उत्तराखंड के शांति प्रिय इलाकों में क्या जरूरी है माननीयों के लिए गनर?, इस पहल को अपना पाएंगे उत्तराखंड के अन्य विधायक

पौड़ी गढ़वाल (कुलदीप बिष्ट): वैसे तो सभी नेताओं में दिखावे का बड़ा शौक होता है, लेकिन जो पहली बार विधायक बनता है उसके अदंर तो यह शौक कुछ ज्यादा चर्रा जाता है। इसे मुंबइया भाषा में कहते हैं अपना भपका दिखाना। उत्तराखंड में इस बार गठित विधानसभा में एक ऐसा विधायक भी चुनकर आया है जिसने एक बड़ी पहल की है। अगर इस तरह की पहल सभी विधायक करें तो इससे प्रदेश के करोड़ों रूपये बचाये जा सकते हैं। सवाल अब यह है कि इस विधायक का साथ कोई और विधायक भी देगा या नहीं। क्योंकि भपका भी तो जरूरी है।

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गौरतलब है कि पौड़ी क्षेत्र से राजकुमार पोरी पहली बार विधायक बनकर उत्तराखंड विधानसभा के सदन में पहुंचे। पोरी वैसे भी सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं, जो उनके चहरे से भी झलकता है। अब पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी ने एक बड़ी पहल करते हुए ऐलान कर दिया है कि वह विधायक की सुरक्षा में के लिए तैनात रहने वाले गनर को नहीं लेंगे। इसके लिए उन्होंने पौड़ी के जिलाधिकारी के सामने अपनी बात भी रख दी है। अब उनके इस फैसले के बाद सवाल खड़े होने भी लाजिमि हैं कि आखिर हमारे माननीयों को गनर क्यों चाहिए? वैसे इस का जवाब भी राजकुमार पोरी ने खुद ही दिया कि उत्तराखंड शांत क्षेत्र है। उन्हें नहीं लगता कि उन्हें किसी से कोई खतरा है और वह उस विधानसभा से हैं जहां शांतिप्रिय लोग रहते हैं। ऐसे में गनर की उन्हें क्या आवश्यकता।

uttarakhand news
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वैसे यह आसान नहीं, लेकिन देखना होगा कि उत्तराखंड में कोई और विधायक इस राह पर चलता है या नहीं। उत्तराखंड में सैकड़ों पुलिसकर्मी ऐसे ही वीआईपी ड्यूटी पर तैनात हैं और पुलिस फोर्स में जवानों की कमी साफ नजर आती है। चुनाव के समय कई पुलिसकर्मी वीआईपी ड्यूटी से हट जाते हैं। इसके अलावा सामान्य दिनों में क्या पुसिलकर्मियों की कमी नहीं रहती? अब चारधाम यात्रा शुरू होने वाली है जिसमें पुलिसकर्मियों की कमी साफ तौर पर खलती रही है। इसको बाद बरसात का मौसम आ जाता है जिसमें पुलिसकर्मी ही देवदूत बनकर सबकी मदद करते हैं। ऐसे में यह भी लगता है शायद कुछ और पुलसिकर्मी होते। क्या विधायक पोरी की इस नेक पहल की सराहना नहीं की जानी चाहिए? भले ही राजकुमार पोरी ने भी कहा कि जब आवश्यता हो तब गनर लिया जा सकता है। पोरी की पहल के बाद उत्तराखंड के कितने विधायक इस शांत प्रदेश में इस फैसले को आगे बढ़ाते हैं, यह भी देखना होगा। या फिर भपका बनाने या दिखावे के लिए वह इस पहल को नजरअंदाज कर देंगे। इससे बड़ी बात ये कि राजकुमार पोरी कब तक अपनी इस बात पर कायम रहते हैं। क्योंकि उत्तराखंड में चाटुकार बससे पहले नाव डूबोते रहे हैं। देखा जाए तो माननीयों, दर्जाधारियों समेत सरकार में तैनात तमाम अफसर भी लाव-लश्कर लेकर चलते हैं। इस दिखावे में राज्य सरकार के हर माह करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। इन पुलिसकर्मियों को किसी और काम में लगाया जा सकता है।