं ने अनुसूचित जाति की भोजनमाता के हाथों बना भोजन करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में भी आ गया। विवाद बढ़ता देख मौके पर पहुंचे अधिकारियों के सामने कुछ और बात सामने आ गई। यही नहीं इस मामले में कई छात्रों की टीसी तक काट ली गई थी, लेकिन बाद में स्कूल प्रशासन ने इसे छात्रों और अभिभावकों को दबाव में लाने के लिए किया गया कदम बताया और कहा कि किसी भी छात्र का नाम नहीं काटा जाएगा। स्कूल पढ़ने के लिए हैं नाम काटने के लिए नहीं। इस मामले के साथ ही स्कूल में ही एक शिक्षक पर कुछ छात्राओं ने मारपीट का भी आरोप लगाया था उसे भी सुलझा दिया गया है। विवाद एक-दूसरे की सीट पर बैठने को लेकर पैदा हुआ था। इस मामले में शिक्षक कमल राजन ने कहा कि मुझ पर लगाए गए सारे आरोप झूठे हैं। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति की एक बालिका को सीट पर नहीं बैठने देने पर छात्राओं को समझाया गया था। नहीं मानने पर दो छात्राओं को डांटा गया।

बता दें कि पूरा विवाद सामने आने के बाद चंपावत जिलाधिकारी नरेंद्र सिंह भंडारी और मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) जितेंद्र सक्सेना एक दिन पहले सूखीढांग जीआईसी पहुंचे। उन्होंने छात्र-छात्राओं के साथ बैठकर भोजन भी किया। इस दौरान भोजन न करने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों ने कहा कि चावल से दिक्कत होने के कारण उन्होंने खाना खाने से इनकार किया था। भोजनमाता से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। स्कूल में 57 में से उपस्थित सभी 37 छात्र-छात्राओं ने खाना खाया। स्कूल प्रधानाचार्य प्रेम सिंह ने एक दिन पूर्व इस संबंध में अभिभावकों से मंत्रणा की थी लेकिन तब मामला नहीं सुलझ सका था।