रूस-यूक्रेन के बीच जंग को अब 90 से ज्यादा  दिन हो गए हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस बीच रूसी मीडिया के जाने-माने एंकर ओल्गा स्केबेयेवा ने अमेरिका को धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने यूक्रेन को लंबी दूरी के रॉकेट या तोप भेजे तो ऐसा करके वह रेड लाइन क्रॉस कर देगा। इससे काफी गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन अगले हफ्ते यूक्रेन को हथियारों की एक और शिपमेंट भेजने की घोषणा कर सकते हैं। इस शिपमेंट में कई लॉन्ग रेंज मिसाइल और आर्टिलरी भेजी जाएगी।

रूस ने केंद्रीय यूक्रेनी शहर निप्रो के एक सैन्य ठिकाने पर जबर्दस्त हमला किया। हमले में करीब 12 लोगों की मौत हो गई और 30 लोग घायल हुए। जंग की शुरूआत से अब तक निप्रो रूस के हमले से बचा हुआ था। लोग पूर्वी शहर से भागकर वहां पर शरण ले रहे थे। यूक्रेन के अधिकारियों ने शुक्रवार जानकारी दी कि पूर्वी यूक्रेन में रूसी सेना ने रेलवे हब शहर Lyman पर कब्जा कर लिया और सिविएरोडोनेट्सक शहर के ज्यादा हिस्से को घेर लिया, साथ ही बताया कि कीव की सेना हफ्तेभर से मास्को के हमले का सामना कर रही थी।

यूक्रेनी अधिकारियों ने माना है कि रूसी सेना ने ज्यादातर शहरों पर कब्जा कर लिया था, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेनी सेना अभी भी रूसी सेना को स्लोवियनस्क की ओर आगे बढ़ने से रोक रही है। स्लोवियनस्क यूक्रेन का एक प्रमुख शहर है जो दक्षिण-पश्चिम में आधे घंटे की ड्राइव पर है। रीजनल गवर्नर सेरही गदाई ने बताता कि रूसी सेना ने सिविएरोडोनेट्सक के दो-तिहाई हिस्से को घेर लिया था और यहां की 90% बिल्डिंग को नष्ट कर दिया था। सिविएरोडोनेट्सक यूक्रेन का डोनबास में बना सबसे बड़ा शहर है।

भारतीय तेल कंपनियों के लगभग 1,000 करोड़ रुपये रूस में फंसे

यूक्रेन पर हमले के बाद रूस से डॉलर में होने वाले विदेशी भुगतान पर रोक लगने से भारतीय तेल कंपनियों की आठ अरब रूबल (करीब 1,000 करोड़ रुपये) की लाभांश आय रूस में फंस गई है. सार्वजनिक तेल कंपनियों के अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों ने रूस में चार विभिन्न परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी खरीद में करीब 5.46 अरब डॉलर का निवेश किया हुआ है. इन परिसंपत्तियों से निकलने वाले तेल एवं गैस की बिक्री से भारतीय कंपनियों को लाभांश आय होती है. हालांकि यूक्रेन संकट के बाद रूस की सरकार ने अमेरिकी डॉलर में भुगतान करने पर रोक लगा दी है. इस पाबंदी की वजह से भारतीय तेल कंपनियां रूस से अपनी आय की निकासी नहीं कर पा रही हैं.